Saturday, 11 July 2026

तेरे फूलों से भी प्यार, तेरे काँटों से भी प्यार

भगवान से उनके प्रेम से अतिरिक्त अन्य कुछ भी मांगना भगवान का अपमान है। यह नकारात्मक बात दिमाग से निकाल दीजिये कि कोई मुझे आशीर्वाद दे और परिस्थितियाँ मेरे अनुकूल रहें। यह एक सूक्ष्म लोभ और अहंकार मात्र है, जिनसे मुक्त हुए बिना कोई भी आध्यात्मिक सफलता नहीं मिलती। आध्यात्मिक सफलता मिलती है सिर्फ समर्पण से।

तेरे फूलों से भी प्यार, तेरे काँटों से भी प्यार
चाहे खुशी भरा संसार, चाहे आँसूओं की धार
जो तू देना चाहे दे दे कर्तार, दुनिया के पालनहार
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अपनी आस्था को विचलित न होने दें, परमात्मा का अधिक से अधिक ध्यान करें।
असत्य और अज्ञान की अंधकारमय शक्तियों का नाश निश्चित है। निरंतर प्रभु की चेतना में स्थिर रहें, यह बोध रखें कि हमारी आभा और स्पंदन पूरी सृष्टि और सभी प्राणियों की सामूहिक चेतना में व्याप्त हैं, और सब का कल्याण कर रहे हैं। प्रभु की सर्वव्यापकता हमारी ही सर्वव्यापकता है, सभी प्राणियों और सृष्टि के साथ हम एक हैं। हमारा प्रेम पूरी सृष्टि का कल्याण कर रहा है। हम और हमारे प्रभु एक हैं।
ॐ तत्सत् ! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
११ जुलाई २०२४

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