Tuesday, 5 December 2017

विश्व सुन्दरी प्रतियोगिता का सच ......

विश्व सुन्दरी प्रतियोगिता का सच ......
----------------------------------
मेरा किसी से कोई द्वेष या दुर्भावना नहीं है, जो भी लिख रहा हूँ वह निष्पक्ष है| अतः बिना पूरा लेख पढ़े, कोई अति उत्साही भड़के नहीं और मुझे गालियाँ देना आरम्भ न करे|
.
विश्व सुन्दरी प्रतियोगिता आयोजित करवाने वाले संगठन उन व्यापारियों के समूह हैं जो सौंदर्य उत्पादन बेचते हैं| जो संगठन इसकी तैयारी करवाते हैं वे भी सौंदर्य उत्पादनों के व्यापारी है|
.
ऐसी प्रतियोगिताओं का एकमात्र उद्देश्य अपने सौंदर्य उत्पादनों का विक्रय बढ़ाना है| यह एक मार्केटिंग टेक्निक मात्र है| पहले तो ये सुन्दर महिलाओं की देह दिखा कर विज्ञापनों से पैसा कमाते हैं| फिर जो सुन्दरी चुनी जाती है उसे एक वर्ष तक उनकी हर शर्त मानने को बाध्य होना पड़ता है और बिना कोई अतिरिक्त पैसे लिए विज्ञापनों का मॉडल बनना पड़ता है| एक वर्ष बाद उसे कोई नहीं पूछता| हाँ, फिल्मों में अभिनय आदि करने या मॉडलिंग के अवसर अवश्य मिल जाते हैं| यह कोई नारी सशक्तिकरण का कार्यक्रम नहीं है|
.
जब विदेशी सौंदर्य उत्पादनों की माँग भारत में घट जाती है तब भारत की किसी सुन्दरी को विश्व सुन्दरी चुन लिया जाता है| यह सिर्फ एक मार्केटिंग है|
.
विश्व सुन्दरी प्रतियोगिता सुन्दर महिलाओं की नग्न प्राय देह का व्यवसायिक लाभ के लिए किया जाने वाला प्रदर्शन मात्र है| इंच और सेन्टीमीटर में जांघें और नितंब नापे जाते हैं, स्तन सुडौल हैं कि नहीं, होठ मानकों पर खरे उतरते हैं कि नहीं, यह देखा जाता है| फिर आखिर में सुंदरी से रटी रटाई मानवता की बातें पूछी जाती हैं, और विजेता घोषित होने पर उसे रोने का अभिनय करना पड़ता है|
.
सौंदर्य उत्पादनों के बाजार की शक्तियाँ अपनी आवश्यकतानुसार इस तरह की प्रतियोगिताएँ करवाती हैं| इसमें कोई उत्साहित होने की आवश्यकता नहीं है| धन्यवाद|

प्रमाद ही मृत्यु है .....

प्रमाद ही मृत्यु है .....
.
भक्तिसूत्रों के आचार्य देवर्षि नारद के गुरु भगवान सनत्कुमार ब्रह्मविद्या के प्रथम आचार्य हैं | उन्होंने अपने प्रिय शिष्य देवर्षि नारद को सर्वप्रथम ब्रह्मविद्या का उपदेश दिया था | ब्रह्मा जी के ध्यान के परिणामस्वरूप साक्षात् श्री हरि ने ही इन चारों सनक, सनंदन, सनातन, और सनत्कुमार के रूप में अवतार लिया था | शरीर से ये पाँच वर्ष की आयु वाले लगते थे तथा सर्वदा पाँच वर्ष की आयु के देह में ही रहे, अभी भी ये पाँच वर्ष की आयु के ही लगते हैं | समय समय पर हर युग में ये प्रकट हुए हैं |
.
भगवान सनत्कुमार ने अपने उपदेशों में मृत्यु के अस्तित्व को नकार दिया है | महाभारत काल में महात्मा विदुर की प्रार्थना मान कर ये प्रकट हुए और धृतराष्ट्र को भी उपदेश दिए जो सनत्सुजातीय ग्रन्थ में उपलब्ध हैं | उन का कथन था .. "प्रमादो वै मृत्युमहं ब्रवीमि", अर्थात् प्रमाद ही मृत्यु है | अपने "अच्युत स्वरूप" को भूलकर "च्युत" हो जाना ही प्रमाद है और इसी का नाम "मृत्यु" है | जहाँ अपने अच्युत भाव से च्युत हुए, बस वहीँ मृत्यु है |

