Saturday, 10 November 2018

तारक मन्त्र "राम" नाम सत्य है (रामनाम का महत्त्व) ....

तारक मन्त्र "राम" नाम सत्य है (रामनाम का महत्त्व) ....
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"र" अग्निबीज है जो शोक, मोह, और कर्मबंधनों का दाहक है|
"आ" सूर्यबीज है जो ज्ञान का प्रकाशक है|
"म" चंद्रबीज है जो मन को शांति व शीतलता दायक है|
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"राम" नाम और "ॐ" का महत्व एक ही है| "राम" नाम तारक मन्त्र है, और "ॐ" अक्षर ब्रह्म है| दोनों का फल एक ही है|
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विशेष :----- यह मैं पहिले भी लिख चुका हूँ| "राम" नाम के जाप और "ॐ" यानि ओंकार के ध्यान से एक रक्षा कवच का निर्माण होता है जो हमारी रक्षा करता है| मृत्यु एक अटल सत्य है| जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु भी होगी ही| जब किसी की शव यात्रा जा रही होती है तब मृतक के परिजन "राम नाम सत्य है" कहते हुए ही जाते हैं| ऐसी मान्यता है कि भौतिक मृत्यु के उपरांत जीवात्मा की उसके पुण्यों/पापों के अनुसार गति होती है| अधिकाँश मनुष्यों के अच्छे पुण्य नहीं होते अतः वे अपनी मृत देह के आसपास भटकते रहते हैं, और अपनी वासना की पूर्ति हेतु औरों की देह में प्रवेश करने का प्रयास करते हैं| राम का नाम लेने से उपस्थित लोगों के ऊपर एक रक्षा-कवच का निर्माण होता है जो उनकी रक्षा करता है|
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राम का नाम न केवल सत्य है, बल्कि भारतीय जन मानस में रचा बसा भी है| यही कारण है कि परस्पर अभिवादन में 'राम-राम', कोई त्रुटि होने पर क्षोभ व्यक्त करने के लिए भी 'राम राम', आश्चर्य प्रकट करने के लिए 'हे राम', संकटग्रस्त होने पर सहायता की अपेक्षा में भी 'हे राम' और अंतिम यात्रा में तो "राम नाम सत्य है" कहते ही हैं|
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राम नाम जीवन का मंत्र है, मृत्यु का नहीं| राम, भगवान शिव के आराध्य हैं| राम ही हमारे जीवन की ऊर्जा हैं| जो रोम रोम में बसे हुए हैं वे राम है| जिसमें योगिगण निरंतर रमण करते हैं वे राम हैं| ‘रा’ शब्द परिपूर्णता का बोधक है और ‘म’ शब्द परमेश्वर का वाचक है| चाहे निर्गुण हो या सगुण, "राम" शब्द एक महामंत्र है|
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राम नाम निर्विवाद रूप से सत्य है| राम नाम के निरंतर जाप से सद्गति प्राप्त होती है|
राम राम राम राम राम राम राम राम !! जय श्रीराम ! जय श्रीराम ! जय श्रीराम !
कृपा शंकर
६ नवम्बर २०१८

भारत का संविधान और न्याय-व्यस्था भारतीयों के अधिकारों की रक्षा के लिए है, न कि विदेशी आतंकी लुटेरों के अधिकारों की रक्षा के लिए .....

भारत का संविधान और न्याय-व्यस्था भारतीयों के अधिकारों की रक्षा के लिए है, न कि विदेशी आतंकी लुटेरों के अधिकारों की रक्षा के लिए| बाबर नाम के एक विदेशी आतंकी लुटेरे आतताई ने पाँच लाख से अधिक भारतीयों की ह्त्या करवा कर, हज़ारों भारतीय महिलाओं का बलात्कार करवा कर, पूरे भारत देश को आतंकित कर के, भारत के पवित्रतम स्थान राम मंदिर को भग्न कर के एक विवादित ढांचा राममंदिर के भग्नावशेषों से ही वहीं खड़ा किया था|
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बाबर कोई भारतीय नहीं बल्कि मध्य एशिया के उज़बेकिस्तान नाम के देश से आया हुआ एक निकृष्टतम चोर दुर्दांत अत्याचारी और आतंकी लुटेरा था|
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भारत के संविधान और उच्चतम न्यायालय का यह उद्देश्य नहीं है कि वे बाबर या अन्य किसी विदेशी लुटेरे के अधिकारों की रक्षा करे| यह संविधान और न्याय-व्यवस्था भारतीयों के अधिकारों की रक्षा के लिए है न कि विदेशी आतंकी लुटेरों की|
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समाज की सुरक्षा के लिए चोरी, डकैती, ह्त्या आदि को अपराध माना गया है| लूटी हुई संपत्ति उसके स्वामी को बापस दिलवाना न्यायालय का दायित्व है|
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लाखों भारतीयों की ह्त्या कर के राम मंदिर लूटा व तोड़ा गया था| राम मंदिर के मालिकों को मंदिर बापस करने के बदले .....
(१) लुटेरों को लूट की संपत्ति पर तीस पीढ़ियों का अधिकार मानना,
(२) लूटमार और लुटेरों का सम्मान करना,
करोड़ों भारतीयों और भारत की अस्मिता का अपमान है|
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श्रीराम पूरे भारत के और हम सब के प्राण हैं| कृपया इसे अधिक से अधिक साझा और कॉपी/पेस्ट करें| धन्यवाद ! जय श्रीराम !

