Tuesday, 27 November 2018

आध्यात्मिक साधनाओं का आरम्भ .....

आध्यात्मिक साधनाओं का आरम्भ .....
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हे विश्व के अमृत पुत्रो, श्रुति भगवती हमें "शृण्वन्तु विश्वे अमृतस्य पुत्राः" कह कर संबोधित करती है| हम सब परमात्मा के अमृतपुत्र हैं|
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सारी आध्यात्मिक साधनाओं का आरम्भ कृष्ण यजुर्वेद से होता है| तत्पश्चात तो उसका सिर्फ विस्तार ही विस्तार है| कृष्ण यजुर्वेद के श्वेताश्वतरोपनिषद में सनातन हिन्दू धर्म का सारा साधना पक्ष और ज्ञानयोग दिया हुआ है| इस उपनिषद् के छओं अध्यायों में जगत के मूल कारण, ॐकार-साधना, परमात्म-तत्व से साक्षात्कार, ध्यानयोग, प्राणायाम, जगत की उत्पत्ति, जगत के संचालन और विलय का कारण, विद्या-अविद्या, जीव की नाना योनियों से मुक्ति के उपाय, और परमात्मा की सर्वव्यापकता का वर्णन किया गया है| सारी आध्यात्मिक साधनाएँ यहीं से आरम्भ होती हैं| यह उपनिषद् अपने दूसरे अध्याय में हम सब को अमृत पुत्र कहता है| हम सब परमात्मा के अमृतपुत्र हैं|
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स्वयं को पापी कहना सबसे बड़ा पाप है| जो भी शिक्षा हमें जन्म से पापी होना सिखाती है वह वेदविरुद्ध होने के कारण विष के समान त्याज्य है| सिर्फ वेद ही प्रमाण हैं| कोई भी पौराणिक या आगम शास्त्रों की शिक्षा भी यदि वेदविरुद्ध है तो वह त्याज्य है| कुछ मंदिरों में आरती के बाद " पापोऽहं पापकर्माऽहं पापात्मा पापसंभवः" जैसा अभद्र मंत्रपाठ करते हैं, मैं उस पर ध्यान नहीं देता क्योंकि मेरी दृष्टी में यह मन्त्र वेदविरुद्ध है|
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ईसाईयत यानि ईसाई पंथ का मुख्य आधार मूल-पाप यानि Original Sin का सिद्धांत है अतः वह वेदविरुद्ध, अमान्य और त्याज्य है| सारी ईसाईयत Original Sin के सिद्धांत पर खड़ी है जो खोखला और झूठा सिद्धांत है| ईसाई पंथ दो सिद्धांतों पर एक खडा है .... पहला तो है Original Sin, और दूसरा है Resurrection| इनके बिना यह पंथ आधारहीन है| दोनों ही झूठे हैं|
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श्रुति भगवती तो ऋग्वेद में कहती है ..... "अहं इन्द्रो न पराजिग्ये" अर्थात मैं इंद्र हूँ, मेरा पराभव नहीं हो सकता| वेदों के चार महावाक्य हैं ....
(१) प्रज्ञानं ब्रह्म --- (ऐतरेय उपनिषद) --- ऋग्वेद,
(२) अहम् ब्रह्मास्मि --- (बृहदारण्यक उपनिषद) --- यजुर्वेद,
(३) तत्वमसि --- (छान्दोग्य उपनिषद्) --- सामवेद,
(४) अयमात्माब्रह्म --- (मांडूक्य उपनिषद) ---अथर्व-वेद |
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हम महान ऋषियों की संतानें हैं, अतः जिन महावाक्यों को आधार बना कर हमारे हमारे महान ऋषियों ने तपस्या की और महान बने वे महावाक्य हमारे भी जीवन का आधार बनें| इन्हें परमात्मा की कृपा द्वारा ही समझा जा सकता है क्योंकि इनके दर्शन ऋषियों को गहन समाधि में हुए| इनकी समाधि भाषा है| इन्हें कोई श्रौत्रीय ब्रह्मनिष्ठ आचार्य ही समझा सकता है|
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सारे उपनिषद् हमें प्रणव यानि ओंकार पर ध्यान करने का आदेश देते हैं| गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण का भी यही आदेश और उपदेश है| हमारे शास्त्रों में कहीं भी मनुष्य को जन्म से पापी नहीं कहा गया है| अतः हम स्वधर्म पर अडिग रहें और स्वधर्म का पालन करें|
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ॐ तत्सत् ! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
२३ नवम्बर २०१८

