Sunday, 5 July 2026

मेरे इस जीवन का एक ही उद्देश्य था और है, वह है — परमात्मा को पूर्ण समर्पण।

 मेरे इस जीवन का एक ही उद्देश्य था और है, वह है — परमात्मा को पूर्ण समर्पण। अन्य कोई उद्देश्य नहीं है। मैं कोई बड़ी-बड़ी बातें नहीं करता, जो वास्तविकता है, वह ही है। यह इस जीवन का संध्याकाल है। इस शरीर की आयु ८० वर्ष पूर्ण होने वाली है। परमात्मा से प्रेम मेरा जन्मजात स्वभाव है। मेरे पास किसी भी तरह की कोई शिकायत, आलोचना व निंदा का विषय नहीं है। निजानुभूतियों से परमात्मा की अवधारणा स्पष्ट है। अनेक उपलब्धियां हैं, जिनके बारे में चर्चा करने का निषेध है।

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इस शरीर में रहूँ या न रहूँ, परमात्मा की ज्योतिर्मय अनंतता में मैं आप सबके साथ एक हूँ। वह ज्योतिर्मय अनंतता मैं स्वयं हूँ। मैं और मेरे प्रभु एक हैं।
ॐ तत् सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
३० जून २०२६

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