हम परमब्रह्म परमशिव परमात्मा की ब्राह्मी-चेतना, यानि कूटस्थ-चैतन्य में, प्रयासपूर्वक निरंतर बने रहेंगे ---
Wednesday, 25 December 2024
हम परमब्रह्म परमशिव परमात्मा की ब्राह्मी-चेतना, यानि कूटस्थ-चैतन्य में, प्रयासपूर्वक निरंतर बने रहेंगे ---
यं प्राप्य न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम ---
भगवान श्रीगणेश और जगन्माता को नमन करते हुए कुछ लिखने का प्रयास कर रहा हूँ। ध्यान-साधना का एकमात्र उद्देश्य है -- आत्म-साक्षात्कार यानि Self-Realization। एक बार परमात्मा की अनुभूति हो जाये तो साधक को उनसे परमप्रेम हो जाता है, और वह इधर-उधर अन्यत्र कहीं भी नहीं भागता। इस समय मध्यरात्रि है, और परमात्मा की चेतना में जो भी भाव आ रहे हैं, उन्हें ही यहाँ व्यक्त कर रहा हूँ।
यदि जीसस क्राइस्ट हैं तो वर्तमान ईसाई रिलीजन से उनका कोई संबंध नहीं है। वर्तमान ईसाई रिलीजन मात्र एक चर्चवाद है --
हे ईसाई मज़हब के प्रचारको, तुम लोग पूरे विश्व में एक असत्य का अंधकार फैला रहे हो। तुम लोग चाहो तो अपने मत में आस्था रखो, पर हमारे गरीब और लाचार हिंदुओं का धर्मांतरण मत करो। हमारे सनातन धर्म की निंदा और हम पर झूठे दोषारोपण मत करो। तुम लोगों ने भारत में सबसे अधिक अत्याचार और नरसंहार किये हैं। भारत का सबसे अधिक अहित तुम लोगों ने किया है।
काबा के हिन्दू होने के प्रमाण --- (लेखक : Sanjay Tiwari)
अरब की प्राचीन वैदिक संस्कृति : .
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स्वामी विवेकानंद का संकल्प दिवस ---
स्वामी विवेकानंद का संकल्प दिवस ......
ईसा मसीह नाम का कोई व्यक्ति हुआ ही नहीं, यह रोमन राज्य द्वारा गढ़ी हुई कहानी है --- (लेखक : श्री अरुण कुमार उपाध्याय)
क्रिसमस का अर्थ -- इसका ईसा मसीह से कोई सम्बन्ध नहीं है। आज कल कई इसाई लेखक मानते हैं कि इसा मसीह जैसा कोई व्यक्ति नहीं था, यह रोमन राज्य द्वारा गढ़ी हुई कहानी थी। कई बातें भगवान् कृष्ण की कथाओं से नकल की गयी हैं, जैसे हेरोद के शासन में छोटे बच्चों की हत्या। आज कल भारत में जन्माष्टमी की नकल पर ईसा जन्मदिन भी मना रहे हैं। जो ईसा को वास्तविक व्यक्ति मानते हैं, उनके अनुसार ईसा का जन्म ४ ई.पू. से पहले हुआ, किन्तु दिसम्बर नहीं मार्च या अप्रैल में। तुर्की के अंकारा के रोमन पुरालेख के अनुसार बाइबिल वर्णित हेरोद की मृत्यु १ ई. से कम से कम ४ वर्ष पूर्ब हो चुकी थी, जिसने बच्चों को मारने का आदेश दिया था। हेरोद के लिए कंस जैसा कोई कारण नहीं था। पर यदि उस समय ईसा पैदा हुए थे तो वह ४ ई.पू. के पहले हुए थे। ईसवी सन् का प्रचलन प्रायः ५३० ई. से आरम्भ हुआ तथा इसका आरम्भ ५३० वर्ष पूर्व कर दिया जब कुछ लोगों के अनुसार ईसा का जन्म हुआ था। (History of Calendar-Report of Panchanga Committe, part 3-pages 168, 170)।
गीता जयंती --- आज मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को गीता जयंती है ---
अब तक जो हुआ सो हुआ, जन्म-जन्मांतरों के सारे पाप-पुण्य, बुरे-अच्छे सारे कर्म और उन के फल, बुराई-अच्छाई सब कुछ, और बचा-खुचा सारा शेष जीवन -- भगवान के श्रीचरणों में समर्पित है| किसी से कुछ भी नहीं चाहिए| उन की इच्छा ही मेरी इच्छा है| उन के सिवाय अन्य किसी का साथ भी नहीं चाहिए| भगवान की भक्ति -- हमारे और भगवान के मध्य का व्यक्तिगत विषय है| उनके सिवाय अन्य कोई है ही नहीं, मैं भी नहीं| यह "मैं" भी उन्हीं की एक अभिव्यक्ति है|