जहां तक आध्यात्मिक साधनाओं का प्रश्न है, मुझे किसी भी तरह का कोई संशय नहीं है। जितनी मेरी यह सीमित और अल्प बुद्धि समझ सकती है, वहाँ तक पूरी संतुष्टि है। कुंडलिनी महाशक्ति का परमशिव से मिलन ही योग-साधना है। परमशिव और कुंडलिनी दोनों की ही पर्याप्त निजानुभूतियाँ हैं, किसी भी तरह का कोई संशय नहीं है। परमात्मा से पूरा मार्गदर्शन प्राप्त हैं। अतः इस विषय पर किसी भी तरह की चर्चाओं का समापन कर रहा हूँ। फेसबुक पर ईश्वर प्रेरणा से आध्यात्मिक विषयों पर साढ़े चार हजार (4500) से अधिक पोस्ट यानि लेख लिख चुका हूँ। अब और लिखने की आवश्यकता नहीं है। जब तक इस शरीर में प्राण-प्रवाह है तब तक चेतना परमशिव में ही रहेगी। जो परमशिव हैं, वे ही गीता के पुरुषोत्तम हैं, और वे ही वेदान्त के ब्रह्म है। मेरा संपर्क बहुत ही सीमित साधकों से रहेगा। आप सब में परमात्मा को नमन।
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