Wednesday, 1 April 2026

नास्तिक व आस्तिक कौन हैं? .

 (प्रश्न) : नास्तिक व आस्तिक कौन हैं?

.
(उत्तर) : जो वेदों को अपौरुषेय नहीं मानते, वे नास्तिक हैं। जो वेदों को अपौरुषेय मानते हैं, वे आस्तिक हैं।
भारत के नास्तिक मतों में प्रमुख हैं -- जैन , बौद्ध, व चार्वाक मत।
आज यहाँ चार्वाक मत की ही चर्चा कर रहा हूँ, अन्य नास्तिक मतों की बाद में किसी दिन करूँगा। वर्तमान में चार्वाक मत संगठित मत नहीं है, लेकिन चार्वाक मतानुयायी छद्म रूप से भारत में ही नहीं, पूरे विश्व में भरे पड़े हैं। भारत में तो उनकी संख्या बहुत अधिक है।
.
जीवन में दुख से बचकर अधिकतम इंद्रिय सुख पाने को ही बुद्धिमानी मानना— चार्वाक मत है। यह दर्शन 'भोगवाद' और 'सुखवाद' पर जोर देता है और मृत्यु के बाद जीवन को नहीं मानता। चार्वाक मत केवल प्रत्यक्ष प्रमाण (जो आँखों से दिखे) को स्वीकार करता है। यह आत्मा, परमात्मा, पुनर्जन्म, स्वर्ग-नर्क और वेदों को पूरी तरह नकारता है। इसका मुख्य सिद्धांत "यावज्जीवेत् सुखं जीवेत्, ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्" (जब तक जीओ तब तक सुख से जीओ, उधार लेकर भी घी पीओ) है। किसी भी युक्ति से दूसरों का पैसा हड़पो और खूब मौज-मस्ती करो। दूसरों का पैसा कभी वापस मत करो। ये लोग यदि किसी भगवान को मानते भी हैं तो उसी को मानते हैं, जो उनकी चोरी में सहायक हो। ऐसे लोग भारत में कदम-कदम पर हैं, जो दूसरों को ठगने का अवसर ढूंढते रहते हैं। चार्वाक का नाम उन्होंने कभी सुना नहीं होगा, लेकिन वे कार्य सारा उसी के मतानुसार करते हैं। ये वामपंथी भी चार्वाक से कम नहीं हैं।
कृपा शंकर
३० मार्च २०२६

No comments:

Post a Comment