Thursday, 9 July 2026

भवसागर क्या है? ---

 भवसागर क्या है? ---

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भगवान से कभी भवसागर से पार उतारने की प्रार्थना किया करता था। फिर पाया कि हमारे मन की चंचलता ही भवसागर है। मन की चंचलता समाप्त होकर भगवान में स्थिर हो जाये, यही भवसागर को पार करना है।
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भगवान सर्वत्र व्याप्त हैं। वे स्वयं ही यह सम्पूर्ण सृष्टि हैं। सम्पूर्ण अस्तित्व वे स्वयं हैं। उनकी अवर्णनीय उपस्थिति का आभास परमप्रेम और आनंद के के रूप में होता है। वे सब तरह के नाम-रूपों से परे हैं, उन्हें सीमित नहीं किया जा सकता। सारे नाम और रूप उन्हीं के हैं। वे स्वयं ही यह मैं बन गए हैं।
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ॐ तत्सत् !! ॐ स्वस्ति !! ॐ नमो भगवते वासुदेवाय !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
९ जुलाई २०२३

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