Wednesday, 8 July 2026

क्या घर पर शिवलिंग की पूजा की जा सकती है?

क्या घर पर शिवलिंग की पूजा की जा सकती है?
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मनीषियों से सादर प्रार्थना है कि शास्त्रों के प्रमाण सहित उत्तर दें| विशेष प्रार्थना है कि बिना शास्त्रीय प्रमाण के कोई उत्तर न दें| धन्यवाद| ॐ नमः शिवाय !!
पुनश्च: :---
हमारे घर पर एक वाणलिंग (नर्मदा के धावड़ी कुंड से प्राप्त) है जो किसी सत्संगी मित्र ने भेंट में दिया था| उस पर दोनों ओर शिव जी ने जैसे कंधे पर जनेऊ पहिन रखी हो, उस तरह के गहरे सफ़ेद शक्ति के चिह्न विपरीत दिशाओं में हैं जिन्हें तांत्रिक लोग योनि का प्रतीक कहते हैं| उस शिवलिंग की लंबाई लगभग दो-ढाई इंच है| उस की हमारे घर पर नित्य पूजा होती है|
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एक बार गुजरात में नर्मदा नदी में स्नान करते समय भगवान शिव का ध्यान कर के डुबकी लगाई तो अपने आप ही हाथ में तीन छोटे-छोटे एक ही आकार के शिवलिंग आ गये| उनमें से एक गहरे काले रंग का, एक सफ़ेद रंग का, और एक हल्के लाल रंग का है| उन्हें भगवान शिव का प्रसाद मान कर पूजा कक्ष में वाण लिंग के पास में ही रखा है| एक बार तो ऐसे लगा मानो वे भगवती महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती हैं| जो भी हैं वे भगवान शिव के प्रसाद हैं| उन के बिना रहने की कल्पना भी नहीं कर सकते|
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ध्यान में भी कई बार विभिन्न चक्रों पर शिवलिंग के दर्शन होते हैं| यह शरीर भी एक घर ही है| क्या सूक्ष्म देह में शिवलिंगों के दर्शन वर्जित है?
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पुनश्च :--- ओंकारेश्वर के पास में एक स्थान है जिसे धावड़ी कुंड कहते हैं| वह कभी बाणासुर नाम के परम शिवभक्त राक्षस का यज्ञकुंड था| कालांतर में उस यज्ञकुंड में से नर्मदा नदी बहने लगी| भगवान शिव के वरदान से धावड़ी कुंड से प्राप्त शिवलिंग बाणलिंग कहलाते हैं और सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं| अब तो वहाँ एक बांध बन गया है जिस से वह कुंड डूब गया है| पर गर्मियों में जब पानी कम होता है, तब वहाँ जाकर माँ नर्मदा से प्रार्थना करने पर साधक के अनुकूल शिवलिंग स्वतः ही वरदान के रूप में हाथ में आ जाता है|
पुनश्च :--- बाणलिंग की यही पहिचान है कि जितनी बार चावल से तौलोगे, हर बार परिमाण अलग-अलग होगा| ८ जुलाई २०२०

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