Friday, 3 March 2017

मैं स्वयं ही समस्या हूँ और समाधान भी मैं स्वयं ही हूँ .......

मैं स्वयं ही समस्या हूँ और समाधान भी मैं स्वयं ही हूँ .......
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एक बार देहरादून में अपने पूर्व परिचित, हिमालय के एक परम सिद्ध योगी महात्मा से बातचीत हो रही थी| अब तो वे भौतिक देह में नहीं हैं| मैंने उनसे अपनी एक बहुत बड़ी व्यक्तिगत समस्या की चर्चा करनी चाही तो उन्होंने मुझे चुप करते हुए एक बड़ी अच्छी बात कही जिसका सार यह था कि मेरी कोई समस्या नहीं है, मैं स्वयं ही समस्या हूँ|
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उनके सत्संग से एक बात बहुत अच्छी तरह समझ में आ गयी कि आध्यात्मिक दृष्टी से मनुष्य की प्रथम, अंतिम और एकमात्र समस्या परमात्मा को उपलब्ध होना यानि समर्पित होना ही है| इसके अतिरिक्त अन्य कोई समस्या है ही नहीं| अन्य सब समस्याएँ परमात्मा की हैं|
परमात्मा की प्राप्ति के अतिरिक्त मनुष्य की अन्य कोई समस्या है ही नहीं| सब समस्याओं का समाधान भी परमात्मा को प्राप्त करना ही है, जिसका एकमात्र मार्ग है परम प्रेम और मुमुक्षुत्व यानि 'उसको' पाने कि एक गहन अभीप्सा|
अपनी चेतना को भ्रूमध्य से ऊपर रखो और निरंतर परमात्मा का चिंतन करो| फिर आपकी चिंता स्वयँ परमात्मा करेंगे|
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जीवन में खूब धक्के खाकर यानि खूब खट्टे-मीठे हर तरह के अनेक अनुभवों से निकल कर मैं भी इसी परिणाम पर पहुँचा हूँ| जीवन में मैं कैसे कैसे और कौन कौन से अनुभवों से मैं निकला हूँ इसका कोई महत्व नहीं है| महत्व सिर्फ इसी बात का है कि मैं उनसे क्या बना हूँ|
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आप सब में हृदयस्थ परमात्मा को नमन |
ॐ . गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ ||

मैं शिव हूँ, यह समस्त अनंत अस्तित्व शिवरूप में मैं ही हूँ ....

धारणा व ध्यान .....
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मैं शिव हूँ, यह समस्त अनंत अस्तित्व शिवरूप में मैं ही हूँ|
किससे राग और किससे द्वेष करूँ?
मैं यह देह या अन्तःकरण की वृत्ति नहीं हूँ|
मैं सर्वव्यापक शिव हूँ|
मैं सर्वव्यापक शिव हूँ, मैं शिव हूँ, मैं शिव हूँ|
शिवोहं शिवोहं अहं ब्रह्मास्मि|
शिव शिव शिव|
ॐ ॐ ॐ ||

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शिवभाव में स्थित होकर ही हम इस परिवर्तनशील और निरंतर आंदोलित सृष्टि में अविचलित रह सकते हैं, उससे पूर्व नहीं| भगवान परमशिव इस सृष्टि में भी हैं और इससे परे भी हैं| गीता में भगवान श्रीकृष्ण एक स्थिति या उपलब्धि के विषय में कहते हैं ..."यं लब्ध्वा चापरं लाभं मन्यते नाधिकं ततः| यस्मिन् स्थितो न दुःखेन गुरुणापि विचाल्यते||"
मेरी सीमित व अल्प समझ से भगवान श्रीकृष्ण ने यहाँ शिवभाव में स्थिति को ही उपलब्धि बताया है| यदि मैं गलत हूँ तो विद्वजन मुझे क्षमा करें|
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दुर्जन लोग अपने पापकर्मों के द्वारा मुझे कष्ट पहुंचाकर मेरी परीक्षा ही ले रहे हैं और मुझे सुधरने का अवसर ही दे रहे है अतः वह क्षमा के योग्य है| विपरीत परिस्थिति में शान्ति के लिए प्रयत्न करने का प्रयास करूंगा| अब तक तो असफल ही रहा हूँ| दुर्जनों के द्वारा जो मेरा अपमानादि होता है उसके द्वारा मेरा अधिक लाभ ही होता है| 

