हठयोग पर जो भी उपलब्ध साहित्य है उसमें सबसे मुख्य "घेरण्ड संहिता" है| इस पर प्रामाणिक और सबसे अच्छा ज्ञान "बिहार स्कूल ऑफ योगा" मुंगेर (बिहार) के आचार्य स्वामी निरंजनानन्द ने दिया है| उन्होने घेरण्ड संहिता पर भाष्य और अन्य अनेक प्रामाणिक पुस्तकें लिखी हैं| उनके सन्यासी व अन्य शिष्य हठयोग का प्रामाणिक ज्ञान पूरे विश्व में दे रहे हैं| घेरण्ड मुनि का समय विवादास्पद है| अंग्रेज़ इतिहासकार उन्हें १७वीं शताब्दी का बताते हैं जो अविश्वसनीय है| घेरण्ड संहिता में सात अध्याय हैं जो निम्न विषयों पर प्रकाश डालते हैं .... षट्कर्म, आसन, मुद्रा, प्रत्याहार, प्राणायाम, ध्यान, और समाधि|
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भारत के एक विश्वविख्यात योगाचार्य योग के नाम पर जो भी आसन, प्राणायाम आदि जो कुछ भी सिखा रहे हैं वह घेरण्ड संहिता का ज्ञान है, जिसका श्रेय वे पातंजलि ऋषि को दे रहे हैं| यह असत्य का प्रचार है|
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इसके अतिरिक्त दो और प्रामाणिक ग्रंथ हैं .... 'शिव संहिता" और "हठयोग प्रदीपिका"| ये दोनों ग्रंथ "घेरण्ड संहिता" से भी अधिक प्राचीन हैं| ये दोनों ग्रंथ नाथ संप्रदाय के मुख्य ग्रन्थों में आते हैं| इनमें भी हठयोग का पूरा ज्ञान है| इन ग्रन्थों के आचार्य स्वयं गुरु गोरखनाथ हैं| शिवसंहिता की रचना उनके गुरु मत्स्येंद्रनाथ की है और हठयोगप्रदीपिका की रचना उनके शिष्य स्वात्मारामनाथ की है।
16 जून 2020
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