Thursday, 1 May 2025

रात्रि को सोने से पूर्व भगवान का ध्यान कर के सोयें ---

 रात्रि को सोने से पूर्व भगवान का ध्यान कर के सोयेंगे, तो अगले दिन प्रातःकाल आपकी नींद भगवान की गोद में ही खुलेगी।

आप स्वयं को धन्य मानेंगे कि भगवान स्वयं ही आपको याद कर लेते हैं। यदि यही दिनचर्या बनी रहेगी तो मृत्यु के समय भी आप स्वयं को भगवान की गोद में ही पायेंगे।
समष्टि की सबसे बड़ी सेवा है --- परमात्मा का निरंतर स्मरण !! रात्रि को सोने से पहिले और प्रातःकाल उठते ही परमात्मा का यथासंभव गहरे से गहरा ध्यान करें। परमात्मा एक प्रवाह हैं, जिन्हें स्वयं के माध्यम से प्रवाहित होने दें। वे एक रस हैं, जिन का रसास्वादन निरंतर करते रहें। अपने हृदय का पूर्ण प्रेम और स्वयं को भी उन्हें समर्पित कर दें।
ॐ तत्सत् !! ॐ स्वस्ति !! 🌹🙏🕉🕉🕉🙏🌹
कृपा शंकर
१ मई २०२१ .
पुनश्च: ---
निरंजन माला घट मे फिरे दिन रात
उपर आवे निचे जावे,स्वास स्वास चली जाय।
संसारी नर समझे नही रे,वृथा जन्म गमाय॥१॥
सोहंम मन्त्र जपे नित प्राणी,बिन जिव्हा बिन दाँत।
अष्ट पहर मे सोवत जागत,कबहु न पलक सकात॥२॥
सोहम हंसा हंसा सोहम बार बार उलटाय।
सतगुरु पुरा भेद बतावे,निश्चय मन ठहरात॥३॥
जो जोगी जन ध्यान लगावे,उठ सदा प्रभात।
ब्रह्मानंद परम पद पावे,बहुरी जन्म नही आय॥૪॥

1 comment:

  1. . धन्य हैं वे सब प्राणी जो परमात्मा से प्रेम करते हैं, जो उसमें तन्मय होकर उसी में लीन हैं, जिनमें अहंकार का स्थान भगवद्कृपा से भरा हुआ है, हृदय में स्वार्थ का लेशमात्र भी स्थान नहीं है, जिनकी वासनाओं का पूर्ण नाश हो चुका है, और ह्रदय में इच्छाओं के लिए कोई स्थान ही नहीं है| ऐसे प्राणी स्वयं धरती पर चलते फिरते देवता हैं| उनका शरीर ही भगवान का सच्चा मंदिर है| वे इस बात से अनभिज्ञ हैं कि कौन उनको क्या कहता है| जिस स्थान पर ऐसी आत्माएँ निवास करती हैं वह स्थान तीर्थ बन जाता है| अपनी दिव्यता के परम क्षेत्र में पहुँच कर वे जो भी करते हैं वही सुकर्म हो जाता है| वे समस्त जगत के कल्याण के लिए शुभ और परमानंद देने वाले हैं| उन्हें देखकर पित्तर आनंदित होते हैं, देवता भी आनन्दोन्मत्त होकर उनके सम्मुख नृत्य करने लगते है, और यह पृथ्वी सनाथ हो उठती है| धन्य है वह कुल, वह परिवार वह देश जहाँ ऐसी महान आत्माएँ जन्म लेती हैं|

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