Saturday, 25 April 2026

मैमूना बेगम की दास्तान ---

 मैमूना बेगम की दास्तान ---

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किसी ज़माने में इलाहाबाद में एक बहुत मशहूर गुजराती व्यापारी हुआ करते थे -- ज़नाब नवाब अली ख़ान साहब। वे इलाहाबाद और प्रतापगढ़ जिलों के शराब के सबसे बड़े व्यापारी और ठेकेदार भी थे। इलाहाबाद के बड़े बड़े घरों में शराब की बड़ी-बड़ी पार्टियाँ हुआ करती थीं, जिनमें मंहगी से मंहगी शराब की सप्लाई का काम वे ही करते थे। शराब के अलावा घर-गृहस्थी के काम का सारा सामान भी सप्लाई करते थे। उनकी बेगम साहिबा अपने निक़ाह से पहिले एक पारसी परिवार की बेटी थीं जिनका पारिवारिक उपनाम गंधी (Gandhi) था, गांधी नहीं। उनके परिवार का खानदानी पेशा गंध यानि इत्र बेचना था। शादी के समय इस्लाम कबूल कर के वे मुसलमान हो गई थीं।
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वहाँ के कब्रिस्तान में उन दोनों की और उनके बेटे की कब्रें भी हैं, पता नहीं वहाँ अक़ीदत के फूल चढ़ाने भी कोई जाता है या नहीं? उनके खानदान में बड़े बड़े मशहूर लोग हुए हैं, जिन्हें सारी दुनिया जानती है। उन ज़नाब नवाब अली खान साहब के साहबज़ादे का नाम फिरोज़ ख़ान था, जिन से मेमूना बेगम का निकाह हुआ। बाद में दोनों की बनी नहीं, और मेमूना बेगम ने धक्के मारकर उनको घर से बाहर कर दिया और युनूस खान नाम के एक दूसरे शख़्स से निक़ाह कर लिया।
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अब तो यह बात बहुत पुरानी हो गई है जिसे भूल जाना चाहिए। पर भूल कर भी भूल नहीं पा रहे हैं। उन ज़नाब नवाब अली साहब से बड़ा अभागा शायद ही कोई हुआ हो। उनके समधी, उनकी बहु, उनके नाती, और नाती की बहु -- दुनियाँ के सबसे मशहूर और रईस लोगों में हुए हैं, जिनकी याद में हर वर्ष बड़े बड़े जलसे होते हैं, उनके नाम पर हिंदुस्तान की आधी संस्थाओं के नाम हैं। लेकिन बेचारे फिरोज खान और उनके माँ-बाप को कोई याद नहीं करता। पता नहीं इनकी कब्र पर किसी ने कोई श्रद्धा-सुमन कभी चढ़ाया भी है या नहीं। सच का दामन जब छूट जाता है, तब झूठ का आईना टूट जाता है।
कृपा शंकर
२५ अप्रेल २०२०

Friday, 24 April 2026

= खेचरी मुद्रा =(भाग 1)