ॐ शिव !
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मेरा आदर्श वह दिगम्बर महात्मा है जो हिमालय पर निर्वस्त्र रहता है, दशों दिशाएँ जिसके वस्त्र हैं| उसको किसी चीज की आवश्यकता नहीं है|
ॐ परात्पर गुरवे नमः || ॐ परमेष्ठी गुरवे नमः || ॐ ॐ ॐ ||

जीवन एक शाश्वत जिज्ञासा है सत्य को जानने की ......

जीवन एक शाश्वत जिज्ञासा है सत्य को जानने की .....
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जीवन एक शाश्वत जिज्ञासा है सत्य को जानने की| वर्तमान में तो चारों और असत्य ही असत्य दिखाई दे रहा है, पर यह अन्धकार अधिक समय तक नहीं रहेगा| असत्य, अंधकार और अज्ञान की शक्तियों का निश्चित पराभव होगा| मनुष्य जीवन की सार्थकता भेड़ बकरी की तरह अंधानुकरण करने में नहीं है, अपितु सत्य का अनुसंधान करने और उसके साथ डटे रहने में है| मुझे गर्व है मेरे धर्म और संस्कृति पर, मुझे गर्व है भारत के ऋषियों पर जिन्होंने सत्य को जानने के प्रयास में परमात्मा के साथ साक्षात्कार किया और ज्ञान का एक अथाह भण्डार छोड़ गए|
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आदिकाल से अब तक भारत की अस्मिता एक विशेष उद्देश्य के लिए बची हुई है| भारत की अस्मिता पर जितने प्रहार हुए हैं उसका दस लाखवाँ भाग भी यदि किसी अन्य संस्कृति पर होता तो वह संस्कृति पूर्ण रूप से नष्ट हो गयी होती| मध्य एशिया, अरब और यूरोप से आई आसुरी शक्तियों ने भारत को नष्ट करने में कोई कसर नहीं छोडी| भारत में बड़े भयानक नरसंहार और क्रूर अत्याचारों द्वारा मतांतरण करने वाली संस्कृतियाँ अब स्वयं विनाश के कगार पर हैं|
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भारत अब तक बचा हुआ है तो बस एक ही उद्देश्य के लिए है ....... और वह है .... अंततोगत्वा परमात्मा की पूर्ण अभिव्यक्ति पुनश्चः इस धरा पर करने के लिए| इस समय पूरे विश्व में जो आसुरी शक्तियाँ छाई हुई हैं उनका विनाश निश्चित है|
भारत निश्चित रूप से उठेगा और अपना उद्देश्य पूर्ण करेगा|
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ॐ नमः शिवाय| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय| ॐ ॐ ॐ ||

अनिष्ट शक्तियों का कष्ट और उन से निवृति .....

