ईरान का विभाजन होना तय है ---
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लगता है हवाई हमले करते करते अमेरिका और इज़राइल थक कर इस निर्णय पर पहुंचे हैं कि बिना स्थल सेना का उपयोग किये युद्ध को नहीं जीता जा सकता। पर स्थल सेना कहाँ से लायेंगे? इज़राइल के पास इतने सैनिक नहीं हैं। अमेरिका अपने देश के जनमत के डर से अपने सैनिकों को मैदान में नहीं उतार सकता। ईरान के पास लगभग सात लाख स्थल सैनिक हैं।
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ईरान, इराक, सीरिया, और तुर्की में बहुत बड़ी संख्या में कुर्द जाति के लोग रहते हैं। अंग्रेजों ने जब सल्तनत-ए-उस्मानिया का विखंडन कर के अनेक स्वतंत्र देशों (लगभग ३०) का निर्माण किया तब कुर्दों के साथ विश्वासघात कर के उनके लिए कोई पृथक देश नहीं बनाया, जब कि कुर्दों ने अंग्रेजों का पूरा साथ दिया था। कुर्दों का कोई पृथक देश नहीं है। वे स्वयं के लिए एक पृथक देश चाहते हैं। उनके लिए एक पृथक देश का वादा कर के अमेरिका -- कुर्दों की एक स्थल सेना बना सकता है। अफगानिस्तान में बहुत अधिक गरीबी है। तालिबानियों को पैसा देकर उन्हें भी ईरान के विरुद्ध लड़ाया जा सकता है।
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इतनी बमबारी करके भी अमेरिका और इज़राइल—ईरान को नहीं हरा सके। अब लगता है स्थिति बदलने वाली है।
कृपा शंकर
१२ मार्च २०२६
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