 == खेचरी मुद्रा ==

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(भाग 1)
ओ३म नमः शिवाय विष्णुरूपाय शिवरूपाय विष्णवे| शिवस्य हृदयं विष्णु: विष्णोश्च हृदयं शिव:||
ओ३म मुनीन्द्रगुह्यं परिपूर्णकामं कलानिधिं कल्मषनाश हेतुं |
परात्परं यत्परं पवित्रं नमामि शिवम् महतो महान्तम्||
नमामि शिवं महतो महान्तं| नमामि रामं महतो महान्तम्||
मैं पूर्व में अनेक आध्यात्मिक चर्चाएँ कर चुका हूँ| गुरु तत्व पर चर्चा के पश्चात अन्य किसी भी आध्यात्मिक विषय पर और चर्चा नहीं करूंगा| मेरे लिए उससे बड़ा कोई अन्य विषय नहीं है|
अब बापस साधनों की ओर लौटता हूँ|
हमारे महान पूर्वज भौतिक सूर्य की नहीं बल्कि स्थूल सूर्य की ओट में जो सूक्ष्म भर्गज्योति: है उसकी उपासना करते थे| उसी ज्योति के दर्शन ध्यान में कूटस्थ (आज्ञाचक्र और सहस्रार) में भी सर्वदा होते हैं|
इस लिए भी ध्यान साधना की जाती है|
ध्यान में सफलता के लिए हमें इन का होना आवश्यक है:-----
(1) भक्ति यानि परम प्रेम|
(2) परमात्मा को उपलब्ध होने की अभीप्सा|
(3) दुष्वृत्तियों का त्याग|
(4) शरणागति और समर्पण|
(5) आसन, मुद्रा और यौगिक क्रियाओं का ज्ञान|
(6) दृढ़ मनोबल और बलशाली स्वस्थ शरीर रुपी साधन|
खेचरी मुद्रा बहुत महत्वपूर्ण है जिसकी चर्चा हम क्रमशः करेंगे|
वेदों में 'खेचरी शब्द का कहीं उल्लेख नहीं है|
वेदिक ऋषियों ने इस प्रक्रिया का नाम दिया -- 'विश्वमित्'|
'खेचरी' का अर्थ है --- ख = आकाश, चर = विचरण| अर्थात आकाश यानि प्रकाशवान या ज्योतिर्मय ब्रह्म तत्व में विचरण| जो बह्म तत्व में विचरण करता है वही साधक खेचरी सिद्ध है| परमात्मा के प्रति परम प्रेम और शरणागति हो तो साधक परमात्मा को स्वतः उपलब्ध हो जाता है पर प्रगाढ़ ध्यानावस्था में देखा गया है की साधक की जीभ स्वतः उलट जाती है और खेचरी व शाम्भवी मुद्रा अनायास ही लग जाती है| ध्यान साधना में तीब्र प्रगति के लिए खेचरी मुद्रा का ज्ञान अति आवश्यक है|
दत्तात्रेय संहिता और शिव संहिता में खेचरी मुद्रा का विस्तृत वर्णन मिलता है|
तीन-चार दिनों में हम नित्य इसकी चर्चा और पूरी सरल विधि और महिमा का वर्णन करेंगे|
२४ अप्रेल २०१३
===== क्रमशः ======

परमात्मा एक प्रवाह है, उसे स्वयं के माध्यम से प्रवाहित होने दो, कोई अवरोध मत खड़ा करो ---

"परमात्मा एक प्रवाह है, उसे स्वयं के माध्यम से प्रवाहित होने दो| कोई अवरोध मत खड़ा करो| फिर पाएँगे कि वह प्रवाह हम स्वयं हैं|"

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प्रिय निजात्मगण, आप सब में हृदयस्थ प्रभु को नमन !
आप सब से एक प्रश्न है ..... क्या इस संसार में कुछ पाने योग्य है ?
आध्यात्मिक दृष्टी से सर्वप्रथम तो कुछ पाने की अवधारणा ही गलत है|
कुछ पाने की कामना ही माया का सबसे बड़ा अस्त्र है|
>>> या तो सब कुछ मिलता है या कुछ भी नहीं मिलता, यह एक आध्यात्मिक नियम है| यह कुछ पाने की अभिलाषा एक मृगतृष्णा है| किसी को कुछ नहीं मिलता| <<<
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सब कुछ परमात्मा का है और सब कुछ "वह" ही है| हमें स्वयं को ही समर्पित होना पड़ता है| जो परमात्मा को समर्पित हो गया उसको सब कुछ मिल गया| बाकि अन्य सब को निराशा के अतिरिक्त कुछ भी नहीं मिलता|
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सब कुछ तो मिला हुआ ही है| पाने योग्य कुछ है तो "वह" ही है जिसे पाने के बाद कुछ भी प्राप्य नहीं है| "वह" मिलता नहीं है, उसमें स्वयं को समर्पित होना पड़ता है| कुछ करने से "वह" नहीं मिलता, कुछ होना पड़ता है| वह होने पर "वह" स्वयं ही कर्ता भी बन जाता है|
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हमें चाहिए बस सिर्फ एक प्रबल सतत अभीप्सा और परम प्रेम, अन्य कुछ भी नहीं|
>>> "परमात्मा एक प्रवाह है, उसे स्वयं के माध्यम से प्रवाहित होने दो| कोई अवरोध मत खड़ा करो| फिर पाएँगे कि वह प्रवाह हम स्वयं हैं|" <<<
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ॐ तत्सत् | शिवोहं शिवोहं शिवोहं शिवोहं शिवोहं | ॐ ॐ ॐ ||
कृपाशंकर
24 April 2016

नाभी क्रिया

 श्री श्री लाहिड़ी महाशय नाभी क्रिया को अत्यंत महत्व देते थे।मनु संहिता में है; "धर्म के चार चरण हैं और,इसीलिए,सत्य के भी चार चरण हैं।"

