Monday, 29 June 2026

भगवान का कोई भरोसा नहीं है, उनकी पकड़ बड़ी मजबूत है ---

 भगवान का कोई भरोसा नहीं है। उनकी पकड़ बड़ी मजबूत है। कभी भी किसी भी समय अचानक हमें पकड़ लेते हैं। उनकी पकड़ से बचना असंभव है। अच्छा है वे स्वयं ही पकड़ते हैं, कोई अन्य नहीं। बुरा तो तब लगता है जब वे छोड़ कर चले जाते हैं, और मिलते नहीं हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि उनका भी मन हमारे बिना लगता नहीं है। थोड़ी देर बाद फिर बापस आ जाते हैं। अब से प्रयास यही करेंगे कि वे कहीं जाये नहीं।

पुनश्च: (बाद में जोड़ा हुआ) --
भगवान की माया हमें "आवरण" और "विक्षेप" के रूप में भ्रमित करती है। भगवान की माया वहीं काम करती है, जहां तमोगुण होता है। थोड़ा सा भी तमोगुण हमारे भीतर है तो "विक्षेप" वहाँ आए बिना नहीं रहता। भगवान त्रिगुणातीत हैं, अतः उनके ध्यान और उपासना से ही उनकी कृपा होती है। उनकी कृपा जहाँ होती है वहाँ उनकी माया का प्रभाव नहीं होता।
जीवन का प्रथम उद्देश्य/लक्ष्य भगवत् प्राप्ति है। सर्वप्रथम भगवान को उपलब्ध हों, फिर उस चेतना में अपने लौकिक कार्य करते हुए संसार में विचरण करें।
🕉🕉🕉 ॐ तत्सत् !!

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