Saturday, 7 December 2019

दीपावली की मंगलमय शुभ कामनायें और अभिनंदन !

दीपावली की मंगलमय शुभ कामनायें और अभिनंदन !
साधना की दृष्टी से चार रात्रियाँ बड़ी महत्वपूर्ण होती हैं ..... (१) कालरात्रि (दीपावली), (२) महारात्रि (शिवरात्रि), (३) दारुण रात्रि (होली), और (४) मोहरात्रि (कृष्ण जन्माष्टमी)|
कालरात्रि (दीपावली) का आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है| इस रात्री को आध्यात्मिक साधना व भक्ति में ही बितानी चाहिए| दीपावली की रात्री को व्यर्थ की गपशप, इधर-उधर घूमने, पटाखे फोड़ने, जूआ खेलने, शराब पीने, अदि में समय नष्ट नहीं करें|
सभी को अपनी अपनी गुरु परम्परानुसार जप तप व साधना अवश्य करनी चाहिए|

साधना के क्रम ----

साधना के क्रम ----
.
किसी भी विद्यालय में जैसे कक्षाओं के क्रम होते हैं ..... पहली दूसरी तीसरी चौथी पांचवीं आदि कक्षाएँ होती है, वैसे ही साधना में भी क्रम होते हैं| जो चौथी में पढ़ाया जाता वह पाँचवीं में नहीं| एक चौथी कक्षा का बालक अभियांत्रिकी गणित के प्रश्न हल नहीं कर सकता| वैसे ही आध्यात्म में है| किसी भी जिज्ञासु के लिए आरम्भ में भगवान की साकार भक्ति ही सर्वश्रेष्ठ है| उसके पश्चात ही क्रमशः स्तुति, जप, स्वाध्याय, ध्यान आदि के क्रम आते हैं| वेदों-उपनिषदों को समझने की पात्रता आते आते तो कई जन्म बीत जाते हैं| एक जन्म में वेदों का ज्ञान नहीं मिलता, उसके लिए कई जन्मों की साधना चाहिए| दर्शन और आगम शास्त्रों को समझना भी इतना आसान नहीं है| सबसे सरल तो यह है कि भगवान की भक्ति करें और भगवान जो भी ज्ञान करा दें उसे ही स्वीकार कर लें, भगवान के अतिरिक्त अन्य कोई कामना हृदय में न रखें|
.
आरम्भ में भगवान के अपने इष्ट स्वरुप की साकार भक्ति ही सबसे सरल और सुलभ है| किसी भी तरह का दिखावा और प्रचार न करें| घर के किसी एकांत कोने को ही अपना साधना स्थल बना लें| उसे अन्य काम के लिए प्रयोग न करें, व साफ़-सुथरा और पवित्र रखें| जब भी समय मिले वहीं बैठ कर अपनी पूजा-पाठ, जप आदि करें| ह्रदय में प्रेम और तड़प होगी तो भगवान आगे का मार्ग भी दिखाएँगे| जो हमें भगवान से विमुख करे, ऐसे लोगों का साथ विष की तरह छोड़ दें| भगवान से प्रेम ही सर्वश्रेष्ठ है| उन्हें अपने ह्रदय का पूर्ण प्रेम दें| भक्ति का सबसे सरल साधन है .... भगवान श्रीराम या हनुमान जी के विग्रह को ह्रदय में स्थापित कर के मानसिक रूप से निरंतर तारक मंत्र "राम" नाम को जपते रहें| इससे सरल और सुलभ साधन दूसरा कोई नहीं है| आगे का सारा मार्ग भगवान स्वयं दिखायेंगे| भगवान की असीम कृपा है कि उन्होंने "राम" नाम हमें निःशुल्क व सर्वसुलभ दिया है| इसका आश्रय लेकर पता नहीं कितने तर गए व कितने तरेंगे.
शुभ कामनाएँ|

ॐ तत्सत् ! ॐ ॐ ॐ !!
२७ अक्तूबर २०१९

साधना कक्ष और साधना का समय :---

साधना कक्ष और साधना का समय :---
आजकल के जटिल समय में साधना के कक्ष की व्यवस्था और साधना के समय को निर्धारित करना अति कठिन है| यदि हो जाये तो अति उत्तम है, अन्यथा भी अपना साधन न छोड़ें| जब भी जहाँ भी समय मिले भगवान को अपना प्रेम प्रेषित करते रहें| हर समय उनकी स्मृति बनाए रखें|
यदि हो सके तो घर के एक कोने में जहाँ कोई व्यवधान न हो, एक ऐसा स्थान आरक्षित कर लें जिसे हम अपना स्वयं का कह सकें| उस स्थान का उपयोग सिर्फ उपासना के लिए करें जहाँ बैठकर हम नित्य नियमित भगवान का ध्यान कर सकें| एक नियमित समय भी तय कर लें जो हमारा अपना हो, जिसमें हम सिर्फ भगवान के साथ रह सकें| अपनी उपासना को कभी न भूलें| बार बार स्वयं को याद दिलाते रहें कि हमारा सर्वोपरी लक्ष्य ईश्वर की प्राप्ति है|
ॐ तत्सत ! ॐ ॐ ॐ !!
२६ अक्तूबर २०१९

रूप चतुर्दशी/ नर्क चतुर्दशी/ छोटी दीपावली की मंगलमय शुभ कामनाएँ ......