मृत देह का अंतिम संस्कार और आगे के सारे कर्मकांड बहुत अधिक मंहगे होते हैं ---

ऐसी कोई विद्या अवश्य ही होगी जिसका प्रयोग करने पर व्यक्ति अपनी मृत देह के अणुओं की संरचना को विखंडित कर सके ताकि उसके परिवार जनों को कोई आर्थिक कष्ट न हो|
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 जब कोई भी प्रारब्धवश या अपना समय आने पर अपनी देह का त्याग करता है, सांसारिक भाषा में कहें तो .... मरता है, तब उसके परिवार जनों को बहुत अधिक कष्ट होता है| मृत देह का अंतिम संस्कार और आगे के सारे कर्मकांड बहुत अधिक मंहगे होते हैं| गरीब लोगों को तो बहुत अधिक कष्ट होता है| वे कहीं से भी रुपया लेकर कर्मकांड करते हैं और कर्ज के नीचे दब जाते हैं| इस का कोई न कोई समाधान तो अवश्य हो सकता ही है| वह क्या हो सकता है इस पर समाज के कर्णधारों को विचार करना चाहिए|
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देहरादून के ब्रह्मलीन स्वामी ज्ञानानंद गिरी महाराज ने मुझे अपने एक गुजराती साधक मित्र के बारे में बताया था जो गुजरात के जूनागढ़ जिले के एक छोटे से गाँव में रहते थे| उन्होंने जब देहत्याग किया तब स्वतः ही उनकी मृत देह बिस्तर पर ही जल कर भस्म हो गयी और राख में परिवर्तित हो गयी| न तो बिस्तर जला और चद्दर पर कोई निशान तक नहीं पड़ा| कहते हैं कि कबीर जब मरे तो उनकी मृत देह फूलों में परिवर्तित हो गयी थी|
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भौतिक विज्ञान में सिद्धांत रूप से यह संभव है यदि हम किसी विद्या से अणुओं की संरचना को परिवर्तित कर सकें| हर पदार्थ अणुओं से बना है, एक पदार्थ की दूसरे पदार्थ से भिन्नता इसी पर निर्भर है कि उस के अणु में कितने इलेक्ट्रान हैं| अंततः अणु भी ऊर्जा से ही निर्मित हैं| इस ऊर्जा के पीछे भी परमात्मा का एक विचार और संकल्प है| परमात्मा के उस विचार यानी संकल्प से जुड़ कर किसी भी भौतिक रचना को परिवर्तित किया जा सकता है| वाराणसी में स्वामी विशुद्धानंद सरस्वती नाम के संत हुए हैं जिनमें यह सिद्धि थी कि वे सूर्य की किरणों से एक पदार्थ को दूसरे पदार्थ में परिवर्तित कर दिया करते थे| वे गंधबाबा के नाम से प्रसिद्ध थे, जिसको भी आशीर्वाद देते उसके हाथों में मनचाहे फूलों की गंध आने लगती थी| परमहंस योगानंद ने अपनी विश्वप्रसिद्ध पुस्तक 'योगी कथामृत' में उनके ऊपर एक पूरा अध्याय ही लिखा है| गंधबाबा के बारे में महामहोपाध्याय पंडित गोपीनाथ कविराज ने, और अँगरेज़ पत्रकार पॉल ब्रंटन ने भी अपनी विश्व प्रसिद्ध पुस्तक "इन सर्च ऑफ़ सीक्रेट इंडिया" में खूब लिखा है|
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मेरे यह सब लिखने का अभिप्राय यह है कि ऐसी कोई विद्या अवश्य ही होगी जिसका प्रयोग करने पर व्यक्ति अपनी मृत देह के अणुओं की संरचना को विखंडित कर सके ताकि उसके परिवार जनों को कोई आर्थिक कष्ट न हो|
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सभी को धन्यवाद ! ॐ नमो नारायण !
कृपा शंकर
२२ नवम्बर २०१८

Tuesday, 20 November 2018

अफगानिस्तान में भारत की उपस्थिति भारत की एक कूटनीतिक परीक्षा है .....

