मणिपुर में वैष्णव सनातन धर्म महाभारत काल के पूर्व से ही है। महाभारत के अर्जुन की दूसरी पत्नी चित्रांगदा मणिपुर की थी।
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मणिपुर की समस्या बड़ी जटिल है। यहाँ कूकी व नागा जाति के अफीम के बड़े बड़े अंतर्राष्ट्रीय तस्कर हैं, जिन्हें ईसाई चर्च और चीन का संरक्षण प्राप्त है। सेना और पुलिस भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाई है। चीन ने उन्हें आधुनिकतम अस्त्र-शस्त्र दे रखे हैं। जब पुलिस या सेना किसी तस्कर को पकड़ती है तो हजारों कूकी व नागा महिलाएँ बिलकुल वस्त्रहीन नंगी होकर पुलिस और सेना को घेर कर मार-पीट शुरू कर देती हैं, और अपने जाति के अपराधियों को छुड़ा लेती हैं। सेना के विशेषाधिकारों को समाप्त करवाने के लिए हजारों नग्न औरतों ने आसाम राइफल्स के मुख्यालय को कई दिनों तक घेर कर रखा। अंततः सेना के विशेषाधिकारों को समाप्त करना पड़ा।
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दूसरा कारण है कि वहाँ कोई आयकर नहीं है। आपके पास चोरी के बीस करोड़ रुपये है, उन्हें आप आराम से बैंक में जमा कराओ। कोई नहीं पूछेगा कि ये रुपये कहाँ से आए हैं। उनको भारत में कहीं पर भी भेज दीजिये, वे एक नंबर के हो जाएँगे। भारत से चोरी के करोड़ों रुपये पूर्वोत्तर के राज्यों में आते हैं। वहाँ के तस्कर बीस प्रतिशत का कमीशन लेकर बाकी को एक नंबर के रूप में आपको भारत भेज देंगे।
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इन चर्च-संरक्षित अफीम के तस्कर अपराधियों को यूरोप की संसदों, वेटिकन व दिल्ली मे कुछ राजनेताओं का आशीर्वाद प्राप्त है। अब तो सारे विपक्ष का संरक्षण उन्हें मिला हुआ है, और उन्होने संसद का सत्र बाधित कर रखा है।
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अब इन चर्च संरक्षित अपराधी नशे के तस्करों का लक्ष्य मणिपुर के हिंदुओं की हत्या कर के मणिपुर को एक ईसाई देश बनाना है। संक्षेप में यही मणिपुर की समस्या है।
२५ जुलाई २०२३
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