Thursday, 23 April 2026

२४ अप्रेल को सभी श्री अरविन्द आश्रमों में एक उत्सव मनाया जाता है ---

 24अप्रेल को सभी श्री अरविन्द आश्रमों में एक उत्सव मनाया जाता है| वह है श्री माँ का अंतिम रूप से श्रीअरविन्द आश्रम पोंडिचेरी में स्थायी आगमन का दिन| सर्वप्रथम श्री माँ 1914 में आई थीं पर अंतिम व स्थाई रूप से 24 अप्रेल 1920 को आ कर पोंडिचेरी में बस गईं|

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24 नवम्बर 1926 को श्रीअरविन्द ने भगवान श्रीकृष्ण का पूर्ण साक्षात्कार किया और उसके पश्चात् श्री माँ को आश्रम का भार सौंप कर एकांत साधना में लीन हो गए| वर्ष में सिर्फ चार बार ही वे अपने शिष्यों को दर्शन देते थे| इन चार दिनों को श्री अरविन्द और श्री माँ एक कमरे में कुर्सी पर बैठ जाते और उनके शिष्य क्रमबद्ध होकर शांति से उनके सामने से पुष्प अर्पित करते हुए प्रणाम कर के निकल जाते|
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(1) 15 अगस्त 1872 को श्री अरविन्द का कोलकाता में जन्म हुआ और सात वर्ष की आयु में ही उनके माँ-बाप ने उन्हें लन्दन भेज दिया ताकि कोई भी भारतीय हिन्दू संस्कार उनमें न पड़े| उनके माँ-बाप ने उनको न तो अपनी मातृभाषा सिखाई और न कोई हिन्दू संस्कार दिए| वे चाहते थे कि उनका बालक पक्का अँगरेज़ बने|
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(2) 21 फरवरी 1878 को श्री माँ का पेरिस फ़्रांस में जन्म हुआ| उनके पिता तुर्क (Turk) मूल के थे और माँ मिश्र (Egypt) मूल कीं| उनका नाम रखा गया #मीरा अल्फासा| यह एक मुस्लिम नाम है|
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(3) 24 अप्रेल1920 को श्री माँ का पोंडिचेरी में अंतिम आगमन|
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(4) 24 नवम्बर 1926 सिद्धि दिवस|
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(* 'मीरा' मूल रूप से मध्य एशिया का एक सामान्य मुस्लिम नाम है| पूर्व सोवियत संघ के युक्रेन गणराज्य में मेरा घनिष्ठ परिचय मीरा नाम की एक अति विदूषी तातार मुस्लिम महिला से था| वह दस वर्ष तक चीन में राजनीतिक बन्दी भी रह चुकी थी| उसकी एक सम्बन्धी लडकी का नाम भी 'मीरा' था जिसे हिंदी भाषा और भारतीय नृत्य भी आते थे| कई वर्षों तक उसका मेरे साथ पत्राचार था|)
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इस लेख को लिखने का उद्देश्य 24 अप्रेल को श्री माँ को प्रणाम निवेदित करना है जिसने भारत और सनातन धर्म की महान सेवा की|
ॐ ॐ ॐ || २३ अप्रेल २०१६

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