ताइवान से यदि चीन का युद्ध हुआ तो अंततः उसमें चीन हारेगा और चीन का सात टुकड़ों में इस तरह विभाजन होगा ---
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यह लेख अंतर्जाल पर विभिन्न स्त्रोतों से मिले, चीन के बारे में पूरी जानकारी रखने वाले विशेषज्ञों द्वारा निकाले गए निष्कर्षों का सार है। उनका कहना है कि चीन का अमेरिका व जापान से युद्ध संभावित है, जिसके बाद चीन का सात टुकड़ों में बंटना निश्चित है, जो अगले सात वर्षों में पूर्ण हो जाएगा। जो भाग चीन से अलग होंगे, वे इस प्रकार हैं --
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(१ व २) सबसे पहले चीन से तिब्बत और क्विङ्ग्हाई प्रांत अलग होंगे और मिलकर एक स्वतंत्र देश बना लेंगे। भारतीय ज्योतिषियों का कहना है कि कैलाश और मानसरोवर को भारत अपने अधिकार में ले लेगा।
(३) दूसरा भाग जो चीन से पृथक होगा, वह सिंजियांग प्रांत है। यह पूर्वी तुर्की कहलाता था। कभी भी चीन का भाग नहीं था।
(४) तीसरा भाग जो चीन से पृथक होगा वह मंचूरिया होगा, जिसे चीन ने तीन प्रान्तों में बाँट रखा है -- लियानोनिंग, जिलियान व हेलोंगजियांग।
(५) इन्नर मंगोलिया, जो चीन की दीवार के उत्तर में है।
(पास में ही एक छोटा सा प्रांत और है जिसका नाम निंगसिया है, उसके बारे में कुछ भी कहा नहीं जा सकता।)
(६) गुयाङ्गदोंग प्रांत व हैनान द्वीप। होङ्ग्कोंग व मकाऊ इसी का भाग हो जाएँगे।
(७) ताइवान -- जो इस समय भी चीन से पृथक है।
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भारत की सीमा चीन से कहीं पर भी नहीं लगेगी। चीन द्वारा कब्जाए गए सारे भारतीय क्षेत्रों को भारत छुड़ा लेगा।
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चीन के उत्तर-पूर्व में चीन की दीवार के दक्षिण में जो क्षेत्र है, जहाँ से चीन की दीवार का आरंभ होता है, वहाँ तो सन १९८५ में मैं भी एक बार गया हुआ हूँ। चीन की दीवार पर दो बार चढ़ा भी हूँ, और किसी की बाइसिकल मांग कर चीन की दीवार के साथ साथ घूमा भी बहुत हूँ। बड़ा उपजाऊ और अच्छा इलाका है। वहाँ के लोग सप्ताह में एक दिन नहाते हैं, सर्दियों में महीने में एक बार नहाते हैं। विदेशियों का सम्मान भी करते हैं। चीन की मुख्य भूमि में शाकाहारी भोजन नहीं मिलता, खुद को ही व्यवस्था करनी पड़ती है। फल, फलों का रस, दूध, सब्जियाँ, ब्रेड, आटा, दाल, चावल, वनस्पति तेल, आदि मिल जाते हैं। अपने भोजन की व्यवस्था खुद कर लो। वहाँ मक्खन गलती से भी मत खरीदना, वह जानवरों की चर्बी से बनता है। किसी भोजनालय में तो भोजन कर ही नहीं सकते। शाकाहारी को तो ५० मीटर दूर से ही बास आती है। टेबल पर हड्डियाँ उबलती रहती हैं, उसी का पानी पीते हैं। होटल में घुसते ही दरवाजे पर टबों में झींगे, जीवित मछलियां आदि पानी के टबों में रखी रहती हैं। जो भी आपको पसंद आए वह बता दो। तुरंत उसे काट कर और पका कर ला देंगे। उन दिनों साँप का सूप और बंदर की खोपड़ी का मांस खूब लोकप्रिय था।
दो बार पार्टियों में जाना पड़ा। एक बार तो खाना बनाने वाली को समझा दिया कि शुद्ध वनस्पति तेल में थोड़ा सा चावल और फलियाँ पकाकर बना दो। मसालों के नाम पर काली मिर्च का पाउडर और नमक के सिवाय और कुछ भी न हो। एक बार एक पार्टी में सिर्फ दूध और बादाम आदि सूखे फल ही लिए। कहीं घूमने जाता तो साथ में ब्रेड सेंडविच और कोकोकोला ले जाता था। भूख लगती तो किसी पार्क में बैठकर ब्रेड सेंडविच खा लेता और कोकोकोला पी लेता।
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दक्षिण कोरिया में तो एक बार एक बड़े धर्म संकट में फंस गया था। किसी मित्र के घर भोजन के लिए निमंत्रित था। वहीं पता चला कि वहाँ तो लोग कुत्ते का मांस भी खाते हैं। उस परिवार को अङ्ग्रेज़ी आती थी, अतः उनको समझा दिया। दूध और फल आदि से ही मेरा भोजन हो गया।
कृपा शंकर
२२ जुलाई २०२२
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