Friday, 25 August 2017

भक्ति और आस्था का संगम ........

भक्ति और आस्था का संगम ........
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(१) ढाई हज़ार फीट की ऊँचाई पर स्थित बाबा मालकेत की २४ कौसीय परिक्रमा पूरे राजस्थान में होने वाली सबसे बड़ी परिक्रमा है जो राजस्थान के झुंझुनूं जिले की अरावली पर्वत माला के लोहार्गल तीर्थ से संत महात्माओं के नेतृत्व में ठाकुर जी की पालकी के साथ गोगा नवमी (भाद्रपद कृष्ण नवमी) के दिन आरम्भ होकर भाद्रपद अमावस्या के दिन लोहार्गल तीर्थ में ही बापस आकर समाप्त हो जाती है| इस सात दिवसीय चौबीस कौसीय परिक्रमा में हर वर्ष सात से नौ लाख श्रद्धालु पूरे भारत से आकर भाग लेते हैं| इस वर्ष लगभग आठ लाख श्रद्धालुओं ने इस पदयात्रा परिक्रमा में भाग लिया| अमावस्या के दिन लोहार्गल में हज़ारों श्रद्धालु और एकत्र हो जाते हैं| सभी श्रद्धालु अमावस्या के दिन लोहार्गल तीर्थ के सूर्य कुंड में स्नान कर अपने अपने घरों को बापस चले जाते हैं| कहते हैं महाभारत युद्ध के पश्चात् इसी दिन पांडवों ने जब यहाँ सूर्यकुंड में स्नान किया तो भीम की लोहे की गदा गल गयी थी जिससे इस तीर्थ का नाम लोहार्गल पड़ा| अरावली पर्वत माला की घाटियों में यह यात्रा अति मनोरम होती है| अनेक स्वयंसेवी संस्थाएँ पदयात्रियों की हर सुविधा का ध्यान रखती हैं| आज सोमवती अमावस्या के दिन इस पर्व का विशेष महत्व था|
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(२) आज भाद्रपद अमावस्या के दिन ही सभी सती मंदिरों में मुख्य आराधना होती है| झुंझुनू के विश्व प्रसिद्ध श्रीराणीसती दादीजी के मंदिर में भी मुख्य आराधना इसी दिन होती है| ये सभी सतियाँ वीरांगणाएँ थीं जिन्होंने धर्मारक्षार्थ युद्धभूमि में युद्ध किया और स्वयं प्रकट हुए अपने तेज से सती हुईं|
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(३) आज भाद्रपद अमावस्या के दिन ही मध्याह्न काल में ६९ वर्ष पूर्व इस "शरीर महाराज" का जन्म झुंझुनूं में हुआ था| इस "शरीर महाराज" ने इस कथन को चरितार्थ किया ..... "आया था किस काम को, तु सोया चादर तान"| जाग बहुत देर से हुई; हुई तो भी बहुत सारे दुःस्वप्नों के साथ| फिर क्या हुआ ? .... "बाना पहिना सिंह का, चला भेड़ की चाल", ..... ऐसे ही जीवन व्यर्थ चला गया ..... "आये थे हरि भजन को, ओटन लगे कपास"| अब वह दुःस्वप्न बीत गया है, देरी से ही सही यह ग़ाफिल जाग चुका है| आगे प्रकाश ही प्रकाश है| कहीं कोई निराशा नहीं है| जिनका कभी जन्म ही नहीं हुआ उनका आश्रय मिला है| वहाँ कोई मृत्यु नहीं , कोई भय नहीं है|
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आप सब को नमन ! ॐ तत्सत् ! ॐ ॐ ॐ !!


२१ अगस्त २०१७

शैतान है और हर समय हमारे पीछे पड़ा रहता है ....

शैतान है और हर समय हमारे पीछे पड़ा रहता है .....
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शैतान की परिकल्पना झूठी नहीं है | शैतान एक सत्य है जो हर समय हमारे पीछे पीछे रहता है | उससे बचना हमारा दायित्व है | शैतान एक सर्वव्यापी सचेतन आसुरी शक्ति है जो हमें सत्य से दूर रखती है |

शैतान हमें अधोमुखी और निरंतर पतन की और धकेलने वाली शक्ति है जो सर्वप्रथम काम वासना के रूप में, फिर लोभ के रूप में, फिर राग-द्वेष और अहंकार के रूप में स्वयं को व्यक्त करती है |
अब हम उसे समझें या न समझें यह हमारी स्वयं की समस्या है |

ॐ तत्सत ! ॐ ॐ ॐ ||

हर हिन्दू परिवार प्रमुख का दायित्व .....

