सनातन-धर्म का उद्देश्य --- "मनुष्य जीवन में जो भी सर्वश्रेष्ठ हैं उसे निज जीवन में व्यक्त करना सनातन धर्म है। हम सब अव्यक्त ब्रह्म है। उस ब्रह्मत्व को अभिव्यक्त करना सनातन धर्म है।"
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वर्णाश्रम धर्म सनातन का ही भाग है, अतः सारे सनातन धर्मावलम्बी सवर्ण हैं। यहाँ कोई अवर्ण नहीं है। जो भी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, और शूद्र हैं, सभी सवर्ण हैं। सवर्ण शब्द का अर्थ ही हिन्दू होना है। अतः कृपा कर के इस शब्द "सवर्ण" का दुरुपयोग न करें। सनातन धर्म में चार ही वर्ण हैं, और चार ही आश्रम हैं।
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हम सब मूल रूप से शाश्वत आत्मा है। आत्मा का स्वधर्म परमात्मा की प्राप्ति है। हम परमात्मा की चेतना में रहें, यही हमारा स्वधर्म है।
ॐ तत्सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
०३ फरवरी २०२६
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