यह लेख उनके लिए है जो भगवान की भक्ति तो करना चाहते हैं, लेकिन साहस नहीं जुटा पा रहे ---
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वे भगवान श्रीराम का नित्य नियमित नामजप और ध्यान करें। आध्यात्मिक साधना के मार्ग में सबसे बड़ी कमजोरी --- हमारे में साहस का अभाव है, जरा जरा सी विपरीतताओं से हम घबरा जाते हैं। अन्य कोई समस्या नहीं है। साहस के अभाव में हम कोई निर्णय नहीं ले पाते। निर्भीक बनने के लिए हमें भगवान श्रीराम या श्रीकृष्ण का ध्यान करना चाहिए। स्वयं निमित्त मात्र होकर उन्हें जीवन का कर्ता बनायें।
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अंधकार में रहते रहते हमें अंधेरे में रहने की बहुत बुरी आदत पड़ गई है। हमें पता है कि हमारी सब समस्याओं का निदान परमात्मा के प्रकाश यानि भगवत्-प्राप्ति (आत्म-साक्षात्कार) में है। लेकिन हम साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। अन्य कोई समस्या नहीं है। साहस का अभाव ही हमारी एकमात्र समस्या है। सिर्फ हमारी ही नहीं, सभी की यही एकमात्र समस्या है।
ॐ तत् सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
२६ मार्च २०२६
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