रूप चतुर्दशी/ नर्क चतुर्दशी/ छोटी दीपावली की मंगलमय शुभ कामनाएँ ......
.
आज के दिन छोटी दीपावली है जिसे "रूप-चतुर्दशी" और "नर्क चतुर्दशी" भी कहते हैं| आज के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर उबटन लगा कर स्नान करने का विधान है| स्नान करते समय स्नानघर में एक दीपक भी जलाया जाना चाहिए| कहीं कहीं उबटन के स्थान पर तिल के तेल की मालिश और पानी में चिरचिरी के पत्ते डालकर नहाते हैं| कुछ वर्षों पूर्व तक उबटन लगाते समय गड़तुंबा का फल भी पास में रखते थे| गड़तुंबा अत्यधिक कड़वा होता है और सारी नकारात्मक ऊर्जा को अपने भीतर ले लेता है| आजकल तो गड़तुंबा कहीं दिखाई ही नहीं देता| स्नान के पश्चात भगवान श्रीकृष्ण की उपासना की जाती है| ऐसा करने से पापों का नाश होता है और रूप व सौंदर्य की प्राप्ति होती है| इसलिए इसे रूप चौदस भी कहते हैं| महिलाएँ इस दिन सौलह शृंगार करती हैं|
.
आज के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ मिलकर नरकासुर नामक राक्षस का बध किया था| नरकासुर को किसी स्त्री के हाथों ही मरने का वरदान प्राप्त था| युद्ध करते करते भगवान श्रीकृष्ण मूर्छित हो गए थे तब सत्यभामा ने उस राक्षस से भयानक युद्ध आरंभ किया और अपने बाणों से उसका बध कर दिया| नरकासुर ने सौलह हजार स्त्रियों को अपना बंदी बना रखा था| वे स्वतंत्र हुईं| अतः इस दिन को नर्क चतुर्दशी भी कहते हैं| प्रातः स्नान कर इसीलिए भगवान श्रीकृष्ण की उपासना की जाती है|
.
पुनश्च: रूप चतुर्दशी/ नर्क चतुर्दशी/ छोटी दीपावली की मंगलमय शुभ कामनाएँ| भगवान श्रीकृष्ण सभी का कल्याण करें|
ॐ तत्सत् ! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
२६ अक्तूबर २०१९

ओंकार के रूप में सारी सृष्टि राम नाम का जप कर रही है.....

ओंकार के रूप में सारी सृष्टि राम नाम का जप कर रही है| हम उस ध्वनि को सुनें| सृष्टि निरंतर गतिशील है| कहीं भी जड़ता नहीं है| जड़ता का आभास माया का आवरण है| यह भौतिक विश्व जिन अणुओं से बना है उनका निरंतर विखंडन और नवसृजन हो रहा है| सारी आकाश गंगाएँ, सारे नक्षत्र अपने ग्रहों और उपग्रहों के साथ अत्यधिक तीब्र गति से परिक्रमा कर रहे हैं| उस गति की, उस प्रवाह की एक ध्वनी हो रही है जिसकी आवृति हमारे कानों की सीमा से परे है| वह ध्वनी ही ओंकार रूप में परम सत्य 'राम' का नाम है| उसे सुनना और उसमें लीन हो जाना ही उच्चतम साधना है| समाधिस्थ योगी जिसकी ध्वनी और प्रकाश में लीन हैं, और सारे भक्त साधक जिस की साधना कर रहे हैं, वह 'राम' का नाम ही है जिसे सुनने वालों का मन उसी में रम जाता है| राम राम राम|
कृपा शंकर
२६ अक्तूबर २०१९

सनातन हिन्दू धर्म के बारे में दो शब्द .....

