किसी भी तरह का वर्ग-संघर्ष, विशेषकर जातिगत वर्ग-संघर्ष, समाज और राष्ट्र के लिए बहुत अधिक घातक है। यह हमारा दुर्भाग्य है कि जो लोग "सामाजिक समरसता" की बातें करते थे, वे ही अब "सामाजिक विषमता" उत्पन्न कर रहे हैं। दूसरों का सिर काट कर कोई बड़ा नहीं बन सकता। आरक्षण के नाम पर दूसरों (अनारक्षित वर्ग) का सिर काटा जा रहा है।
देश में समान नागरिक संहिता तुरंत प्रभाव से लागू हो, और किसी भी तरह का जातिगत भेदभाव किसी से भी न हो।
पुनश्च: --- आज चाहे कितना भी असत्य और अन्धकार छाया हो, भारतवर्ष निकट भविष्य में निश्चित रूप से एक महान आध्यात्मिक राष्ट्र होगा, और अपने परम वैभव को प्राप्त करेगा। मुझे कोई संदेह नहीं है। आसुरी और पैशाचिक शक्तियाँ कितनी भी प्रबल हों, वे निश्चित रूप से पराभूत होंगी। ॐ ॐ ॐ !!
२५ जनवरी २०२६
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