अफीम के उत्पादन और उपयोग पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण है जो और भी अधिक कठोर होना चाहिए। दर्दनाशक और अवसाद-मुक्ति की दवाइयों के निर्माण के लिए अफीम की आवश्यकता पड़ती है, जिसके उत्पादन के लिए किसानों को सरकार से लाइसेंस लेना पड़ता है। बिना लाइसेंस के अफीम उगाना एक अपराध है जिसमें जमानत भी नहीं होती।
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पंजाब एक अत्यधिक संवेदनशील प्रांत है, जहाँ पाकिस्तान से चोरी-छिपे बहुत बड़ी मात्रा में अफीम की तस्करी होती है। खालिस्तानी आंदोलन के लिए सारा धन अफीम की तस्करी से आता है। पूर्वोत्तर भारत में मणिपुर की सारी समस्याओं का एकमात्र कारण अफीम का अवैध उत्पादन और तस्करी है। वहाँ चर्च के संरक्षण में बाहर से आकर बसी हुई जनजातियाँ अफीम का उत्पादन व तस्करी करती हैं, और स्थानीय लोग जब विरोध करते हैं तब उनकी हत्या होने लगती हैं। सारे समाचार माध्यम यानि प्रेस और स्थानीय प्रशासन बिका हुआ है। वर्तमान भारत सरकार की अत्यधिक सख्ती यानि कठोरता के कारण ही स्थिति नियंत्रण में हैं, अन्यथा वह सारा क्षेत्र ही जल उठे। आतंकवादियों को सारा धन नशीले पदार्थों की तस्करी से आता है।
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दक्षिणपूर्व एशिया के इन तीन देशों -- सिंगापूर, मलयेशिया और इंडोनेशिया में यदि किसी के पास जरा सी भी अफीम पाई जाती है, तो उसकी सजा तुरंत मृत्युदंड है। उसकी कोई सुनवाई नहीं होती। जापान, चीन (होङ्ग्कोंग सहित) अमेरिका और लगभग सारे यूरोप में इसकी सजा उम्रकैद यानि आजीवन-कारावास है।
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इतनी कठोरता के बावजूद भी पूरी दुनियाँ में अफीम की तस्करी होती है, क्योंकि इसमें बहुत अधिक धन लगा हुआ है। सारे नशीले ड्रग अफीम से ही बनते हैं। अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश की सरकार भी अफीम की तस्करी को नहीं रोक सकी है। अमेरिका ने अफगानिस्तान पर आक्रमण और अधिकार किया उसके मुख्य कारणों में से एक था इस क्षेत्र को अफीम के उत्पादन से मुक्त करना। विश्व में सबसे अधिक अफीम अफगानिस्तान में उगाई जाती है। वहाँ की अर्थव्यवस्था ही अफीम की तस्करी से चलती है। लेकिन अमेरिका के सैनिक ही जब नशा करने लगे तब अमेरिका को वहाँ से भागना पड़ा।
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इसका एक ही इलाज है कि स्वयं बच कर रहो, और अपने परिवार के बच्चों को बचाकर रखो। किसी भी तरह का नशा चाहे वह शराब का ही क्यों न हो, छोड़ दें। अपने बच्चों के सामने भूल कर भी नशा न करें। जो लोग नशा करते हैं, उनसे दूर रहें। अपने घर में तो ऐसे किसी नशा करने वाले व्यक्ति को घुसने ही न दें। और हम कुछ भी नहीं कर सकते।
१९ अगस्त २०२५
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