Saturday, 29 October 2016

सनातन हिन्दू धर्म की विशेषता ....

सनातन हिन्दू धर्म की विशेषता ----
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इस विषय पर अनेक पुस्तकें लिखी जा चुकी है| पर मैं यहाँ दो पंक्तियों में ही सनातन हिन्दू धर्म की विशेषता बता रहा हूँ|
परमात्मा से अहैतुकी परम प्रेम, परमात्मा को पाने की अभीप्सा और तड़प, परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण व त्याग, सर्वस्व के कल्याण की कामना व प्रार्थना, गुरु-शिष्य परम्परा, स्वरुची अनुसार परमात्मा के विभिन्न रूपों की उपासना , उदारता और सहनशीलता -------------- ये सब सनातन हिन्दू धर्म में ही है, अन्यत्र कहीं भी नहीं|
भारत हिन्दू राष्ट्र है और रहेगा| अन्धकार और असत्य अनेक बार फैला है पर सदा उसका अंत ही हुआ है| सनातन हिन्दू धर्म का सूर्य विश्व के समस्त अन्धकार और अज्ञानता को दूर करेगा|
वह देश जहाँ महाराजा पृथु जैसे सम्राट हुए जिन्होंने पूरी पृथ्वी पर राज्य किया, जिनके कारण इस ग्रह का नाम ही पृथ्वी पड़ा; जिस देश में भगवान श्री राम और भगवान श्री कृष्ण जैसे अवतार हुए, जहाँ याज्ञवल्क्य, अगस्त्य, वशिष्ठ और विश्वामित्र जैसे अनगिनत ऋषि हुए, दिलीप जैसे गौ रक्षक महाराजा, महाराज शिवी जैसे न्यायी राजा, भगवन सनत्कुमार जैसे ब्रह्मज्ञ, नारद, ध्रुव, प्रहलाद और हनुमानजी जैसे भक्त हुए, जहाँ वेद, वेदांगों, पुराणों, षड्दर्शनों, रामायण, महाभारत जैसे ग्रंथों की रचनाएँ हुईं, जहाँ भीष्म जैसे दृढ़व्रती महारथी और अर्जुन जैसे अनगिनत वीरों ने जन्म लिया, वह भूमि सदा सदा के लिए असत्य के अन्धकार में नहीं रह सकती|
एक प्रचंड आध्यात्मिक शक्ति का उदय हो रहा है जो पुनश्चः एक विराट ब्रह्मतेज और क्षात्रत्व
को जन्म देगी| भारत माँ अपने परम वैभव के साथ पुनश्च अखण्डता के सिंहासन पर आसीन होंगी|
घर घर में वेदों के स्वर गूंजेंगे, यहाँ जन्म लेने वाली प्रत्येक आत्मा महान होगी| ईश्वर की अब यही इच्छा है अतः इसे अब कोई नहीं रोक सकता| यह अन्धकार अधिक समय तक नहीं रहेगा| आप चाहो या ना चाहो इस सत्य के आप साक्षी ही नहीं भागीदार भी बनोगे|
जय जननी, जय भारत, जय सनातन हिन्दू धर्म !!! ॐ तत्सत्|

दीपावली की शुभ कामनाएँ .....

दीपावली की शुभ कामनाएँ .....
हम सब का अज्ञान नष्ट हो| हमारे धन में निरंतर वृद्धि हो| मेरा एकमात्र धन तो ब्रह्म चिंतन और स्वाध्याय है| अन्य किसी धन की कामना नहीं है|
ज्योतिषांज्योति कूटस्थ ज्योति निरंतर प्रज्ज्वलित रहे|
ॐ तत्सत् ! ॐ नमः शिवाय ! ॐ ॐ ॐ !!

ध्यान किसका करें ?

***** ध्यान किसका करें ? *****
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ध्यान उसी का करना चाहिए जिसका न तो कभी जन्म हुआ है और न कभी मृत्यु होगी| वह कौन और क्या है जिसने न तो कभी जन्म लिया है, और न कभी मृत्यु को प्राप्त होगा? .....
जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु तो अवश्य ही होगी|
पर जिसने कभी जन्म ही नहीं लिया, क्या वह मृत्यु को प्राप्त कर सकता है?
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हमारा अजन्मा स्वरुप क्या है जो कभी जन्म ही नहीं लेता?
जो अनादि और अनंत है, जिसने कभी जन्म ही नहीं लिया, हमारा वह अजन्मा स्वरुप, शुद्ध अजन्मा भाव क्या है?
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वह शिव भाव है|
सर्वव्यापी भगवान परम शिव में परम प्रेममय हो कर पूर्ण समर्पण करना ही उच्चतम साधना है|
वही मुक्ति है, और वही लक्ष्य है|
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अपने विचारों के प्रति सतत् सचेत रहिये| जैसा हम सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं|
हमारे विचार ही हमारे "कर्म" हैं, जिनका फल भोगना ही पड़ता है|
मन की हर इच्छा, हर कामना एक कर्म या क्रिया है जिसकी प्रतिक्रया अवश्य होती है| यही कर्मफल का नियम है|
अतः हम स्वयं को मुक्त करें ..... सब कामनाओं से, सब संकल्पों से, सब विचारों से, और निरंतर शिव भाव में रहें|
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परमात्मा से अहैतुकी परम प्रेम, परमात्मा को पाने की अभीप्सा और तड़प, परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण व त्याग, समष्टि के कल्याण की कामना व प्रार्थना, और कुछ भी नहीं|
ॐ तत्सत् ! ॐ शिव ! ॐ ॐ ॐ !!

ओमकार का जप ....

