आध्यात्मिक दृष्टि से मैं सभी के साथ एक हूँ| सारी सृष्टि मेरा हृदय है जिसका केंद्र सर्वत्र है और परिधि कहीं भी नहीं|
मेरा एक ही मित्र है जो सर्वत्र और शाश्वत है| इस जन्म से पूर्व भी वह मेरे साथ था, मृत्यु के उपरांत भी मेरे साथ रहेगा, और अभी भी मेरे साथ है| उस शाश्वत मित्र से पूर्ण संतुष्टि है, और कुछ भी नहीं चाहिए| जो उस मित्र से प्रेम करते हैं, दिन-रात उस का चिंतन करते हैं, वे स्वभाविक रूप से मेरे मित्र हैं|
सांसारिकता में मैं आजकल न तो कहीं आता-जाता हूँ, और न किसी से मिलता हूँ| मेरा संपर्क बाहरी विश्व से नहीं के बराबर है| बाहरी संपर्क और बढ़ाने की कोई कामना भी नहीं है| मैं पूर्णतः प्रसन्न, संतुष्ट, तृप्त और सुखी हूँ|
सभी को मेरी शुभ कामनाएँ, प्यार और नमन !!
१२ जुलाई २०२०
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