Saturday, 29 March 2025
"किसी भी परिस्थिति में हमें यज्ञ, दान व तप रूपी कर्मों को (यानि भक्ति व साधना को) नहीं छोडना चाहिए।"
पप्पी दुश्चरित्र पुराण !
पप्पी दुश्चरित्र पुराण !
हे चित्तचोर, तुम्हारी जय हो ---
भगवान श्रीहरिः जब तक हमारा चित्त न चुराएँ, तब तक कोई भी आध्यात्मिक साधना सफल नहीं हो सकती| वे हमारा चित्त ही नहीं, पूरा अंतःकरण ही चुराएँ, तभी हम सफल हो सकते हैं| जो सफल हुए हैं उनका रहस्य उनसे पूछिये| पहिले उनका मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार ..... चोरी हुआ, तभी वे सफल हुए| आध्यात्म में खुद के प्रयासों से कभी सफलता नहीं मिलती| माँ भगवती स्वयं ही हृदय में आकर भक्ति करे तभी हम सफल हो सकते हैं|
Friday, 28 March 2025
आज नहीं तो कल, कभी तो उनकी कृपा होगी ही, हम सदा अंधकार में नहीं रह सकते ---
आज नहीं तो कल, कभी तो उनकी कृपा होगी ही| हम सदा अंधकार में नहीं रह सकते| हमारी उच्च प्रकृति में परमात्मा के सिवाय अन्य कुछ भी नहीं है| लेकिन निम्न प्रकृति दलदल में है| कोई भी माता हो अपनी संतान को संकट में नहीं देख सकती| जगन्माता जिसने इस सारे ब्रह्मांड को धारण कर रखा है, वह कभी निष्ठुर नहीं हो सकती| इस दलदल से मुझे विरक्त और मुक्त तो उन्हें करना ही होगा|
हमारी रक्षा धर्म ही करेगा, लेकिन तभी करेगा -- जब हम धर्म की रक्षा करेंगे ---
२९ मार्च २०२१
पशुपतिनाथ भगवान शिव से प्रार्थना :---
पशुपतिनाथ भगवान शिव से प्रार्थना :---
मन लगे या न लगे, चाहे यंत्र की तरह ही करनी पड़े, किसी भी परिस्थिति में ईश्वर की साधना हमें नहीं छोड़नी चाहिए ---
२९ मार्च २०२३