आने वाली हरियाली तीज की समस्त श्रद्धालु हिन्दू मातृशक्ति को मंगलमय शुभ कामनाएँ और अभिनंदन ---
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श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया, तदानुसार रविवार ३१ जुलाई २०२२ को हरियाली तीज का पर्व है जो पूरे राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में, और पूरे भारत में आप्रवासी राजस्थानी महिलाओं द्वारा बहुत श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है। कल द्वितीया यानि ३० जुलाई २०२२ के दिन सिंजारा है। इन पर्वों पर भारत की समस्त मातृशक्ति को हार्दिक अभिनन्दन और शुभ कामनाएँ।
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सभी माताएँ, बहिनें और बेटियाँ मेंहदी अवश्य मंडवाएँ। यदि घर के आसपास सुविधा हो तो झूला भी खूब झूलें। किसी नीम के पेड़ की मोटी डाल पर मोटी मजबूत रस्सी से झूला बंधवायें, और झूले पर बैठने के लिए खाती (बढ़ई) से लकड़ी का एक पाटा बनवा लें। उस पर बैठकर या खड़े होकर अकेले या जोड़े से खूब झूला झूलें -- इसे मारवाड़ी भाषा में पील मचकाना बोलते हैं। घर पर महिलाएं ही मिलकर सामूहिक नृत्य भी खूब करें। नवविवाहित महिलाएँ अपने मायके जाकर यह त्योहार मनाएँ।
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जिन लड़कियों की सगाई हो जाती है, उन्हें अपने होने वाले सास-ससुर से दूज के दिन सिंजारा मिलता है। इसमें मेहँदी, लाख की चूड़ियाँ, कपड़े (लहरिया), मिठाई - विशेषकर घेवर शामिल होता है।
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विवाहित महिलाओं को भी अपने पति, रिश्तेदारों एवं सास-ससुर से उपहार मिलते हैं। पुरुषों को चाहिए कि वे घर की महिलाओं को उनकी मनपसंद मिठाई आदि अवश्य खिलाएँ।
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महिलाओं के मुँह से सामूहिक मंगल गीत बहुत मधुर लगते हैं। राजस्थान में तीज के त्यौहार का विशेष महत्व है। जयपुर में तो यह त्यौहार बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है व राजस्थान के सभी नगरों में तीज की सवारी निकाली जाती है। हर स्थान पर एक सांस्कृतिक वातावरण हो जाता है। अपनी संस्कृति और गौरव को ना भूलें।
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मान्यता है कि भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने बहुत कठोर तप किया था। जब भगवान शिव ने देवी पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया, तभी से इस व्रत का आरंभ हुआ। तीज माता के रूप में पार्वती की आराधना होती है।
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जय सनातन भारतीय संस्कृति, जय सनातन धर्म, जय माँ भारती॥
कृपा शंकर
२९ जुलाई २०२२
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