भगवान सनत्कुमार की जय हो | ॐ नमो भगवते सनत्कुमाराय |
.
दुर्गा सप्तशती में 'महिषासुर' --- प्रमाद --- यानि आलस्य रूपी तमोगुण का ही प्रतीक है | आलस्य यानि प्रमाद को समर्पित होने का अर्थ है -- 'महिषासुर' को अपनी सत्ता सौंपना |
.
तैत्तिरीयोपनिषद् भी प्रमाद से बचने का उपदेश देता है ......
धर्मं चर स्वाध्यायात् मा प्रमदः आचार्याय प्रियं धनम् आहृत्य प्रजा - तन्तुं मा व्यवच्छेत्सीः सत्यात् न प्रमदितव्यम् धर्मात् न प्रमदितव्यम्। कुशलात् न प्रमदितव्यम् भूत्यै न प्रमदितव्यम् स्वाधायप्रवचनाभ्यां न प्रमदितव्यम् |
.
हे भगवन आपकी जय हो | सभी का कल्याण करो | हमें धर्म, स्वाध्याय, और सत्य के पालन में कभी प्रमाद न हो | हम अपने अच्युत स्वरुप में रहें, कभी च्युत न हों |
.
ओम् सह नाववतु सह नौ भुनक्तु सह वीर्यं करवावहै |
तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ||"
ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभि र्व्यशेम देवहितं यदायुः ||
स्वस्ति न इन्द्रो वॄद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः |
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ||
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते |
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ||
ॐ शान्ति शान्ति शान्ति |

कृपा शंकर
१९ नवम्बर २०१७

मैं सिर्फ भारतीय मूल की देसी गायों को ही गौमाता मानता हूँ ....

गौ वंश की रक्षा ......

मैं सिर्फ भारतीय मूल की देसी गायों को ही गौमाता मानता हूँ |

विदेशी नस्ल की विलायती गायें जिन्हें सूअर के जीन के साथ मिलाकर विकसित किया गया है, गौमाता नहीं हो सकतीं | इन विलायती गायों के बछड़े किसी काम के नहीं होते | इन्होने किसानों को दुखी कर रखा है |
मेरा सुझाव है कि विलायती गायों को गौ रक्षण क़ानून से बाहर रखा जाए | गौ रक्षण सिर्फ देसी गायों का ही हो |

ॐ ॐ ॐ !!

मुझे मोक्ष या मुक्ति नहीं चाहिए ....

मुझे ऐसा कोई मोक्ष या ऐसी कोई मुक्ति नहीं चाहिए जैसी सांसारिक लोगों की अवधारणा है| मुझे परमात्मा का कार्य करने के लिए बार बार पुनर्जन्म और लाख गुणा अधिक उत्साह और अखंड ऊर्जा चाहिए|

भगवान परमशिव से प्रार्थना है कि मेरा अगला जन्म ऐसे माँ-बाप के यहाँ हो जो वेदों के पूर्ण मर्मज्ञ हों, जिनसे मैं वेदों का पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर सकूँ| जन्म भी ऐसी प्रज्ञा और बौद्धिक प्रतिभा के साथ हो जो वेदों की समाधि भाषा को समझने में समर्थ हो|

प्रारब्धवश इस जन्म में तो बुद्धि में इतना कूड़ा-कचरा बैठा है कि मैं उपनिषदों की भाषा भी समझ नहीं पा रहा हूँ, यह मेरा दुर्भाग्य है|

पर इस जन्म में भी मरते दम तक ध्यान साधना व स्वाध्याय तो चलता ही रहेगा| आत्मा नित्य मुक्त है| मैं भी नित्य मुक्त था, नित्य मुक्त हूँ, और नित्य मुक्त रहूँगा| बुद्धि पर एक कोहरा सा छाया हुआ है जो निश्चित रूप से शीघ्र ही दूर होगा|

मैं निश्चित रूप से परमात्मा के साथ एक हूँ और सदा एक रहूँगा| उनका प्रेम मेरा प्रेम है, और उनकी पूर्णता ही मेरी पूर्णता है|

ॐ तत्सत् | ॐ ॐ ॐ !!

Saturday, 18 November 2017

नेहरु थे भारत में पहली बूथ कैप्च्युरिंग के मास्टर माइंड ......

