Sunday, 5 July 2026

मेरे जैसे लोग समाज में सामान्यतः अनुपयुक्त (Misfit) माने जाते हैं ---

 मेरे जैसे लोग समाज में सामान्यतः अनुपयुक्त (Misfit) माने जाते हैं। लेकिन मैं इसे नहीं मानता। फेसबुक ने मुझे स्वयं को व्यक्त करने का अवसर दिया था, जिसका लाभ मैं पिछले १५ वर्षों से ले रहा हूँ। मेरे हृदय में एक तड़प थी कि मैं परमात्मा से परमप्रेम यानि भक्ति के विचारों और भावों को खुल कर बिना किसी रोकटोक के प्रस्तुत करूँ। फेसबुक ने मुझे वह अवसर दिया जिसके लिए मैं उनका आभारी हूँ।

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मेरे विरुद्ध अनेक लोगों ने अनेक बार Reporting भी की। फेसबुक ने अपने स्तर पर जांच कर के मुझे निर्दोष घोषित किया और कोई बंधन नहीं लगाया। बहुत अधिक Reporting के कारण दो-तीन बार अधिक से अधिक एक दिन का प्रतिबंध भी लगाया। लेकिन मुझे कोई शिकायत नहीं है। दस-बारह वर्षों पूर्व एक बार कुछ अमेरिकन मित्रों से मेरी असहमति हुई तो उन्होने मेरे विरुद्ध बहुत कुछ लिखा और मैंने भी। लेकिन फेसबुक तटस्थ रही। उन दिनों मैं केवल अङ्ग्रेज़ी में लिखता था। मुझे उस समय हिन्दी में अच्छी तरह लिखना नहीं आता था।
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अंतिम बात यह बताना चाहता हूँ कि आज तक मैंने फेसबुक से एक पैसा भी नहीं लिया है। उन्होंने इसका प्रस्ताव भी दिया था। एक व्यवसायिक कंपनी से मेरी बात भी फेसबुक ने कराई थी जिसमें यह व्यवस्था थी कि वे मेरे हर लेख के साथ अपना विज्ञापन देंगे और मुझे बदले में धन देंगे। लेकिन मैंने ही विनम्रता से मना कर दिया। फेसबुक पर अपनी स्वतंत्र इच्छा से ही आया था और अपनी स्वतंत्र इच्छा से ही जाऊंगा। फेसबुक अपने नियमित लेखकों को धन भी देती है, लेकिन उनके अनुकूल लिखना पड़ता है।
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सभी मित्रों को साभार धन्यवाद। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने मुझे बहुत अधिक परेशान किया है, उनको भी बहुत अधिक धन्यवाद। आप सब के हृदय में परमात्मा के प्रति परमप्रेम (भक्ति) बना रहे। ॐ तत् सत् !!
कृपा शंकर
१ जुलाई २०२६

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