किसी भी कालखंड में जब भी हमारा पतन हुआ, उसका मुख्य और एकमात्र कारण हमारे जीवन में तमोगुण की प्रधानता का होना था। हमारी जो भी प्रगति हो रही है, वह तमोगुण का प्रभाव घटने, और रजोगुण में वृद्धि के कारण हो रही है।
Monday, 16 March 2026
किसी भी कालखंड में जब भी हमारा पतन हुआ, उसका मुख्य और एकमात्र कारण हमारे जीवन में तमोगुण की प्रधानता का होना था।
मेरे तो एक ही राजा हैं और वे हैं श्रीराम। एक ही साम्राज्ञी हैं और वे हैं भगवती श्रीसीता।
मेरे तो एक ही राजा हैं और वे हैं श्रीराम। एक ही साम्राज्ञी हैं और वे हैं भगवती श्रीसीता। वे ही मेरे माता-पिता और मेरे अन्य सारे संबंधी हैं। उनके श्रीचरणों में ही मेरी स्थिति, और मेरा वास्तविक सुख व आनंद है। इस समय मेरे लिए अन्य किसी का भी कोई अस्तित्व नहीं है। सारी सृष्टि ही राममय है। मेरी सफलता/विफलता, यश/अपयश, कीर्ति/अपकीर्ति, ज्ञान/अज्ञान, हानि/लाभ, पाप/पुण्य जीवन/मरण और धर्म/अधर्म सब कुछ वे ही हैं।
सम्पूर्ण अस्तित्व ही राम का नाम है। उससे परे कुछ भी नहीं है।
सम्पूर्ण अस्तित्व ही राम का नाम है। उससे परे कुछ भी नहीं है।
योग या तंत्र मार्ग की कोई भी साधना हो, ईश्वर को समर्पित होकर की गई भक्ति में कोई भय नहीं है ---
योग या तंत्र मार्ग की कोई भी साधना हो, ईश्वर को समर्पित होकर की गई भक्ति में कोई भय नहीं है ---
स्वयं भगवान विष्णु ही यह समस्त सृष्टि बन गये हैं, उनकी इस विराट अनंतता का बोध ऊर्ध्व में होता है ---
स्वयं भगवान विष्णु ही यह समस्त सृष्टि बन गये हैं, उनकी इस विराट अनंतता का बोध ऊर्ध्व में होता है। उस अनंतता का ध्यान ऊर्ध्वमूल में करते हुए स्वयं को उन की दिव्य चेतना में ऐसे ही विलीन कर दें, जैसे जल की एक बूंद विराट महासागर में विलीन हो जाती है। भगवान की अनुभूति सच्चिदानंद के रूप में होती है। हम स्वयं वह सत् चित्त आनंद हैं, यह नश्वर देह नहीं।
Sunday, 15 March 2026
वर्तमान परिस्थितियों में सर्वश्रेष्ठ क्या किया जा सकता है ?
आजकल एक विचित्र सी मनःस्थिति हो गई है, कुछ समझ में नहीं आ रहा है। समय, मान्यताएँ और परिस्थितियाँ -- पूरी तरह बदल गई हैं। मेरे पुराने अधिकांश साथी अज्ञात में चले गए हैं। बहुत कम, दो-चार ही बचे हैं। शारीरिक, मानसिक, और बौद्धिक क्षमताएँ भी बहुत अधिक क्षीण हो गई हैं।
Wednesday, 11 March 2026
आप सब जीव से शिव बनें और परमात्मा में आपकी जागृति हो ---
"नास्ति नादात परो मन्त्रो न देव: स्वात्मन: पर: