कुछ संगठनों के बारे में मेरा अनुभव ---
मुझे कुछ सामाजिक, राजनीतक और आध्यात्मिक संगठन बहुत अच्छे लगे जिनसे में जुड़ा, लेकिन मैंने स्वयं को वहाँ के अनुकूल नहीं पाया, इसलिए उनके प्रति कभी समर्पित नहीं हो पाया, और उनसे दूर हट गया। सारी कमियाँ और दोष मैं अपनी स्वयं की अक्षमता को ही देता हूँ। इस विषय पर मैंने अनेक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रबुद्ध विचारकों को भी सुना है। अपनी कमियों, और कटु अनुभवों से भी बहुत कुछ सीखा है।
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क्षमा-याचना सहित कहना चाहता हूँ कि कोई भी संगठन -- सिद्धांतों, आदर्शों या विचारों से नहीं चलता। वहाँ भी सत्ता के लिए संघर्ष होता है। सत्ता के लिए लोग एक-दूसरे को नीचा दिखाते हैं। आर्थिक प्रलोभन के कारण भी संघर्ष होते हैं।
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कोई संगठन या कोई दल आकर्षित करता है तो उससे जुड़ जाइये। जब तक मन लगे, तब तक उसमें काम कीजिए, उसका प्रचार प्रसार कीजिए। जब उसमें कोई बुराई लगे तब उससे चुपचाप हट जाइए, और अपनी क्षमतानुसार अन्य कार्य कीजिए। किसी तरह की सलाह देना मूर्खता है।
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कोई अन्य काम भी नहीं होता है तो घर पर आराम से रहिए। संगठनों से अब मुझे एलर्जी है। मेरी बिना मांगी सहायता के लिए धन्यवाद जो कभी नहीं चुका पाऊँगा।
ॐ तत्सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपाशंकर
४ मार्च २०२३
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