लाहिड़ी महाशय ने इसे इस प्रकार समझाया;
धर्म चार चरणों में विभाजित है:
1 खेचरी मुद्रा
2 अनाहत ग्रन्थि का भेदन
3 मणिपुर ग्रन्थि का भेदन
4 मूलाधार ग्रन्थि का भेदन ।
ललिता सहस्त्रनाम में भी है;
मुलाधारैकनीलया ब्रम्हग्रन्थिविभेदिनी ।
मणिपुरान्तरूदिता विष्णुग्रन्थिविभेदिनी ।।
आज्ञाचक्रान्तरलस्था रुद्रग्रंथिविभेदिनी ।
आदि शंकराचार्य जी ने भी सौंदर्य लहरी में उपरोक्त का दृष्टान्त दिया है।
स्पष्ट है कि ग्रन्थिविभेदन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ग्रंथि सुषुम्ना में प्राण प्रवाह को बाधित करती है।ये ग्रन्थियां इड़ा एवम् पिंगला के संगम बिंदु पर बनती हैं।
तीन प्रमुख नाड़ियों(इडा,पिंगला,सुषुम्ना) तथा चक्रों का वृहद वर्णन कालांतर में करेंगे। यहाँ हम नाभी क्रिया को समझेंगे जो हमारी क्रिया साधना का महत्वपूर्ण अंग है।मणिपुर चक्र पर प्राण और अपान वायु एक दूसरे को पार करते हैं,परिणाम स्वरूप ऊर्जा का उलझाव,गुत्थी या ग्रन्थि बन जाती है।मणिपुर ग्रन्थि को नाभी क्रिया से भेदना आवश्यक है जिससे कुण्डलिनी जागरण निर्बाध हो सके।
नाभी क्रिया की विधि-
1-अपने ध्यान आसन पर बैठें।बन्द आखों से भ्रूमध्य पर एकाग्र हों।श्वास-प्रश्वास को भूल जाएं।
2- अब प्रत्येक चक्र पर ॐ का जप करें,क्रमशः ऊपर जाना है;
मूलाधार,स्वाधिष्ठान,मणिपुर,अनाहत,विशुद्ध,बिंदु तथा अंत में भ्रूमध्य।
4-जब बिंदु से भ्रूमध्य की ओर जाएं तब धीरे धीरे सिर को नीचे झुकाएं;ठुड्डी को कण्ठ से स्पर्श करवाएं(सहज तथा बिना दबाव के)।
4-अब हांथों को जोड़ें;अंगुलियां एक दूसरे को जकड़े हुए तथा अंगूठे परस्पर मिले हुए।हथेलियाँ नीचे की ओर स्वतः हो जायेंगीं।
5-अब अंगूठों से नाभि पर हल्की हल्की ठोकर लगाएं।ठोकर देते समय अंगूठों को 1 या 1.5 इंच से अधिक दूर न ले जाएं।आपकी ठोकर भी मृदु हो तथा गति भी 1 सेकंड में 2 हो।गति सुविधानुसार कम या अधिक कर सकते हैं।ठोकरों की संख्या 50-100 हो।प्रत्येक ठोकर के साथ ॐ का मानसिक जप करें।ऐसा करने से समान वायु उदर के मध्य भाग में संग्रहित होती है।इस समय नाभि एवम् भ्रूमध्य आपस में जुड़े हैं,ऐसा भाव हो।
6-अब सर को धीरे धीरे ऊपर उठाते हुए सामान्य स्थिति में ले आएं।ऐसा करते समय एकाग्रता भ्रूमध्य से बिंदु होते हुए सीधे मणिपुर चक्र पर लाना है।
7-अब हाथों को खोल कर पीठ की ओर ले जाएं।पुनः हाथों को पूर्ववत बांध लें।
8-अब मणिपुर चक्र पर ॐ जप के साथहल्की हल्की ठोकर लगाएं।संख्या 25 से 75 हो।
9-जब यह पूर्ण हो तब हाथों को सामान्य करते हुए ध्यान मुद्रा में ले आएं।
10-अब भ्रूमध्य पर एक बार ॐ का जप करें फिर मेडुला पर तथा उतरते हुए 5,4,3,2,1,प्रत्येक चक्र पर एक बार ॐ का जप करें।
इस पूरी प्रक्रिया को 4 बार दोहराएं।
नावी क्रिया में ॐ की हल्की ठोकर तथा श्वास का कोई सम्बन्ध नही है।
साथ ही ठोकरों की संख्या तथा आगे-पीछे संख्या का अनुपात भी निश्चित नही है।आप इस अनुपात को बराबर भी रख सकते हैं।ठोकर की गति भी आप अपनी सुविधानुसार तेज या धीमी कर सकते हैं।
कुछ उन्नत साधक हाथों का प्रयोग ही नही करते तथा पूरी नाभी क्रिया मानसिक रूप से ही करते हैं।धीरे धीरे साधक को ज्ञात हो जाता है कि उसके लिए क्या उचित होगा।
बिंदु 6 पर जब आप सर को सामान्य स्थिति में लाएं तो कुछ और पीछे जाएं जैसे की छत की ओर देखने का प्रयास है।ऐसा करने से नाभी चक्र की स्पष्ट अनुभूति होगी। 18 अक्तूबर 2015