अनिष्ट शक्तियों का कष्ट और उन से निवृति .....
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सूक्ष्म जगत में अनेक शुभ देवात्माएँ हैं और अशुभ आसुरी आत्माएँ भी| देवात्माएँ हमारी निरंतर सहायता करती हैं पर असुरात्माएँ हमारा निरंतर अनिष्ट करती रहती हैं| अनिष्ट शक्तियों के कष्ट से आज संपूर्ण मानव जाति पीड़ित है| इनके कारण आजकल ..... अवसाद, आत्महत्या के विचार, अत्यधिक क्रोध, उन्मादग्रस्तता, अत्यधिक वासनात्मक विचार, अनिद्रा, अतिनिद्रा, शारीरिक कष्ट, अशांत मन, जीवन में विफलता, गृह क्लेश, गर्भपात, आर्थिक हानि, वंशानुगत रोग, व्यसन, दुर्घटना, बलात्कार, यौन रोग, समलैंगिकता आदि आदि लगातार बढ़ रहे हैं|
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अत्यधिक भोगविलास में रत मनुष्य अति शीघ्र आसुरी शक्तियों के प्रभाव में आकर उनके उपकरण बन जाते हैं| वे सदा दूसरों को कष्ट देते हैं और परपीड़ा में आनंदित होते हैं| दुष्ट और क्रूर प्रकृति के लोग निश्चित रूप से आसुरी जगत के शिकार हैं| अंततः इनका जीवन बड़ा कष्टमय होता है|
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जो आध्यात्मिक साधक हैं उन्हें तो ये आसुरी आत्माएँ अत्यधिक कष्ट देती हैं| ये नहीं चाहतीं कि कोई आध्यात्मिक उन्नति करे| ये ही विक्षेप उत्पन्न कर साधकों को साधना मार्ग से विमुख करने का प्रयास करती रहती हैं| घर परिवार के किसी सदस्य को अपना शिकार बना कर ये उसके माध्यम से साधकों को परेशान करती हैं|
साधू-संतों को भी ये परेशान करने के प्रयास में रहती हैं| पर साधू-संतों की दृढ़ता के समक्ष उनका ये कुछ बिगाड़ नहीं पातीं| फिर भी अनेक साधुओं को ये भ्रष्ट कर देती हैं|
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अनिष्ट शक्तियों के प्रभाव से बचने के लिए हमें निम्न उपाय करने चाहियें .....

(१) कुसंग त्याग कर सिर्फ सकारात्मक लोगों के साथ सत्संग करें| नियमित साधना दृढ़ता से करें| हर समय परमात्मा का चिंतन करें| सब से बड़ी बात है परमात्मा में दृढ़ आस्था| अपनी रक्षा हेतु परमात्मा से सदा प्रार्थना करें|
(२) सादा जीवन, उच्च विचार| वेषभूषा भारतीय संस्कृति के अनुकूल हो| घर का वातावरण पूर्णतः सात्विक रखें|
(३) हर तरह के नशे का पूर्णतः त्याग|
(४) सात्विक भोजन करें| जो भगवान को प्रिय है वो ही भोजन, भगवान को निवेदित कर के ही ग्रहण करें|
(५) नियमित दिनचर्या हो|
(६) घर को साफ़-सुथरा रखें| अनेक लोग घरों में आँगन को देशी गाय के गोबर से लीपते हैं, उन घरों में अनिष्ट आत्माएँ प्रवेश नहीं कर पातीं| जहाँ ऐसा करना संभव न हो वहाँ पानी में देशी गाय का थोड़ा सा मुत्र मिलाकर नित्य पोचा लगाएँ|
घर में तुलसी के पौधें खूब लगाएँ| संभव हो तो घर में एक देशी गाय रखें और उसकी खूब सेवा करें|
(७) भगवान ने हमें विवेक दिया है| निज विवेक के प्रकाश में सारे कार्य परमात्मा की प्रसन्नता के लिए ही करें| परमात्मा हमारी बुद्धि को तदानुसार प्रेरित करेंगे| तब जो भी होगा वह हमारे भले के लिए ही होगा|
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सभी को शुभ कामनाएँ और नमन ! ॐ तत्सत् | ॐ ॐ ॐ ||

Wednesday, 1 March 2017

किसी भी परिस्थिति में अपनी नियमित आध्यात्मिक आराधना न छोड़ें .....

किसी भी परिस्थिति में अपनी नियमित आध्यात्मिक आराधना न छोड़ें .....
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किसी भी परिस्थिति में अपनी नियमित आध्यात्मिक आराधना न छोड़ें| बड़ी कठिनाई से हमें भगवान की भक्ति का यह अवसर मिला है| कहीं ऐसा न हो कि हमारी ही उपेक्षा से भगवान को पाने की हमारी अभीप्सा ही समाप्त हो जाए|
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जीवन में अंधकारमय प्रतिकूल झंझावात आते ही रहते हैं जिनसे हमें विचलित नहीं होना चाहिए| इनसे तो हमारी प्रखर चेतना ही जागृत होती है व अंतर का सौंदर्य और भी अधिक निखर कर बाहर आता है|
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समस्त सृष्टि चैतन्य का एक खेल मात्र है| जो कुछ भी देश-काल में घटित हो रहा है वह एक विराट चुम्बकीय क्षेत्र के दो विपरीत ध्रुवों के बीच का तनाव या घर्षण मात्र है| इसे ईश्वर के मन का एक विचार भी कह सकते हैं| प्रकृति, माया और जीव उसी परम चैतन्य की अभिव्यक्तियाँ हैं| सृष्टि के इस रहस्य को समझ कर उस परम चैतन्य से अंततः जुड़ना ही मनुष्य जीवन का ध्येय है|
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कभी भी विचलित न हों| हम सब सच्चिदानंद परमात्मा की ही अभिव्यक्तियाँ हैं|
हारिये ना हिम्मत, बिसारिये न हरि नाम| सब को शुभ कामनाएँ और नमन|

ॐ तत्सत् |ॐ ॐ ॐ ||

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति आर्थिक हितों से चलती है, भावनाओं से नहीं ..

