योगक्षेमं वहाम्यहम् ---
Monday, 24 January 2022
योगक्षेमं वहाम्यहम् ---
वास्तविक मृत्यु तो परमात्मा से विमुखता है ---
शास्त्रों के अनुसार प्रमाद ही मृत्यु है, पर वास्तविक मृत्यु तो परमात्मा से विमुखता हैे। परमात्मा का ध्यान भ्रूमध्य में ज्योतिर्मय ब्रह्म के रूप में अजपा-जप (हंस-योग/ हंसवती-ऋक) के साथ कीजिये। इसकी विधि किसी अच्छे संत-महात्मा से सीख लें।
मुझे सिर्फ तीन बातें कहनी हैं। कोई चौथी बात नहीं है ---
मुझे सिर्फ तीन बातें कहनी हैं। कोई चौथी बात नहीं है।
देवता हमारी सहायता क्यों नहीं करते? ---
क्योंकि उनकी दृष्टि में हम चोर हैं। देवताओं को हमारा कल्याण करने की शक्ति हमारे द्वारा किए हुए यज्ञों आदि से ही प्राप्त होती है। हम उन्हें यज्ञ आदि द्वारा शक्ति देंगे तो वे उचित समय पर वृष्टि आदि से हमारा कल्याण करेंगे। गीता में भगवान कहते हैं --
आध्यात्म में कुछ पाने या प्राप्ति की कामना एक मरीचिका है ----
आध्यात्म में कुछ पाने या प्राप्ति की कामना एक मरीचिका है। जो कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है, वह तो हम "स्वयं" हैं। आध्यात्मिक मार्ग पर मार्ग-दर्शन सब को प्राप्त होता है। कोई यदि यह कहे कि उसे मार्ग-दर्शन नहीं मिला है तो वह झूठ बोल रहा है। भगवान की कृपा सब पर समान रूप से है।
हमारी मौन प्रार्थना निश्चित रूप से कब सुनी जाती है? ---
(प्रश्न) : हमारी मौन प्रार्थना निश्चित रूप से कब सुनी जाती है?
सारी साधनाएँ एक बहाना मात्र है, वैसे ही जैसे किसी बच्चे के हाथ में खिलौना ---
सारी साधनाएँ एक बहाना मात्र है, वैसे ही जैसे किसी बच्चे के हाथ में खिलौना ---