Thursday, 23 April 2026

जातिवाद वेद विरुद्ध है ---

 जातिवाद वेद विरुद्ध है

जातिगत एकता की बात ही वेदविरुद्ध है| जो वेदविरुद्ध है वह हमें कभी भी स्वीकार नहीं होना चाहिए| श्रुति भगवती ब्रह्म से एकत्व सिखाती है, वहाँ कोई जाति की बात नहीं है| एकस्तथा सर्व भूतान्तरात्मा, अर्थात सब प्राणियों में एक ही आत्मा छिपा हुआ है| प्रत्यगात्मा यानि ब्रह्म में एकत्व है| जातिगत एकता की बात करने वाले अज्ञान और माया के वशीभूत हैं|
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जो लोग जातिगत एकता की बातें करते हैं, मैं आध्यात्मिक रूप से उनका समर्थन नहीं करता हूँ| पर सामाजिक रूप से कभी कभी जातिगत एकता की बातें करना मेरी विवशता यानि मज़बूरी है क्योंकि भारत की वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में अनारक्षित जातियों के विरुद्ध राजनीतिक अन्याय बहुत अधिक है|
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"जाति हमारी ब्रह्म है, माता पिता हैं राम|
गृह हमारा शुन्य है, अनहद में विश्राम||"
हमारी जाति "अच्युत" है| अर्थात् जो भगवान की जाति है, वह ही हमारी जाति है| ब्रह्म ही सत्य है और संसार मिथ्या है| अतः ब्रह्म से एकत्व ही सच्चा एकत्व है, इन सांसारिक जातियों से नहीं|
कृपा शंकर
२३ अप्रेल २०१९

२४ अप्रेल को सभी श्री अरविन्द आश्रमों में एक उत्सव मनाया जाता है ---

 24अप्रेल को सभी श्री अरविन्द आश्रमों में एक उत्सव मनाया जाता है| वह है श्री माँ का अंतिम रूप से श्रीअरविन्द आश्रम पोंडिचेरी में स्थायी आगमन का दिन| सर्वप्रथम श्री माँ 1914 में आई थीं पर अंतिम व स्थाई रूप से 24 अप्रेल 1920 को आ कर पोंडिचेरी में बस गईं|

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24 नवम्बर 1926 को श्रीअरविन्द ने भगवान श्रीकृष्ण का पूर्ण साक्षात्कार किया और उसके पश्चात् श्री माँ को आश्रम का भार सौंप कर एकांत साधना में लीन हो गए| वर्ष में सिर्फ चार बार ही वे अपने शिष्यों को दर्शन देते थे| इन चार दिनों को श्री अरविन्द और श्री माँ एक कमरे में कुर्सी पर बैठ जाते और उनके शिष्य क्रमबद्ध होकर शांति से उनके सामने से पुष्प अर्पित करते हुए प्रणाम कर के निकल जाते|
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(1) 15 अगस्त 1872 को श्री अरविन्द का कोलकाता में जन्म हुआ और सात वर्ष की आयु में ही उनके माँ-बाप ने उन्हें लन्दन भेज दिया ताकि कोई भी भारतीय हिन्दू संस्कार उनमें न पड़े| उनके माँ-बाप ने उनको न तो अपनी मातृभाषा सिखाई और न कोई हिन्दू संस्कार दिए| वे चाहते थे कि उनका बालक पक्का अँगरेज़ बने|
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(2) 21 फरवरी 1878 को श्री माँ का पेरिस फ़्रांस में जन्म हुआ| उनके पिता तुर्क (Turk) मूल के थे और माँ मिश्र (Egypt) मूल कीं| उनका नाम रखा गया #मीरा अल्फासा| यह एक मुस्लिम नाम है|
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(3) 24 अप्रेल1920 को श्री माँ का पोंडिचेरी में अंतिम आगमन|
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(4) 24 नवम्बर 1926 सिद्धि दिवस|
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(* 'मीरा' मूल रूप से मध्य एशिया का एक सामान्य मुस्लिम नाम है| पूर्व सोवियत संघ के युक्रेन गणराज्य में मेरा घनिष्ठ परिचय मीरा नाम की एक अति विदूषी तातार मुस्लिम महिला से था| वह दस वर्ष तक चीन में राजनीतिक बन्दी भी रह चुकी थी| उसकी एक सम्बन्धी लडकी का नाम भी 'मीरा' था जिसे हिंदी भाषा और भारतीय नृत्य भी आते थे| कई वर्षों तक उसका मेरे साथ पत्राचार था|)
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इस लेख को लिखने का उद्देश्य 24 अप्रेल को श्री माँ को प्रणाम निवेदित करना है जिसने भारत और सनातन धर्म की महान सेवा की|
ॐ ॐ ॐ || २३ अप्रेल २०१६

