मुझे आदेश प्राप्त हुआ है कि मैं निम्न तीन विषयों पर सत्संग करूँ। आप इसे निज बुद्धि और विवेक के प्रकाश में समझ्न सकते हैं। मंत्रों के अर्थ और व्याख्या नहीं लिख रहा हूँ, अन्यथा लेख बहुत अधिक लंबा हो जाता, जिसे कोई नहीं पढ़ता। अतः मंत्रों के अर्थ और भाष्यों का अनुसंधान आप स्वयं करें।
Friday, 23 January 2026
- (१) भगवान के मोक्षदायी शाश्वत वचन। (२) भगवान का ध्यान किस रूप में करना चाहिये। (३) भगवान का नाम क्या है?
भ्रूमध्य में गहन ध्यान -- त्रिवेणी संगम में स्नान है। हमारी चेतना जहां है, वहीं परमात्मा हैं, वहीं सारे तीर्थ हैं, और सारे संत-महात्मा वहीं हैं।
भ्रूमध्य में गहन ध्यान -- त्रिवेणी संगम में स्नान है। हमारी चेतना जहां है, वहीं परमात्मा हैं, वहीं सारे तीर्थ हैं, और सारे संत-महात्मा वहीं हैं।
क्या यह देश केवल आरक्षित वर्ग का ही है ?
क्या यह देश केवल आरक्षित वर्ग का ही है? क्या अनारक्षित वर्ग को आत्म-सम्मान से जीने का अधिकार नहीं है? क्या भारत में कभी समान-नागरिक-संहिता लागू होगी?
परमात्मा की सर्वश्रेष्ठ व सर्वोच्च अनुभूति ऊर्ध्वमूल कूटस्थ सूर्यमण्डल में परमशिव पुरुषोत्तम के ध्यान में होती है ---
शिवकृपा यानि हरिःकृपा कैसे प्राप्त हो ?
शिवकृपा यानि हरिःकृपा कैसे प्राप्त हो ?
हमारा समर्पण सिर्फ और सिर्फ ईश्वर की अनंत असीम समग्रता के प्रति है, न कि उनकी किसी अभिव्यक्ति पर ---
हमारा समर्पण सिर्फ और सिर्फ ईश्वर की अनंत असीम समग्रता के प्रति है, न कि उनकी किसी अभिव्यक्ति पर ---
परमात्मा के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है हमारा लोभ और अहंकार ---
आध्यात्मिक क्षेत्र में मैं बहुत अधिक देरी से आया, इसलिए स्वयं के व्यक्तित्व में बहुत अधिक गंभीर कमियाँ रह गयीं। वे सब कमियाँ मैं परमात्मा को ही बापस समर्पित कर रहा हूँ, क्योंकि उन्हें दूर करने का सामर्थ्य मुझ में नहीं है। आध्यात्म में पाने को कुछ भी नहीं है, केवल शरणागति द्वारा आत्म-समर्पण में ही सार है। आगे के सारे द्वार इस से खुल जाते हैं, कहीं कोई अंधकार नहीं रहता।