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति आर्थिक हितों से चलती है, भावनाओं से नहीं ....
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राजनीति में चाहे वह एक व्यक्ति हो या चाहे कोई एक देश, अपनी नीतियाँ अपने राष्ट्र के आर्थिक हितों से बनाता है, भावनाओं से नहीं|
ये जितने भी... साम्यवाद, पूँजीवाद, समाजवाद आदि वाद हैं वे सब जनता को सिर्फ मूर्ख बनाने के लिए हैं| इनसे असली लाभ राजनेताओं को ही है|
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कोंग्रेस के राज में नीतियाँ बनती थीं गाँधी परिवार, राजनेताओं व बड़े अधिकारियों के आर्थिक हित के लिए| देशहित तो सिर्फ दिखावा था|
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भाजपा ने भी कांग्रेस के शासन के समय किये हुए बड़े-बड़े घोटालों पर कोई कानूनी कार्यवाई न करके एक भी कांग्रेसी नेता को अभी तक जेल नहीं भेजा है, क्योंकि उन नेताओं के साथ साथ कई बड़े-बड़े पूँजीपति भी जेल चले जायेंगे जो ऐसा होने पर भाजपा की सरकार को गिरा देने की सामर्थ्य रखते हैं| 2G आदि घोटालों में सिर्फ राजनेताओं का ही नहीं सारी टेलिकॉम कम्पनियों के मालिकों का भी हाथ था जो अब भाजपा के साथ हैं|
इसीलिए भाजपा ने वित्त मंत्रालय सुब्रमण्यम स्वामी जैसे महान अर्थशास्त्री को न देकर अरुण जेटली जैसे विख्यात वकील को दे रखा है क्योंकि भ्रष्टाचार के मामले में सुब्रमण्यम स्वामी किसी की नहीं सुनते|
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पूँजी का धर्म .... कोई दल, देश, जाती व नस्ल नहीं होती| पूँजी का एकमात्र धर्म है ..... मुनाफ़ा|
जिधर अधिक मुनाफ़ा हो पूँजी उधर ही भागती है| यह एक कटु सत्य है|
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चीन और अमेरिका दिखाने के लिए चाहे कितने भी बड़े शत्रु हों, पर दोनों के इतने गहरे आर्थिक हित हैं कि दोनों एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते| चीन में मज़दूरी बहुत अधिक सस्ती है, क्योंकि वहाँ के मजदूर कानूनन हड़ताल नहीं कर सकते और काम के लिए मना भी नहीं कर सकते| अतः अमेरिका ने वहाँ अपना अधिकाँश धन लगा कर कारखाने बना रखे हैं जहाँ से माल बनकर अमेरिका जाता है| शुरू में दोनों देश इससे बहुत खुश थे| पर अब एक नया संकट खड़ा हो रहा है| चीन से अमेरिकी व अन्य विदेशी कम्पनियां अपना सारा मुनाफ़ा कमाकर बापस अपने देशों में भेज रही है, जिससे चीन को कुछ भी लाभ अब नहीं हो रहा है| जितना पैसा चीन में आता है उससे अधिक तो बाहर चला जाता है|
अमेरिका में भी उद्योग-धंधे बाहर चले जाने से बेरोजगारी बढ़ गयी है| इसी परिस्थिति का लाभ उठाकर लोगों की भावनाओं को भड़का कर ट्रम्प राष्ट्रपति बन गए हैं| अब अमेरिका भी पछता रहा है क्योंकि अपने उद्योग-धंधे तो चीन से बापस ला ही नहीं सकता जो कारखानों के रूप में वहाँ हैं| चीन जब चाहे तब उस संपत्ति को जब्त कर सकता है| बस यही एकमात्र कारण है दोनों देशों में व्याप्त तनाव का| इसका परिणाम युद्ध भी हो सकता है|
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विश्व के जितने भी जिहादी आतंकी संगठन हैं वे सब अमेरिका ने ही खड़े किये हैं जिनके माध्यम से अमेरिका अरब देशों का तेल लूट रहा है| जिस दिन उनका तेल समाप्त हो जाएगा उसी दिन अमेरिका, अन्य योरोपीय देशों व इजराइल के साथ मिलकर अरबों को बुरी तरह लूट कर बापस पाषाण युग में ला कर खडा कर देगा जहाँ वे फिर से गधों पर ही सवारी करेंगे| जब तक आतंकी संगठन अपने आका अमेरिका की बात मानते हैं तब तक तो ठीक है, पर जिस दिन अमेरिका के कहने में नहीं चलते अमेरिका उन्हें ठोक-पीट कर ठंडा कर देता है|
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भारत को अपने नियंत्रण में रखने के लिए ही अमेरिका पकिस्तान को हथियार देता है ताकि भारत अमेरिका से हथियार खरीदता रहे और डर कर रहे| अमेरिका कभी नहीं चाहेगा कि भारत में सुख-शांति रहे| चीन भी भारत को बर्बाद करना चाहता है पर कर नहीं पा रहा क्योंकि भारत उसके लिए एक बहुत बड़ा बाजार है| भारतीय लोग यदि अपना लालच छोड़कर चीनी सामान खरीदना बंद कर दें तो चीन में हाहाकार मच जाएगा| चीन का साम्यवाद एक ढकोसला है जिसका मार्क्स से कोई लेना देना नहीं है| चीन की मुख्य नीति ही है अपना भौगोलिक विस्तार|
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वर्त्तमान में नरेन्द्र मोदी की विदेश नीति, सैन्य नीति और आर्थिक नीतियाँ सही हैं| हमें सैन्य रूप से और आर्थिक रूप से अति शक्तिशाली बनना होगा| विदेशी मामलों में कूटनीति भी हमारी बहुत प्रभावशाली होनी चाहिए|
अमेरिका ने दादागिरी से डॉलर को विश्वमुद्रा बना रखा है| जिस दिन डॉलर को अन्य देश अस्वीकार कर देंगे अमेरिका की दादागिरी समाप्त हो जायेगी| ऐसा वातावरण अब बनने लगा है| भारत अब एक महाशक्ति बनने के कगार पर ही है|
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वन्दे मातरम् | भारत माता की जय | जय जननी जय भारत | ॐ ॐ ॐ ||

हमें अपने राष्ट्र से प्रेम है .....