हर हिन्दू परिवार प्रमुख का दायित्व
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हरेक हिन्दू सनातन धर्मावलम्बी परिवार प्रमुख का यह दायित्व है कि वह अपने परिवार में एक भयमुक्त प्रेममय वातावरण का निर्माण करे | अपने बालक बालिकाओं में इतना साहस विकसित करें कि वे अपनी कोई भी समस्या या कोई भी उलझन बिना किसी भय और झिझक के अपने माता/पिता व अन्य सम्बन्धियों को बता सकें | बच्चों की समस्याओं को ध्यान से सुनें, उन्हें डांटें नहीं, उनके प्रश्नों का उसी समय तुरंत उत्तर दें | इससे generation gap की समस्या नहीं होगी | बच्चे भी माँ-बाप व बड़े-बूढों का सम्मान करेंगे | हम अपने बालकों की उपेक्षा करते हैं, उन्हें डराते-धमकाते हैं, इसीलिए बच्चे भी बड़े होकर माँ-बाप का सम्मान नहीं करते |
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परिवार के सभी सदस्य दिन में कम से कम एक बार साथ साथ बैठकर पूजा-पाठ/ ध्यान आदि करें, और कम से कम दिन में एक बार साथ साथ बैठकर प्रेम से भोजन करें | इस से परिवार में एकता बनी रहेगी |
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बच्चों में परमात्मा के प्रति प्रेम विकसित करें, उन्हें प्रचूर मात्रा में सद बाल साहित्य उपलब्ध करवाएँ और उनकी संगती पर निगाह रखें | माँ-बाप स्वयं अपना सर्वश्रेष्ठ सदाचारी आचरण का आदर्श अपने बच्चों के समक्ष रखें |
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इस से पीढ़ियों में अंतर (generation gap) की समस्या नहीं रहेगी और बच्चे बड़े होकर हमारे से दूर नहीं भागेंगे | लड़कियाँ भी घर-परिवार से भागकर लव ज़िहाद का शिकार नहीं होंगी |

ॐ तत्सत् | ॐ ॐ ॐ ||

२० अगस्त २०१७

अपने समय के एक-एक क्षणका सदुपयोग करें ....

अपने समय के एक-एक क्षणका सदुपयोग करें  ....
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जिस भौतिक विश्व में हम रहते हैं, उससे भी बहुत अधिक बड़ा एक सूक्ष्म जगत हमारे चारों ओर है, जिसमें नकारात्मक और सकारात्मक दोनों तरह की सत्ताएँ हैं| जितना हम अपनी दिव्यता की ओर बढ़ते हैं, ये नकारात्मक शक्तियां उतनी ही प्रबलता से हम पर अधिकार करने का प्रयास करती हैं| सबसे पहिले वे हमारा मनोबल क्षीण करती हैं| इनका उपकरण बनने से बचने के लिए निरंतर प्रयास करना पड़ता है| इसके लिए निरंतर हरि स्मरण, सत्संग, स्वाध्याय और कुसंग-त्याग व सात्विक भोजन ये ही उपाय हैं| अपने विचारों और भावों पर सदा ध्यान रखें और अच्छे संकल्प करें|
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अपने समय के एक-एक क्षणका सदुपयोग करें और ईश्वर प्रदत्त विवेक के प्रकाश में सारे कार्य करें| हमें अपने समय के एक एक क्षण का सदुपयोग करना होगा अन्यथा हम स्वयं को क्षमा नहीं कर पाएंगे | आग लगने पर कुआँ नहीं खोदा जा सकता, कुएँ को तो पहिले से ही खोद कर रखना पड़ता है|
भगवान सबकी रक्षा करें| हमारा समर्पण पूर्ण हो|
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ॐ गुरु ! जय गुरु !ॐ तत्सत् | ॐ ॐ ॐ ||


२० अगस्त २०१७

बालक/बालिकाओं के माता-पिताओं से एक प्रार्थना .....

