मेरे तो एक ही राजा हैं और वे हैं श्रीराम। एक ही साम्राज्ञी हैं और वे हैं भगवती श्रीसीता। वे ही मेरे माता-पिता और मेरे अन्य सारे संबंधी हैं। उनके श्रीचरणों में ही मेरी स्थिति, और मेरा वास्तविक सुख व आनंद है। इस समय मेरे लिए अन्य किसी का भी कोई अस्तित्व नहीं है। सारी सृष्टि ही राममय है। मेरी सफलता/विफलता, यश/अपयश, कीर्ति/अपकीर्ति, ज्ञान/अज्ञान, हानि/लाभ, पाप/पुण्य जीवन/मरण और धर्म/अधर्म सब कुछ वे ही हैं।
सीताराम राम राम॥ // कृपा शंकर // १३ मार्च २०२६
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सभी को जय जय श्रीसीताराम !! आपकी कीर्ति और यश अमर रहे।
माता रामो मत्पिता रामचंद्र:
स्वामी रामो मत्सखा रामचंद्र:।
सर्वस्वं मे रामचंद्रो दयालु:
नान्यं जाने नैव जाने न जाने ॥
दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मजा।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥
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