एक बात अंतर्राष्ट्रीय राजनीति की कर रहा हूँ जो भारत के लिए बहुत खतरनाक है, वह है अफगानिस्तान में खूंखार आतंकी संगठन ISIS (इस्लामिक स्टेट) का बड़ी तेज़ी से फ़ैलाव| अफगानिस्तान पर जब पूर्व सोवियत संघ ने अधिकार कर लिया था वह भारत के हित में एक बहुत ही महत्वपूर्ण और अच्छी घटना थी| पर भारत की तत्कालीन सरकार ने इसका समर्थन नहीं किया| भारत की तत्कालीन सरकार की सहानुभूति दुर्भाग्य से पकिस्तान से अधिक थी| पाकिस्तान के विरुद्ध पूर्व सोवियत संघ का उपयोग किया जा सकता था| पकिस्तान की सीमाओं पर सोवियत संघ की उपस्थिति पाकिस्तान के अस्तित्व को ही मिटा सकती थी|
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अमेरिका ने सोवियत संघ को अफगानिस्तान से हटाने के लिए अपनी पूरी शक्ति झोंक दी| अमेरिका ने ही तालिबान को जन्म दिया, और पाकिस्तान को खूब आर्थिक और सैन्य सहायता दी| इसका परिणाम हुआ कि एक लम्बे युद्ध के उपरांत सोवियत संघ को अफगानिस्तान से हटना पड़ा और वहाँ तालिबान का भारत विरोधी शासन स्थापित हुआ जो अंततः अमेरिका का भी घोर विरोधी हो गया| अमेरिका को वहाँ अपनी सेना भेज कर तालिबानी शासन को हटाना ही पड़ा| अमेरिका के हज़ारों सैनिक मरे और बहुत अधिक खर्चा हुआ| अंततः अमेरिका को भी वहाँ से हटना ही पड़ा| इस का सबसे अधिक लाभ पाकिस्तान को हुआ| इस बीच इस कारण व कुछ अन्य कारणों से सोवियत संघ का भी विघटन हो गया था|
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वर्तमान में स्थिति यह है कि अफगानिस्तान भारत का एक मित्र देश है जहाँ भारत ने अनेक महत्वपूर्ण योजनाओं में बहुत अधिक निवेश कर रखा है| पर यह पकिस्तान को स्वीकार्य नहीं है| पाकिस्तान की तालिबान से भी नहीं बन रही है, इसका कारण यह है कि पकिस्तान की सहानुभूति ISIS (इस्लामिक स्टेट) से अधिक है| 'इस्लामिक स्टेट' और तालिबान एक-दूसरे के जानी दुश्मन बन चुके हैं, उनमें सैंकड़ों झड़पें हो चुकी हैं जिन में उन के हज़ारों लड़ाके मारे गए हैं| पकिस्तान भारत के विरुद्ध इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों का प्रयोग करना चाहेगा|
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राजनीति में कोई स्थाई शत्रु-मित्र नहीं होते| तालिबान जो कल तक रूस का परम शत्रु था, आज रूस का मित्र है| तालिबान और रूस में तीन वर्ष पूर्व ताजिकिस्तान में शिखर वार्ता भी हो चुकी है| रूस कभी भी यह सहन नहीं करेगा कि इस्लामिक स्टेट का प्रभाव किसी मध्य एशिया के देश में फैले| अब रूस तालिबान की सहायता से इस्लामिक स्टेट को समाप्त कर देना चाहता है| अगर इस्लामिक स्टेट अफगानिस्तान में शक्तिशाली हो जाता है तो यह भारत, ईरान और रूस के लिए बड़ा खतरा होगा| अमेरिका की नीति अफगानिस्तान में विफल रही है और रूस इसका अब पूरा लाभ उठाएगा| क्रीमिया और सीरिया में भी रूस के विरुद्ध अमेरिकी नीति विफल रही है| अफगानिस्तान में रूस निश्चित रूप से 'इस्लामिक स्टेट' के खात्मे के लिए दखल देगा| मध्य एशिया के देश रूस के साथ हैं| इस कार्य के लिए रूस तालिबान की सहायता ले सकता है|
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भारत को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि इस्लामिक स्टेट, अफगानिस्तान में अपना अड्डा न बनाए| इस्लामिक स्टेट एक विकराल दैत्य है, जो भारत के लिए बहुत खतरनाक है|अफगानिस्तान में भारत की उपस्थिति भारत की एक कूटनीतिक परीक्षा है|
कृपा शंकर
१९ नवम्बर २०१८

हे परमात्मा, आप बने रहो और यह मोटर साइकिल प्रेम से चलाते रहो .....

