Saturday, 25 April 2026

मैमूना बेगम की दास्तान ---

 मैमूना बेगम की दास्तान ---

.
किसी ज़माने में इलाहाबाद में एक बहुत मशहूर गुजराती व्यापारी हुआ करते थे -- ज़नाब नवाब अली ख़ान साहब। वे इलाहाबाद और प्रतापगढ़ जिलों के शराब के सबसे बड़े व्यापारी और ठेकेदार भी थे। इलाहाबाद के बड़े बड़े घरों में शराब की बड़ी-बड़ी पार्टियाँ हुआ करती थीं, जिनमें मंहगी से मंहगी शराब की सप्लाई का काम वे ही करते थे। शराब के अलावा घर-गृहस्थी के काम का सारा सामान भी सप्लाई करते थे। उनकी बेगम साहिबा अपने निक़ाह से पहिले एक पारसी परिवार की बेटी थीं जिनका पारिवारिक उपनाम गंधी (Gandhi) था, गांधी नहीं। उनके परिवार का खानदानी पेशा गंध यानि इत्र बेचना था। शादी के समय इस्लाम कबूल कर के वे मुसलमान हो गई थीं।
.
वहाँ के कब्रिस्तान में उन दोनों की और उनके बेटे की कब्रें भी हैं, पता नहीं वहाँ अक़ीदत के फूल चढ़ाने भी कोई जाता है या नहीं? उनके खानदान में बड़े बड़े मशहूर लोग हुए हैं, जिन्हें सारी दुनिया जानती है। उन ज़नाब नवाब अली खान साहब के साहबज़ादे का नाम फिरोज़ ख़ान था, जिन से मेमूना बेगम का निकाह हुआ। बाद में दोनों की बनी नहीं, और मेमूना बेगम ने धक्के मारकर उनको घर से बाहर कर दिया और युनूस खान नाम के एक दूसरे शख़्स से निक़ाह कर लिया।
.
अब तो यह बात बहुत पुरानी हो गई है जिसे भूल जाना चाहिए। पर भूल कर भी भूल नहीं पा रहे हैं। उन ज़नाब नवाब अली साहब से बड़ा अभागा शायद ही कोई हुआ हो। उनके समधी, उनकी बहु, उनके नाती, और नाती की बहु -- दुनियाँ के सबसे मशहूर और रईस लोगों में हुए हैं, जिनकी याद में हर वर्ष बड़े बड़े जलसे होते हैं, उनके नाम पर हिंदुस्तान की आधी संस्थाओं के नाम हैं। लेकिन बेचारे फिरोज खान और उनके माँ-बाप को कोई याद नहीं करता। पता नहीं इनकी कब्र पर किसी ने कोई श्रद्धा-सुमन कभी चढ़ाया भी है या नहीं। सच का दामन जब छूट जाता है, तब झूठ का आईना टूट जाता है।
कृपा शंकर
२५ अप्रेल २०२०

No comments:

Post a Comment