(जिन राजनेताओं को हम महान समझते हैं, आवश्यक नहीं है कि वे सचमुच महान होते हैं)
 .
नेहरु थे भारत में पहली बूथ कैप्च्युरिंग के मास्टर माइंड ......
-----------------------------------------------------------
जवाहर लाल नेहरू ने देश में हुए प्रथम आम चुनाव में उत्तर प्रदेश की रामपुर सीट से पराजित घोषित हो चुके कांग्रेसी प्रत्याशी मौलाना अबुल कलाम 'आजाद' को किसी भी कीमत पर जबरदस्ती जिताने के लिए आदेश दिये थे | उनके आदेश पर उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री पं गोविन्द वल्लभ पन्त ने रामपुर के जिलाधिकारी पर घोषित हो चुके परिणाम बदलने का दबाव डाला, और इस दबाव के कारण प्रशासन ने जीते हुए प्रत्याशी विशन चन्द्र सेठ की मतपेटी के वोट मौलाना अबुल कलाम 'आज़ाद' की पेटी में डलवा कर दुबारा मतगणना करवा कर मौलाना अबुल कलाम 'आज़ाद' को जिता दिया |
.
यह रहस्योदघाटन उत्तर प्रदेश के तात्कालीन सुचना निदेशक शम्भुनाथ टंडन ने अपने एक लेख मे किया है |
उन्होंने अपने लेख "जब विशन सेठ ने मौलाना आजाद को धुल चटाई थी भारतीय इतिहास की एक अनजान घटना" में लिखा है की भारत मे नेहरु ही बूथ कैप्चरिंग के पहले मास्टर माइंड थे | उस ज़माने में भी बूथ पर कब्जा करके परिणाम बदल दिये जाते थे और देश के प्रथम आम चुनाव मे सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही कांग्रेस के 12 हारे हुए प्रत्याशियों को जिताया गया | देश के बटवारे के बाद लोगो मे कांग्रेस और खासकर नेहरु के प्रति बहुत गुस्सा था लेकिन चूँकि नेहरु के हाथ मे अंतरिम सरकार की कमान थी इसलिए नेहरु ने पूरी सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करके जीत हासिल थी |
.
देश के बटवारे के लिए हिंदू महासभा ने नेहरु और गाँधी की तुष्टीकरण की नीति को जिम्मेदार मानते हुए देश मे उस समय जबरजस्त आन्दोलन चलाया था और लोगो मे नेहरु के प्रति बहुत गुस्सा था, इसलिए हिंदू महासभा ने कांग्रेस के दिग्गज नेताओ के विरुद्ध हिंदू महासभा के दिग्गज लोगो को खड़ा करने का निश्चय किया था | इसीलिए नेहरु के विरुद्ध फूलपुर से संत प्रभुदत्त ब्रम्हचारी और मौलाना अबुल के विरुद्ध रामपुर से भईया विशन चन्द्र सेठ को लडाया गया | नेहरु को भी अंतिम राउंड मे जबरजस्ती 2000 वोट से जिताया गया | वही सेठ विशन चन्द्र के पक्ष मे भारी मतदान हुआ और मतगणना के पश्चात प्रशासन ने बकायदा लाउडस्पीकरों से सेठ विशन चंद को 10000 वोट से विजयी घोषित कर दिया | और फिर रामपुर मे हिंदू महासभा के लोगो ने विशाल विजयी जुलुस भी निकाला |
 .
फिर जैसे ही ये समाचार वायरलेस से लखनऊ फिर दिल्ली पहुची तो मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की अप्रत्याशित हार के समाचार से नेहरु तिलमिला और तमतमा उठे। उन्होंने तुरंत उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री पं गोविन्द वल्लभ पन्त को चेतावनी भरा संदेश दिया की मै मौलाना की हार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नही कर सकता, अगर मौलाना को जबरजस्ती नही जिताया गया तो आप अपना इस्तीफा शाम तक दे दीजिए |
.
फिर पन्त जी ने आनन फानन मे सुचना निदेशक (जो इस लेख के लेखक है) शम्भू नाथ टंडन को बुलाया और उन्हें रामपुर के जिलाधिकारी से सम्पर्क करके किसी भी कीमत पर मौलाना अबुल को जिताने का आदेश दिया. . फिर जब शम्भु नाथ जी के कहा की सर इससे दंगे भी भडक सकते है तो इस पर पन्त जी ने कहा की देश जाये भाड़ मे नेहरु जी का हुकम है | फिर रामपुर के जिलाधिकारी को वायरलेस पर मौलाना अबुल को जिताने के आदेश दे दिये गए | फिर रामपुर के सीटी कोतवाल ने सेठ विशनचन्द्र के पास गया और कहा कि आपको जिलाधिकारी साहब बुला रहे है जबकि वो लोगो की बधाईयाँ स्वीकार कर रहे थे | और जैसे ही जिलाधिकारी ने उनसे कहा कि मतगणना दुबारा होगी तो सेठ विशन चन्द्र ने इसका कड़ा विरोध किया और कहा कि मेरे सभी कार्यकर्ता जुलुस में गए है ऐसे मे आप बिना मतगणना एजेंट के दुबारा कैसे मतगणना कर सकते है ? लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गयी और जिलाधिकारी के साफ साफ कहा कि सेठ जी हम अपनी नौकरी बचाने के लिए आपकी बलि ले रहे है क्योंकि ये नेहरु का आदेश है |
.
शम्भु नाथ टंडन जी ने आगे लिखा है कि चूँकि उन दिनों प्रत्याशियो के नामो की अलग अलग पेटियां हुआ करती थी और मतपत्र पर बिना कोई निशान लगाये अलग अलग पेटियों मे डाले जाते थे इसलिए ये बहुत आसान था कि एक प्रत्याशी के वोट दूसरे की पेटी मे मिला दिये जाये | देश मे हुए प्रथम आमचुनाव की इसी खामी का फायदा उठाकर अय्याश नेहरु इस देश की सत्ता पर काबिज हुआ था और उस नेहरु ने इस देश मे जो भ्रष्टाचार के बीज बोये थे वह आज उसके खानदान के "काबिल" वारिसों के अच्छी तरह देखभाल करने की वजह के एक वटवृक्ष बन चूका है |
.
लेखक :- शम्भू नाथ टंडन (तत्कालीन सूचना निदेशक)
साभार :- गाँधी और नेहरू : हिंदुस्तान का दुर्भाग्य
.
गगन शर्मा भारतीय
Owner
नरेंद्र दामोदर दास मोदी
Nov 14, 2015
(उपरोक्त लेख Google+ पर १४ नवम्बर २०१५ को श्री गगन शर्मा भारतीय द्वारा "नरेंद्र दामोदर दास मोदी" नाम के पेज पर छापा था, जहाँ से साभार कॉपी/पेस्ट किया गया है| धन्यवाद)