हे परमात्मा, आप बने रहो और यह मोटर साइकिल प्रेम से चलाते रहो .....
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इस देह में इन फेफड़ों व नासिकाओं से भगवान सांस ले रहे हैं, इस ह्रदय में धड़क रहे हैं, इन पैरों से चल रहे हैं, इन आँखों से देख रहे हैं, इन हाथों से कार्य कर रहे हैं, यह पूरी देह रूपी मोटर-साइकिल उन्हीं की है| यह मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार भी उन्हीं का है| मेरा कुछ होने का आभास एक भ्रम है| हे प्रभु, आप बने रहो..... इसके अतिरक्त मुझे कुछ आता-जाता नहीं है| आप यह मोटर-साइकिल प्रेम से चलाते रहो|

दुनियाँ का सबसे बड़ा झूठ :--

दुनियाँ का सबसे बड़ा झूठ :-- 

"सर्वधर्म समभाव" ये शब्द किसी महाकुटिल घोर धूर्त नास्तिक के मन की कल्पना है जो हिन्दुओं को मुर्ख बनाने के लिए की गयी है| जो लोग ऐसा कहते हैं वे या तो धूर्त हैं या मुर्ख जिन्होनें किसी भी धर्म का अध्ययन नहीं किया है| वास्तविकता तो यह है कि सारे मज़हब ही आपस में लड़ना सिखाते हैं| विश्व में जितनी भी लडाइयाँ चल रही हैं वे मज़हब के नाम पर ही चल रही हैं| यदि सभी धर्म समान ही होते हैं, तो फिर धर्मांतरण और विध्वंश की क्या आवश्यकता थी और है?

ड्रग्स का दुष्प्रभाव :---

ड्रग्स का दुष्प्रभाव :--- 

पिछले बीस वर्षों में अमेरिका में जितने भी बड़े पैमाने पर हत्याकांड हुए उन सब के कारणों का मनोवैज्ञानिक अध्ययन किया गया तो पाया गया कि सारे हत्यारे मन को प्रभावित करने वाले ड्रग्स (powerful psychotropic drugs) यानि घने नशे के आदि थे| सारे हत्यारे या तो ड्रग्स के आदि थे या ह्त्या के समय ड्रग्स के प्रभाव में थे|

सिंगापुर, मलयेशिया, और इंडोनेशिया में अति अति अल्प मात्रा में भी ड्रग्स के मिलने पर मृत्यु-दंड की सजा है| जापान और अमेरिका जैसे देशों में उम्र-कैद की सजा है| विश्व में ड्रग्स की तस्करी सबसे बड़ा घोषित अपराध है|

भारत में ड्रग्स के धंधे को पूरी सख्ती से पूरी तरह बंद कर के युवा पीढी को बर्बाद होने से बचाया जाए|

राम नाम की महिमा :---

राम नाम की महिमा :---
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"बंदउँ नाम राम रघुवर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को॥
बिधि हरि हरमय बेद प्रान सो। अगुन अनूपम गुन निधान सो॥
महामंत्र जोइ जपत महेसू। कासीं मुकुति हेतु उपदेसू॥
महिमा जासु जान गनराउ। प्रथम पूजिअत नाम प्रभाऊ॥
जान आदिकबि नाम प्रतापू। भयउ सुद्ध करि उलटा जापू॥
सहस नाम सम सुनि सिव बानी। जपि जेई पिय संग भवानी॥
हरषे हेतु हेरि हर ही को। किय भूषन तिय भूषन ती को॥
नाम प्रभाउ जान सिव नीको। कालकूट फलु दीन्ह अमी को॥"
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"राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे| सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने||"
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"विष्णोरेकैकनामानि सर्ववेदाधिकं मतम्| तादृङ् नामसहस्रेण रामनाम समं मतम्||"
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"रमन्ते योगिनोSनन्ते सत्यानन्दे चिदात्मनि| इति रामपदेनासौ परम् ब्रह्माभिधीयते||"
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"र" अग्निबीज है जो शोक, मोह, और कर्मबंधनों का दाहक है|
"आ" सूर्यबीज है जो ज्ञान का प्रकाशक है|
"म" चंद्रबीज है जो मन को शांति व शीतलता दायक है|
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"राम" नाम और "ॐ" का महत्व एक ही है| "राम" नाम तारक मन्त्र है, और "ॐ" अक्षर ब्रह्म है| दोनों का फल एक ही है|
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राम राम राम !!