हमें अपने राष्ट्र से प्रेम है .....
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आध्यात्म में जितना हमें परमात्मा से प्रेम है उतना ही इस भौतिक जगत में अपने राष्ट्र भारतवर्ष की अस्मिता से भी है| राष्ट्र की अस्मिता की रक्षा के लिए शस्त्र भी धारण करना पड़े तो वह भी धारण करेंगे, प्राणोत्सर्ग भी करना पड़े तो वह भी करेंगे| पता नहीं कितनी बार शस्त्रास्त्र धारण किये हैं और प्राण भी दिए हैं| राष्ट्र को अब और खंडित नहीं होने देंगे|
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पूरे विश्व में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहाँ की राजधानी के मुख्य मार्गों पर तथाकथित विद्यार्थी और तथाकथित शिक्षक, देश को तोड़ने और देश से आज़ादी की माँग सार्वजनिक रूप से बाजे-गाजों के साथ चिल्ला चिल्ला कर करते हैं और उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती| इतना ही नहीं अनेक राजनेता भी उनका समर्थन करते हैं| यह हमारा दुर्भाग्य ही है कि हम ऐसे दृश्य देखने को विवश हैं|
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जो लोग भारत से आज़ादी चाहते हैं उन्हें इस देश से आज़ाद कर दिया जाए और ऐसे देश में भेज दिया जाए जहाँ उनको आज़ादी प्राप्त है| इस देश को उनकी आवश्यकता नहीं है, वे इस देश के सीमित संसाधनों पर भार हैं| कई तो बहुत बड़ी बड़ी आयु के तथाकथित विद्यार्थी है जो कैसे भी जोड़-तोड़ बैठाकर छात्रवृति लेकर वहाँ अपनी कुत्सित विचारधारा फैलाते हैं| राष्ट्र के विकास में इनका कोई योगदान नहीं होता|
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बहुत ऊँचे ऊँचे वेतन लेने वाले इनके शिक्षक भी देश पर भार हैं| अमेरिका में कोई भी शिक्षक चाहे वह कितना भी बड़ा प्रोफ़ेसर हो, कितना भी बड़ा विद्वान हो, हर वर्ष वह जब तक कोई नई शोध नहीं करता या कराता है, उसकी छुट्टी कर दी जाती है| विश्व में सिर्फ भारतवर्ष ही एकमात्र ऐसा देश है जहाँ एक बार प्रोफ़ेसर की नौकरी मिल गयी तो जीवन भर ऐशो-आराम करने की गारंटी है| इसका कहीं भी लेखाजोखा नहीं होता कि वे कितने घंटे पढ़ाते हैं, क्या पढ़ाते हैं, और शोध के नाम पर विद्यार्थियों से रुपये लेकर कितना कूड़ा-कर्कट लिखते और लिखवाते हैं| यह उनकी अतिरिक्त कमाई है| भारत में इसकी भी जांच होनी चाहिए कि जो शोधकार्य होते हैं उनमें से कितनों के शोध विश्व स्तर के होते हैं और कितने रद्दी के भाव के होते हैं| शिक्षा संस्थानों में देशद्रोह की भावना फैलाने वाले ऐसे प्रोफ़ेसर भी देशद्रोही हैं जो विद्यार्थियों का ही नहीं देश का भविष्य भी अन्धकार में डालते हैं|
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ऐसे शिक्षण संस्थानों को यदि बंद भी कर दिया जाए तो इसमें कोई बुराई नहीं है|
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प्रश्न : देश के सेकुलर और वामपंथी राजनेता, पत्रकार और इनके नकलची चेले, सिर्फ सनातन हिन्दू धर्म और हिन्दू परम्पराओं का ही विरोध क्यों करते हैं, अन्यों का क्यों नहीं ?
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उत्तर : ये लोग वास्तव में असुर राक्षस हैं जिनका विरोध आध्यात्म, आत्मज्ञान, श्रुतियों, स्मृतियों, आगम ग्रंथों, अहैतुकी भक्ति आदि सनातन वैदिक परम्पराओं से है| इनका विरोध मनुष्य की आत्मा से है| ये सब नर्कगामी हैं अतः इन का समर्थन करना हमें भी नर्कगामी बना देगा| इनका सदा प्रतिकार करना चाहिए|

ॐ ॐ ॐ ||