सत्य-सनातन-धर्म की पुनःप्रतिष्ठा और वैश्वीकरण कब होगा?
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(उत्तर) : जिस दिन निर्विवाद रूप से पूरा विश्व --
(१) कर्मफलों के सिद्धान्त, (२) पुनर्जन्म, और (३) आत्मा की शाश्वतता को स्वीकार कर लेगा, उस दिन से विश्व में सिर्फ सनातन-धर्म ही रहेगा। फिर ईश्वर के अवतारों पर भी सभी की आस्था होने लगेगी।
सनातन-धर्म के वर्तमान समय में तीन सबसे बड़े शत्रु हैं --
(१) पश्चिम यानि ईसाईयत का प्रभाव, (२) मार्क्सवाद और उसके प्रभाव से नास्तिकता, (३) इस्लामी जिहाद॥
इन से कैसे बचाव हो? इस विषय पर मनीषी विचार करें।
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सबसे पहिले हमें पुनर्जन्म को सत्य सिद्ध करना होगा, फिर कर्मफलों के सिद्धान्त को। आत्मा की शाश्वतता अपने आप ही लोगों के समझ में आ जाएगी।
संसार में इस समय तमोगुण सबसे अधिक व्याप्त है। उसी के कारण असत्य और अंधकार की शक्तियाँ छाई हुई हैं। जब तक तमोगुण की प्रधानता है तब तक आसुरी और पैशाचिक शक्तियों का वर्चस्व रहेगा। तमोगुण का प्रभाव कम होने पर ही मनुष्यों में विवेक जागृत होगा।
इस से अधिक लिखने का कोई लाभ नहीं है। ॐ तत्सत् !!
कृपा शंकर
१७ अगस्त २०२३
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