Wednesday, 1 July 2026

भगवान अपनी साधना स्वयं करते हैं। हम एक साक्षीमात्र हो सकते हैं, कोई साधक नहीं।

 भगवान अपनी साधना स्वयं करते हैं। हम एक साक्षीमात्र हो सकते हैं, कोई साधक नहीं। हम बहुत अधिक भाग्यशाली हैं कि भगवान ने हमें अपनी साधना का साक्षी बनाया है। पूरी सृष्टि के रूप में भगवान स्वयं अपनी साधना कर रहे हैं।

गुरु और शिष्य दोनो में कोई भेद नहीं है। दोनों के रूप में भगवान स्वयं को व्यक्त कर रहे हैं। हमारा -विवेक, पाप-पुण्य, धर्म-अधर्म सब -- परमशिव का स्वप्न है। परमशिव ही एकमात्र सत्य हैं।

जितना जो भी किसी के समझ में आ गया है, वह परमात्मा को पाने के लिए पर्याप्त है। नियमित उपासना किसी भी परिस्थिति में नहीं छोड़नी चाहिए। नियमित उपासना नहीं करने से भगवान को पाने की अभीप्सा (अतृप्त प्यास और तड़प) और भक्ति (परमप्रेम) समाप्त हो जाती है।

मैं गुरु और शिष्य दोनों को प्रणाम करता हूँ।
ॐ ॐ ॐ !

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