बालक/बालिकाओं के माता-पिताओं से एक प्रार्थना .....
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आजकल धर्मनिरपेक्ष सेकुलर शिक्षा पद्धति, और घरों में सात्विक वातावरण के अभाव के कारण लव जिहाद की बहुत सारी घटनाएँ घट रही हैं| माता-पिताओं को चाहिए कि वे सदाचार का पालन करें और अपने बच्चों के समक्ष अपना स्वयं का उच्चतम आदर्श प्रस्तुत करें|
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परिवार में एक भयमुक्त प्रेममय वातावरण हो| बालक/बालिकाओं में इतना साहस विकसित करें कि वे अपनी कोई भी समस्या/उलझन बिना किसी झिझक और भय के अपने माता/पिता व अन्य सम्बन्धियों को बता सकें|
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परिवार के सभी सदस्य दिन में एक बार साथ साथ बैठकर पूजा-पाठ/ ध्यान आदि करें, और कम से कम दिन में एक बार साथ साथ बैठकर भोजन करें|
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बालकों को संघ की शाखाओं में भेजो| बालिकाओं को "राष्ट्र सेवा समिति" और "दुर्गा वाहिनी" से जुड़ने की प्रेरणा दें| उनके विकास और उनकी संगती पर निगाह रखें|
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आपके बच्चे कभी नहीं बिगड़ेंगे और बालिकाएँ कभी भी लव जिहाद का शिकार नहीं होंगी|

ॐ तत्सत् | ॐ ॐ ॐ ||

१९ अगस्त २०१७

अपने लक्ष्य परमात्मा को सदा सामने रखो.....

अपने लक्ष्य परमात्मा को सदा सामने रखो
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जब भी भगवान की याद आये वह क्षण सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है|
जिस समय दोनों नासिकाओं से साँस चल रही हो वह ध्यान करने का सर्वश्रेष्ठ समय है|

कोई कुछ भी कहे, कितना भी बुरा-भला कहे, चाहे कितने भी अच्छे-बुरे सुझाव दे, उस पर ध्यान मत दो | ध्यान दो सिर्फ अपने हृदयस्थ परमात्मा से मिल रही प्रेरणा पर | संसार क्या सोचता है, क्या कहता है, इसका कोई महत्त्व नहीं है | महत्त्व सिर्फ एक ही बात का है कि हम परमात्मा की दृष्टी में क्या हैं |

अपने लक्ष्य परमात्मा को सदा सामने रखो और इधर-उधर किधर भी ध्यान मत दो |


ॐ तत्सत् | ॐ ॐ ॐ ||



१८ अगस्त २०१७

जिज्ञासु होकर रुकना नहीं चाहिए ......

जिज्ञासु होकर रुकना नहीं चाहिए ......
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जिज्ञासु होकर रुकना नहीं चाहिए , प्रयत्न पूर्वक साधना करते रहना चाहिए | मन लगे या न लगे अपना साधन नहीं छोड़ना चाहिए | अगर दिन में तीन घंटे नाम जप या ध्यान करना है तो करना ही है | उसे छोड़ने का कोई बहाना नहीं होना चाहिए | मन नहीं लगे तो भी बैठे रहो, पर साधन छूटना नहीं चाहिए | मार्ग में बाधाएँ तो बहुत आती हैं, असुर ही नहीं, देवता भी नहीं चाहते कि किसी साधक की साधना सफल हो, वे भी मार्ग में बाधाएँ उत्पन्न करते रहते हैं | इस मार्ग में सिर्फ सद् गुरु की कृपा ही काम आती है | गुरु चूंकि परमात्मा के साथ एक हैं, और उनसे बड़ा हितकारी अन्य कोई नहीं है, अतः उन्हीं की कृपा साधक की रक्षा करती है |
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पुण्य से उत्तम गति प्राप्त होती है पर जन्म-मरण से छुटकारा नहीं मिलता | जन्म-मरण का कारण कामनाएँ हैं जिनसे मुक्ति गहन ध्यान साधना से ही मिलती है | मेरी दृष्टी में अन्य कोई उपाय नहीं है | गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है .....

तपस्विभ्योऽधिको योगी ज्ञानिभ्योऽपि मतोऽधिः |
कर्मिभ्यश्चाधिको योगी तस्माद्योगी भवार्जुन ||
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सूक्ष्म प्राणायाम द्वारा पाप नष्ट होते हैं | इनकी विधि सिद्ध गुरु ही शिष्य को बता सकता है | ये सूक्ष्म प्राणायाम ही प्रत्याहार कहलाते हैं | सदगुरु की कृपा से कहीं कोई अन्धकार नहीं रहता | गुरु सेवा का अर्थ है गुरु प्रदत्त साधना का अनवरत नियमित अभ्यास | जिन परमात्मा का ध्यान करना है, उनका आभास भी गुरु कृपा से ही होता है |
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सभी को शुभ कामनाएँ और नमन ! ॐ तत्सत् | ॐ ॐ ॐ ||
१८ अगस्त २०१७