Tuesday, 10 March 2026

"राधा" नाम को कुछ लोग विवादित कर रहे हैं, यह उनकी अज्ञानता है ---

"राधा" नाम को कुछ लोग विवादित कर रहे हैं, यह उनकी अज्ञानता है। महर्षि श्रीअरविंद के अनुसार श्रीराधा -- भगवान की भक्ति और समर्पण की सर्वोच्च अभिव्यक्ति हैं। योगिराज श्यामाचरण लाहिड़ी महाशय के अनुसार जिस शक्ति ने सम्पूर्ण सृष्टि को धारण कर रखा है, उसका नाम श्रीराधा है। निंबार्क वैष्णव संप्रदाय की तो आराध्या ही भगवती श्रीराधाजी हैं। मेरा अपना अनुभव है कि जिस समय हृदय में भक्तिभाव प्रबलतम होता है, उस समय श्रीराधा जी का ही स्मरण होता है।

हमारे यहाँ वृंदावन से निंबार्क वैष्णव संप्रदाय के एक महात्मा जी वर्ष में तीन-चार बार आते हैं। उन्होंने पूरे नगर को भक्तिमय बना दिया है। उनके प्रभाव से पिछले दस-पंद्रह वर्षों से कम से कम तीन स्थानों से माताएँ नित्य नियमित प्रभातफेरी निकालती हैं। अनेक बच्चों को उन्होने गीता जी कंठस्थ करा दी है। भागवत की कथाएँ वर्ष में पाँच-छह बार हो ही जाती हैं। आजकल वे आये हुए हैं, नित्य प्रातः 5 बजे गीता पर उनका प्रवचन होता है। आज प्रातः पाँच बजे गीता पर उनका प्रवचन सुनने मैं भी गया था, फिर संकीर्तन में मैं भी उनके साथ था। पंद्रह-बीस वर्ष पूर्व तक होली पर बहुत फूहड़ गाली-गलौच और बदमाशी होती थी, वह सब बंद हो गई है। अब सब लोग महिलाएं व पुरुष मिलकर भजन-कीर्तन करते हुए फूलों की होली खेलते हैं। होली का त्योहार ही भजन-कीर्तन का त्योहार हो गया है। लोगों में भक्तिभाव बहुत अधिक बढ़ा है, जो और भी अधिक बढ़ेगा।
११ मार्च २०२५

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