ॐ ॐ ॐ || ॐ ॐ ॐ || ॐ ॐ ॐ || ॐ ॐ ॐ ||
ॐकार का मानसिक जाप ऐसे करो जैसे आप किसी झरने के मध्य में हो| निरंतर आ रही सबसे तेज ध्वनि को सुनते रहो और ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ का मानसिक जाप करते रहो| वह ध्वनि तेल धारा के सामान अविछिन्न हो|
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भूल जाओ की आप यह देह हो| आप सर्वव्यापी आत्मा हो| सारी अनंतता और पूर्णता आप स्वयं ही हो| अपने अस्तित्व का लय उस ध्वनी में ही कर दो|
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जिस तरह से झरने का जल ऊपर से नीचे निरंतर प्रवाहित हो रहा है वैसे ही आशुतोष भगवान परमशिव दक्षिणामूर्ति की कृपा आप के सहस्त्रार चक्र पर पूरे ब्रह्मांड से एकत्र होकर बरस रही है|
ॐ नमः शिवाय |
ॐ ॐ ॐ ||

33 कोटि देवी देवता ......

33 कोटि देवी देवता ......
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यह एक गलतफहमी है कि 33 करोड़ देवी देवता हैं| देवता 33 कोटि यानि 33 प्रकार के हैं|
12 आदित्य है, 8 वसु हैं, 11 रूद्र हैं, 2 अश्विनी कुमार हैं.....
कुल................12 +8 +11 +2 =33.

नरकासुर-चतुर्दशी की शुभ कामनाएँ ......

(1) नरकासुर-चतुर्दशी की शुभ कामनाएँ ......
कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर चतुर्दशी कहते हैं| प्रागज्योतिषपुर नगर का राजा नरकासुर नाम का एक अति दुर्दांत अत्याचारी दैत्य था| वह संतों को त्रास देने लगा और महिलाओं पर अत्याचार करने लगा| उसने सौलह हजार एक सौ स्त्रियों को बन्दी बना लिया| जब उसका अत्याचार बहुत अधिक बढ़ गया तब देवता व ऋषि-मुनि भगवान श्रीकृष्ण की शरण में गए| भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें नरकासुर से मुक्ति दिलाने का आश्वसान दिया|
नरकासुर को स्त्री के हाथों ही पराजित होना लिखा था| अतः भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा को अपना सारथी बनाया और युद्ध के लिए प्रस्थान किया|
नरकासुर के साथ हुए युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण कछ क्षणों के लिए अपनी माया से मूर्छित हुए तो सत्यभामा ने नरकासुर के साथ युद्ध किया और अपने अस्त्रों के प्रहार से उसे पराजित कर दिया| भगवान श्रीकृष्ण ने तब उसका वध कर के सौलह हज़ार एक सौ स्त्रियों को उसकी क़ैद से मुक्त किया, और प्रजा को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई|
उस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी थी| प्रजा ने अपने घरों में दीपक जलाए| अतः इसे छोटी दीपावली भी कहते हैं|
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(2) रूप चतुर्दशी की शुभ कामनाएँ .....
कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को रूप चतुर्दशी भी कहते हैं| इस दिन सौन्दर्य रूप भगवान श्रीकृष्ण की पूजा होती है, और व्रत भी रखा जाता है|
प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व दीपक जलाकर, उबटन आदि लगाकर स्नान किया जाता है| इस दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करना अनिवार्य है| इससे देह और चैतन्य में सौंदर्य आता है|
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(3) हनुमत्जयन्ती की शुभ कामनाएँ .....
विभिन्न मतों के अनुसार देश में हनुमान जयंती वर्ष में दो बार मनाई जाती है| पहली चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को व दूसरी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को| बाल्मीकि रामायण के अनुसार हनुमान जी का जन्म कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हुआ है| इस दिन हनुमान जी के भक्त हनुमान जी का षोडशोपचार पूजन करते हैं|
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पुनश्चः आप सब को शुभ कामनाएँ और अभिनन्दन |
ॐ नमःशिवाय ! ॐ ॐ ॐ !!

धन तेरस .....

धन तेरस ..... (कृपया अन्यथा न लें, मेरे इस लेख का कोई बुरा न माने) ....
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आज कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है| भारत सरकार इस दिन को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाएगी| धन्वन्तरि देवताओं के चिकित्सक हैं और चिकित्सा के देवता माने जाते हैं इसलिए चिकित्सकों के लिए धनतेरस का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होता है| इसका लौकिक धन-संपत्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है|
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धनतेरस के संदर्भ में एक लोक कथा प्रचलित है कि एक बार यमराज से एक यमदूत ने पूछा कि अकाल-मृत्यु से बचने का कोई उपाय है क्या? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए यम देवता ने कहा कि जो प्राणी धनतेरस की शाम यम के नाम पर दक्षिण दिशा में दीया जलाकर रखता है उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है| इस मान्यता के अनुसार धनतेरस की शाम लोग आँगण मे यम देवता के नाम पर दीप जलाकर रखते हैं|
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धन्वन्तरी जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था| भगवान धन्वन्तरि चूंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है| कहीं कहीं लोकमान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि इस दिन धन (वस्तु) खरीदने से उसमें तेरह गुणा वृद्धि होती है|
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सबसे बड़ा धन अच्छा स्वास्थ्य है| धनतेरस के दिन दीप जला कर भगवान से अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें| बेकार में प्रचलित रीति-रिवाजों के अनुसार सोना-चांदी आदि खरीदने के लिए न दौड़ें, और अपने बड़े परिश्रम से कमाए धन को नष्ट न करें| अपने स्वास्थ्य की रक्षा करें| धन्यवाद !
धन तेरस की शुभ कामनाएँ|
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ॐ तत्सत् | ॐ नमः शिवाय | ॐ ॐ ॐ !!