धनतेरस की शुभ कामनाएँ .....

धनतेरस की शुभ कामनाएँ .....
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सबसे बड़ा धन अच्छा स्वास्थ्य है| धनतेरस के दिन दीप जला कर भगवान से अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें| बेकार में प्रचलित रीति-रिवाजों का अन्धानुशरण करते हुए सोना-चांदी आदि खरीदने के लिए न दौड़ें, और अपने बड़े परिश्रम से कमाए धन को नष्ट न करें| अपने स्वास्थ्य की रक्षा करें|
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कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है| इस दिन को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाया जाता है| धन्वन्तरि देवताओं के चिकित्सक हैं और चिकित्सा के देवता माने जाते हैं इसलिए चिकित्सकों के लिए धनतेरस का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होता है| इसका लौकिक धन-संपत्ति या रुपये-पैसे से कोई सम्बन्ध नहीं है| लोग इस दिन सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन, भूमि, वस्त्र आदि जमकर खरीदते हैं, या नए भवन का निर्माण आरम्भ करते हैं| यह एक अन्धानुशरण की गलत परम्परा सी पड़ गयी है जिसका कोई शास्त्रीय आधार नहीं है|
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धन्वन्तरी जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था| भगवान धन्वन्तरि चूंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा पड़ गयी है| कहीं कहीं एक गलत और झूठी लोकमान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि इस दिन धन (वस्तु) खरीदने से उसमें तेरह गुणा वृद्धि होती है|
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धनतेरस के संदर्भ में एक लोक कथा प्रचलित है कि एक बार यमराज से एक यमदूत ने पूछा कि अकाल-मृत्यु से बचने का कोई उपाय है क्या? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए यम देवता ने कहा कि जो प्राणी धनतेरस की शाम यम के नाम पर दक्षिण दिशा में दीया जलाकर रखता है उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है| इस मान्यता के अनुसार धनतेरस की शाम लोग आँगण मे यम देवता के नाम पर दीप जलाकर रखते हैं|
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धन्यवाद ! धन तेरस की शुभ कामनाएँ !
ॐ तत्सत् ! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
५ नवम्बर २०१८

आधी रात का सूर्य .....

आधी रात का सूर्य .....
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आधीरात को उगने वाले सूर्य को कुछ समय के लिए देखने की एक ४० वर्ष पुरानी स्मृति है मुझे| सन १९७८ में एक बार नोर्वे के उत्तरी भाग में कुछ दिनों के लिए जाने का अवसर मिला था जहाँ से आधी रात के सूर्य की भूमि (Land of midnight sun) आरम्भ होती है| वहाँ से उत्तर में उत्तरी ध्रुव क्षेत्र है|

आधीरात को सूर्य का उगना ..... आर्कटिक वृत्त के उत्तरी भाग में, और अंटार्कटिक वृत्त के दक्षिणी भाग में वहाँ के स्थानीय ग्रीष्मकाल में होने वाली एक प्राकृतिक घटना होती है| इसको देखने बहुत लोग आते हैं|

वहाँ आधी रात को सूर्य कुछ देर तक ही दिखाई देता है फिर तरह तरह का प्रकाश पूरे आकाश में छा जाता है|
मुझे अब तो विश्वास भी नहीं होता कि जीवन में मैनें भी कभी आधी रात का सूर्योदय देखा है| पर यह सत्य है|

एक अवधूत संत स्वामी सदाशिव ब्रह्मेन्द्र सरस्वती ......