यहाँ और अभी .....

यहाँ और अभी .....

इसी समय भगवान हमारे साथ है जिन्हें देखने के लिए कुछ तो दूरी होनी चाहिए पर कोई दूरी है ही नहीं| वह कहीं दूर नहीं है| वह तो निकटतम से भी निकट है|

क्या आँखें अपने भीतर झाँक कर देख सकती हैं कि वहाँ भीतर से कौन देख रहा है?
क्या हृदय अनुभूत कर सकता है कि उसके भीतर कौन धड़क रहा है?
कौन तो यह साँसें ले रहा है? कौन यह सोच रहा है?

एकमात्र अस्तित्व उसी का है| वही मेरा उपास्य है| वह मुझ से पृथक नहीं है| वही मैं हूँ|

ॐ ॐ ॐ !!


१७ नवम्बर २०१७

यदि भगवान में श्रद्धा और विश्वास है तो भयभीत होने का कोई कारण नहीं है ....


यदि भगवान में श्रद्धा और विश्वास है तो भयभीत होने का कोई कारण नहीं है | हमारे किसी भी शास्त्र में भयभीत होने की शिक्षा नहीं दी गयी है | यह एक विजातीय प्रभाव है |  निर्भीकता की जितनी अच्छी शिक्षा गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने दी है, उतनी कहीं भी किसी भी अन्य धर्मग्रंथ में नहीं है |  डरना ही है तो अपने बुरे कर्मफलों से डरो, अन्य किसी भी वस्तु से नहीं |
.
एक सच्चे हिन्दू को कभी भी नहीं डरना चाहिए| भगवान ने हमारी ही रक्षा के लिए अस्त्र धारण कर रखे हैं| उन शस्त्रधारी भगवान को ह्रदय में रखकर असत्य व अन्धकार की शक्तियों का निरंतर प्रतिकार करो, और अपने पथ पर अडिग रहो|
 .
 जीवन में विषमताओं को स्वीकार करो | ये सब विषमताएँ हमारे विगत के विचारों का ही घनीभूत रूप हैं जो हमारे समक्ष प्रकट हो रहे हैं | ये हमारी ही सृष्टि हैं |
.
सत्य का प्रमाण स्वयं की ही अनुभूति है | उन सब विचारधाराओं से दूर रहो जो दूसरों से घृणा करना सिखाती हैं, जो अपने से पृथक विचार वालों की ह्त्या करना सिखाती है, जो आत्महीनता का बोध कराती हैं, जो यह सिखाती हैं कि तुम जन्म से पापी हो, या फिर असहमति होने पर हमें भयभीत करती हैं | परमात्मा प्रेम का विषय है, भय का नहीं | जो सीख हमें भयभीत होना सिखाती है वह धार्मिक नहीं हो सकती |

१७ नवम्बर २०१७