सनातन हिन्दू धर्म के बारे में दो शब्द .....
.
जैसा मुझ अकिंचन को अपनी सीमित अल्प बुद्धि से समझ में आया है सनातन हिन्दू धर्म है ..... "परमात्मा के प्रति परम प्रेम, समर्पण और उपासना|"
धर्म ने हमें धारण किया हुआ है, धर्म के कारण ही हम बचे हुये हैं, और धर्म ही हमारी रक्षा कर रहा है| सनातन वह है जो अनादि काल से चला आ रहा है यानि नित्य है| धर्म वह है जो धारणीय है, जिससे हमारा सम्पूर्ण विकास हो व सब तरह के दुःखों व कष्टों से मुक्ति हो| हम धर्म की रक्षा करेंगे तभी धर्म हमारी रक्षा करेगा| धर्म का पालन ही धर्म की रक्षा है|
.
अत्यधिक भयावह क्रूरतम मर्मान्तक प्रहारों के पश्चात भी सनातन धर्म कालजयी और अमर है| धर्म का अर्थ कर्मकांड नहीं है| कर्मकांड तो मात्र एक व्यवस्था है जिसमें समय समय पर परिवर्तन होते रहे हैं, यह धर्म का मूल बिंदु नहीं है| जब तक हिन्दुओं में दस लोग भी ऐसे हैं जो परमात्मा से जुड़े हुए हैं तब तक भारत व सनातन हिन्दू धर्म का नाश नहीं हो सकता| सनातन धर्म समाप्त हुआ तो यह सृष्टि ही समाप्त हो जाएगी|
.
सनातन धर्म ही भारत की अस्मिता है| भारत का उद्धार और विस्तार भी ऐसे महापुरुष ही करेंगे जो भगवान को पूर्णरूपेण समर्पित हैं| भगवान हमारी माता भी हैं और पिता भी| वे जब हैं तो भय कैसा? वे तो सब प्रकार के भयों से वे हमारी रक्षा करते हैं| भारत का सबसे बड़ा अहित किया है अधर्मसापेक्ष यानि धर्मनिरपेक्ष अधर्मी सेकुलरवाद, मार्क्सवाद और मैकाले की शिक्षा व्यवस्था ने| विडम्बना है कि आधुनिक भारत के अनेक साहित्यकारों ने धर्मनिरपेक्षता (अधर्मसापेक्षता) और मार्क्सवाद को बढ़ावा दिया है जिसका दुष्प्रभाव समाज पर पड़ा है, जिसके कारण समाज में धर्म का ह्रास और ग्लानि भी हुई है| समाज में चरित्रहीनता अधर्मसापेक्षता (धर्मनिरपेक्षता) के कारण ही है|
.
हमारे आदर्श भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण हैं, जिन पर हमें गर्व है| वे ही हमारे जीवन के केंद्रबिंदु हैं| हम सब के जीवन में सनातन धर्म की पूर्ण अभिव्यक्ति हो| ॐ तत्सत | ॐ नमः शिवाय ! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
२६ अक्तूबर २०१९

हमारे चारों ओर छाया असत्य और अंधकार दूर हो....

हमारे चारों ओर छाया असत्य और अंधकार दूर हो. दीपोत्सव की शुभ कामनाएँ .....
.
भारतवर्ष में धर्म और संस्कृति के ह्रास और पतन से मैं बहुत अधिक व्यथित हूँ| मेरी भावनाएँ बहुत अधिक आहत हैं| अपने विचारों को ही यहाँ व्यक्त कर रहा हूँ|
.
ज्योतिर्मय परम ब्रह्म से प्रार्थना है कि हमारे राष्ट्र भारतवर्ष से और हमारे निज जीवन से सब तरह का असत्य रूपी अंधकार दूर हो| हम सब का निज जीवन भगवान भुवनभास्कर की तरह परम ज्योतिर्मय हो| जीवन में शुभ ही शुभ और मंगल ही मंगल हो|
.
श्रुति भगवती का यह कथन हमारे जीवन में चरितार्थ हो .....
"न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं नेमा विद्युतो भान्ति कुतोऽयमग्निः|
तमेव भान्तमनुभाति सर्वं तस्य भासा सर्वमिदं विभाति ||"
.
भगवान वासुदेव हमारे निज जीवन में व्यक्त हों .....
"यदादित्यगतं तेजो जगद्भासयतेऽखिलम्| यच्चन्द्रमसि यच्चाग्नौ तत्तेजो विद्धि मामकम्||"
.
हमारा संकल्प हो ..... अश्मा भवतु नस्तनू: ....
हमारे शरीर फौलादी, हमारे संकल्प आत्मविजेता व हर क्षेत्र में विश्व विजेता बनने के हों|
.
पिता का पुत्र को उपदेश हो ... "अश्मा भव, परशुर्भव, हिरण्यमस्तृतं भव ||"
हे पुत्र ! तूँ चट्टान की तरह दृढ़ हो| महासागर की विकराल लहरें चट्टान पर प्रचंड आघात करती हैं, पर चट्टान जैसे विचलित नहीं होती, वैसे हे तूँ कभी विचलित मत होना|
तूँ परशु की तरह तीक्ष्ण हो| कोई तुम्हारे पर आघात करे तो वह तुम्हारी तीक्ष्णता से स्वयं कट जाये, और तुम जिस पर आघात करो उसका भी अस्तित्व न रहे|
तुम्हारे में स्वर्ण की सी पवित्रता हो| किसी भी तरह का कोई विकार तुम्हारे में न हो|

मेरे पुत्र ! तूँ शरीर नहीं आत्मा है| आत्मा का ही पर्याय राम है| तूँ परशुराम हो|
.
हम जीव नहीं, परमशिव हैं| शिव में ही पूर्णता है| हमारा शिवत्व निरंतर व्यक्त हो|
ॐ तत्सत् ! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
२५ अक्तूबर २०१९