एक अवधूत संत स्वामी सदाशिव ब्रह्मेन्द्र सरस्वती ......
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स्वामी सदाशिव ब्रह्मेन्द्र सरस्वती एक अवधूत संत थे जिन्होनें संन्यास ग्रहण के पश्चात अपने पूरे जीवनकाल में कभी कोई वस्त्र नहीं पहना, और सदा ध्यानमग्न रहते थे| सदाशिव ब्रह्मेन्द्र को अपने ज्ञान की तीव्रता होने के कारण आरम्भ में तर्क करने का स्वभाव था| अपने तर्कों से वे बड़े बड़े विद्वानों को निरुत्तर कर देते थे| कई विद्वानों ने उनकी शिकायत उनके गुरु स्वामी परमशिवेंद्र सरस्वती से की| गुरुदेव ने सदाशिव ब्रह्मेन्द्र को बुलाकर कहा कि तुम तो सब के मुंह बंद कर देते हो पर तुम स्वयं चुप कब रहोगे? उसी क्षण से सदाशिव ब्रह्मेन्द्र ने आजीवन मौन धारण का व्रत ले लिया|
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वे बिना किसी से कोई बात किये अवधूतावस्था में कावेरी नदी के तट पर घुमते रहते| अधिकाँश समय तो ध्यानमग्न ही रहते| लोगों ने उनके गुरु से उनकी शिकायत की तो गुरु ने यही कहा कि .... "जाने कब मैं भी इतना भाग्यशाली बनूँ|" सदाशिव ब्रह्मेन्द्र ने वेदान्त पर कई पुस्तकें लिखीं और अनेक काव्य रचनाएँ कीं|
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उनके चमत्कारों पर अनेक किस्से दक्षिण भारत में प्रचलित हैं| परमहंस योगानंद ने भी अपनी विश्वप्रसिद्ध पुस्तक "योगी कथामृत" में उनके बारे में बहुत कुछ लिखा है|
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उनका जन्म मदुराई में अठारहवीं शताब्दी में श्रीवत्स गौत्र के श्री मोक्षसोमसुन्दर और श्रीमती पार्वती के घर हुआ था| माता-पिता ने उनका नाम शिवरामकृष्ण रखा था| उनके माता-पिता भगवान रामनाथस्वामी (रामेश्वरम) के भक्त थे| रामेश्वरम भगवान शिव की कृपा से ही उनका जन्म हुआ था|
हमारी भारतभूमि धन्य है जिसने ऐसे महान संतों को जन्म दिया|
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ॐ तत्सत् ! ॐ ॐ ॐ !!
४ नवम्बर २०१८

मनुष्य का मन भी एक गिद्ध है .....

जैसे गिद्ध, चील-कौए, और लकड़बघ्घे मृत लाशों को ही ढूँढ़ते रहते हैं और अवसर मिलते ही उन पर टूट पड़ते है, वैसे ही मनुष्य का मन भी एक गिद्ध है जो दूसरों को लूटने, ठगने और विषय-वासनाओं की पूर्ति के अवसर ढूँढ़ता रहता है और अवसर मिलते ही उन पर टूट पड़ता है|

मनुष्य के वेश में भी बहुत सारे परभक्षी घुमते हैं जिन की गिद्ध दृष्टी दूसरों से घूस लेने, दूसरों को ठगने, लूटने और वासनापूर्ति को ही लालायित रहती है| ऐसे लोग बातें तो बड़ी बड़ी करते हैं पर अन्दर ही अन्दर उन में कूट कूट कर हिंसा, लालच, कुटिलता व दुष्टता भरी रहती है| मनुष्य के रूप में ऐसे परभक्षी चारों ओर भरे पड़े हैं| भगवान की परम कृपा ही उन से हमारी रक्षा कर सकती है, अन्य कुछ भी नहीं|

हे प्रभु, हम अपने विचारों के प्रति सदा सजग रहें और हमारा मन निरंतर आपकी चेतना में रहे| सब तरह के कुसंग, बुरे विचारों और प्रलोभनों से हमारी रक्षा करो|
ॐ तत्सत् ! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
३ नवम्बर 2018

Sunday, 4 November 2018

यह सृष्टि परमात्मा की है, मेरी नहीं .....

यह सृष्टि परमात्मा की है, मेरी नहीं .....
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यह सृष्टि परमात्मा की है, मेरी नहीं अतः मैं इसका जिम्मेदार नहीं हूँ| भगवान अपनी सृष्टि चलाने में सक्षम हैं अतः उन्हें मेरे सुझाव या सलाह की कोई आवश्यकता नहीं है| संसार में हो रही बुराइयों का कारण या जिम्मेदार मैं नहीं हूँ, अतः मैं इनका शिकार न बनूँ| विश्व में हो रहे घटनाक्रम का नियंत्रण मेरे हाथ में नहीं है, अतः मुझे इन के परिणामों की चिंता भी नहीं करनी चाहिए| 
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चारों ओर छाये हुए नकारात्मक तामसी विचारों, संकल्पों व भावनाओं से मैं अत्यधिक आहत था| ये मुझे दुखी और बहुत अधिक प्रभावित कर रहे थे| भगवान से मैनें प्रार्थना की जिसके परिणामस्वरूप मुझे प्रेरणा मिल रही है कि संसार में अत्यधिक तामस और नकारामकता है, पर मुझे इनका भाग नहीं बनना चाहिए? मैं ही अपना सबसे बड़ा मित्र हूँ और शत्रु भी, पर क्या बनना है इसका निर्णय मेरा ही होगा, किसी अन्य का नहीं| मुझ द्वारा संपादित कर्म ही नहीं, विचारों व भावनाओं का स्वामी भी मुझे ही बनना है, ऐसी भगवान की ही इच्छा है|
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भगवान की इच्छा है कि मैं वह कार्य ही करूँ जिसके लिए उन्होंने मुझे यहाँ भेजा है| क्या करना है? यह मुझे स्वयं भगवान द्वारा अच्छी तरह समझाया जा चुका है| कोई संदेह या शंका नहीं है| अतः मुझे अन्यत्र कहीं दृष्टी भी नहीं डालनी है| मेरा लक्ष्य सदा मेरे सामने रहे, यही भगवान चाहते हैं| मुझे भगवान की इच्छा का ही पालन करना है|
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ॐ तत्सत् ! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
३ नवम्बर २०१८