सार की बात एक ही है कि भगवान को अपना पूर्ण प्रेम दो, इतना प्रेम कि स्वयं में भी भगवान ही प्रतीत हों। भगवान में और स्वयं में कोई भेद न रहे। हमारा अस्तित्व ही भगवान का अस्तित्व हो जाए। हम निमित्त मात्र ही नहीं, स्वयं भगवान के साथ एक हो जाएँ।
Saturday, 3 January 2026
भगवान को अपना पूर्ण प्रेम दो, इतना प्रेम कि स्वयं में भी भगवान ही प्रतीत हों ---
Friday, 2 January 2026
भारत मे गाय काटने का इतिहास (By Rajiv Dixit)
Tuesday, 30 December 2025
इस संसार में जवानी भी देखी, बुढ़ापा भी देखा, और भगवान से दिल लगाकर भी देख लिया। अब और देखने के लिए कुछ भी नहीं बचा है।
इस संसार में जवानी भी देखी, बुढ़ापा भी देखा, और भगवान से दिल लगाकर भी देख लिया। अब और देखने के लिए कुछ भी नहीं बचा है। इसलिये सभी को राम राम !! वंदे मातरम् !! भारत माता की जय॥
Monday, 29 December 2025
इस जन्म में मैं स्वाभिमान और गर्व सहित सनातनी हिन्दू हूँ ---
इस जन्म में मैं स्वाभिमान और गर्व सहित सनातनी हिन्दू हूँ। हिन्दू का अर्थ है जो हिंसा से दूर है। मनुष्य में हिंसा का जन्म लोभ व अहंकार से होता है। लोभ व अहंकार ही राग-द्वेष है। राग-द्वेष से मुक्ति ही वीतरागता है। वीतराग व्यक्ति ही महत् तत्व से जुड़कर महात्मा बनता है। वीतराग व्यक्ति ही स्थितप्रज्ञता को प्राप्त होता है जो ईश्वर प्राप्ति की अवस्था है। स्थितप्रज्ञता ही कैवल्य/ब्राह्मी-स्थिति/कूटस्थ-चैतन्य आदि है। हम शाश्वत आत्मा हैं, इसलिए हमारा स्वधर्म परमात्मा से परमप्रेम और समर्पण है। इस पृथ्वी पर वह हर व्यक्ति हिन्दू है जिसे परमात्मा से प्रेम है, व जो परमात्मा को उपलब्ध होना चाहता है। हिन्दुत्व ही हमें आत्मा की शाश्वतता, पुनर्जन्म और कर्मफलों की शिक्षा देता है। घृणा व क्रोध से मुक्त होकर, ईश्वर की चेतना में रहते हुए हम अपने शत्रुओं का संहार करें। हमारे मन में शत्रुभाव का अभाव तो सदा रहे, लेकिन शत्रुबोध सदा बना रहे।
कांग्रेस के नेताओं को अपनी हार के लिए अपने अलावा सब जिम्मेदार लगते हैं ---
कांग्रेस के नेताओं को अपनी हार के लिए अपने अलावा सब जिम्मेदार लगते हैं
"राम" नाम पर सबका जन्मसिद्ध अधिकार है ---
"राम" नाम पर सबका जन्मसिद्ध अधिकार है। इसने पता नहीं अब तक कितने असंख्य लोगों को तारा है और कितनों को तारेगा। यह हमें परमात्मा का सबसे बड़ा उपहार है। ध्यानमुद्रा शांभवी में तो इसका विधिवत जप करें ही, लेकिन चलते-फिरते, उठते-बैठते, शौच-अशौच और देश-काल आदि के सब बंधनों से स्वयं को मुक्त कर इसका हर समय मानसिक जप कर सकते हैं।