Wednesday, 29 July 2026

एकमात्र कर्ता भगवान स्वयं हैं।

 साधना में कर्ताभाव कभी भी नहीं आना चाहिए ---

एकमात्र कर्ता भगवान स्वयं हैं। हम तो एक साक्षी निमित्त मात्र हैं। अपनी साधना वे स्वयं कर रहे हैं। हमारे माध्यम से साँसें भी वे ही ले रहे हैं। हमारी हर गतिविधि के पीछे वे स्वयं हैं। हर समय उनका स्मरण रहे। गीता में भगवान कहते हैं --
"तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च।
मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम्॥८:७॥"
अर्थात् - इसलिए, तुम सब काल में मेरा निरन्तर स्मरण करो; और युद्ध करो मुझमें अर्पण किये मन, बुद्धि से युक्त हुए निःसन्देह तुम मुझे ही प्राप्त होओगे॥
ॐ तत्सत् !!
२९ सितंबर २०२३

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