"अनन्य-योग" और "अव्यभिचारिणी-भक्ति" से ही परमात्मा की प्राप्ति (भगवत्-प्राप्ति) हो सकती है। अन्य कोई मार्ग नहीं है। हम कोई भी साधना करें, ईश्वर-लाभ केवल "अनन्य-योग" और "अव्यभिचारिणी-भक्ति" से ही होगा ---
Tuesday, 3 February 2026
अनन्य-योग" और "अव्यभिचारिणी-भक्ति" से ही परमात्मा की प्राप्ति (भगवत्-प्राप्ति) हो सकती है ---
श्रीमद्भगवद्गीता का सार जो मुझे अपनी अति अल्प और सीमित बुद्धि से समझ में आया है -- .
श्रीमद्भगवद्गीता का सार जो मुझे अपनी अति अल्प और सीमित बुद्धि से समझ में आया है --
समर्पण ---
किसी भी तरह का वर्ग-संघर्ष, विशेषकर जातिगत वर्ग-संघर्ष, समाज और राष्ट्र के लिए बहुत अधिक घातक है ---
किसी भी तरह का वर्ग-संघर्ष, विशेषकर जातिगत वर्ग-संघर्ष, समाज और राष्ट्र के लिए बहुत अधिक घातक है। यह हमारा दुर्भाग्य है कि जो लोग "सामाजिक समरसता" की बातें करते थे, वे ही अब "सामाजिक विषमता" उत्पन्न कर रहे हैं। दूसरों का सिर काट कर कोई बड़ा नहीं बन सकता। आरक्षण के नाम पर दूसरों (अनारक्षित वर्ग) का सिर काटा जा रहा है।
भारत में क्षत्रिय राजाओं का राज्य फिर से स्थापित होगा --- .
भारत में क्षत्रिय राजाओं का राज्य फिर से स्थापित होगा ---
आप से मैं केवल हाथ जोड़कर प्रार्थना ही कर सकता हूँ ---
आप से मैं केवल हाथ जोड़कर प्रार्थना ही कर सकता हूँ। यह भी आपसे एक विनम्र प्रार्थना ही है। अपनी पूरी चेतना से निवेदन कर रहा हूँ कि अगले चार से छह महिने तक आत्म-संयम बना कर ईश्वर को हर समय अपनी स्मृति में रखें। भटकें नहीं। स्वधर्म पर दृढ़ रहें। जो होगा वह अच्छा ही होगा। आपका कल्याण होगा।
सनातन-धर्म का उद्देश्य ---
सनातन-धर्म का उद्देश्य --- "मनुष्य जीवन में जो भी सर्वश्रेष्ठ हैं उसे निज जीवन में व्यक्त करना सनातन धर्म है। हम सब अव्यक्त ब्रह्म है। उस ब्रह्मत्व को अभिव्यक्त करना सनातन धर्म है।"