Sunday, 23 August 2026

अपनी प्रज्ञा अब परमात्मा को सौंप रहा हूँ। मेरी प्रज्ञा अब से परमात्मा में ही स्थित रहेगी।

 अपनी प्रज्ञा अब परमात्मा को सौंप रहा हूँ। मेरी प्रज्ञा अब से परमात्मा में ही स्थित रहेगी।

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जहाँ तक मेरा दिमाग चलता था और बुद्धि काम करती थी, वहाँ तक मैंने सब कुछ लिख दिया है। लिखने को अब कुछ बचा ही नहीं है। इससे अधिक दिमाग और बुद्धि मुझ में नहीं है। अब तक पाँच हजार के लगभग पोस्ट/लेख लिख चुका हूँ। मन भर गया है इसलिये अब परमात्मा को अपना अन्तःकरण और प्रज्ञा बापस लौटा रहा हूँ।
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किसी भी तरह की कोई भी कामना/आकांक्षा अब मुझमें अवशिष्ट नहीं है। अवशिष्ट जीवन परमात्मा को पूर्णतः समर्पित है। आप सब मेरी मंगलमय शुभ कामनाएँ स्वीकार कीजिये। परमात्मा में मैं आपके साथ एक हूँ।
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ॐ तत्सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर २३ अगस्त २०२५

२३ अगस्त २०२५

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