सारा देश इस समय खनन माफियाओं के चंगुल में है ---

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सारा देश इस समय खनन माफियाओं के चंगुल में है

ॐ श्री गुरवे नमः|

आज मैं साधन क्रमों पर चर्चा करने वाला था पर उसके स्थान पर अपनी ही व्यथा व्यक्त करने जा रहा हूँ| अपने सामने इतना अन्याय देख रहा हूँ कि इस समाज से विरक्ति हो गयी है| इच्छा यही हो रही है कि विरक्त होकर सांसारिक चेतना से ऊपर उठ जाऊं और स्थाई रूप से एकांतवास करूं व इस समाज और इसकी चेतना से पृथक ही रहूँ|
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सारा देश इस समय खनन माफियाओं के चंगुल में है| हर जिले में पटवारी से जिलाधीश तक, और सिपाही से पुलिस अधीक्षक तक, और सारे मंत्रीगण खनन माफियाओं के बंधुआ मजदूर है| देश की बहुमूल्य खनिज संपदा की लूट हो रही है| और जो भी इन माफियाओं के मार्ग में आता है उसका अंत कर दिया जाता है|
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स्वतन्त्रता संग्राम में हमारे क्षेत्र में स्वतंत्रता सेनानियों के शिरोमणि थे --- पचेरी ग्राम के पं.ताड़केश्वर शर्मा| अंगरेज़ सरकार ने उनके पूरे परिवार को सगे सम्बन्धियों, महिलाओं और बच्चों सहित जेल में डाल रखा था| उनका घर, खेत और सारी सम्पति जब्त कर ली थी| तथाकथित आज़ादी के बाद उनके परिवार के जीवित बचे छ: सदस्यों को राष्ट्रपति ने सम्मानित भी किया था|
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उनके पौत्र पं.प्रदीप शर्मा पर्यावरण प्रेमी होने के कारण और परोपकार हेतु खनिज माफियों के विरुद्ध संघर्षरत थे| दो माह पूर्व उनके परिवार के अनुसार पुलिस की मिलीभगत से चुनौती देकर भोजन करते समय घर से बाहर बुलाकर उनकी ह्त्या कर दी गयी और लाश को एक-डेढ़ फुट गहरे नाले में फेंक दिया गया| उनकी मृत्यु का समाचार सुनकर आसपास के गाँवों से हजारों लोग एकत्र हो गए व जिले के कई प्रतिष्ठित लोग भी आ गए तब प्रशासन ने पूर्ण आश्वासन दिया था कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी| उनके शरीर पर और गले पर चोट के निशान भी थे|
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अब सरकार यह सिद्ध करने पर अड़ी हुई है कि पं.प्रदीप शर्मा ने पानी में डूब कर आत्म-हत्या की है| सरकारी पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में भी दम घुटने से मौत दिखाई गई है और शरीर पर चोटों के निशान नहीं होना बताया है| उनके गाँव पचेरी में अभी तक आन्दोलन चल रहा है| सारे गाँव के लोग पाबन्द किए गए हैं| आस पास के गाँवों में पूर्ण बंद रहा है और प्रशासन ने जन आन्दोलन को कुचलने की पूर्ण चेष्टा की है| पं.प्रदीप शर्मा के घर का ताला तोड़कर उनका चलभाष और अन्य साक्ष्य चोरी किये गए| जाँच के नाम पर सारे साक्ष्यों को मिटाया गया है| क्या इतने जीवट का व्यक्ति जो खनन माफियाओं के विरुद्ध संघर्ष कर रहा था एक फुट गहरे पानी में डूब कर आत्म-ह्त्या करेगा?
क्या कोई एक फुट गहरे पानी में डूब कर आत्म-हत्या कर सकता है?
दो महीने बीत जाने पर भी किसी नामजद को गिरफ्तार नहीं किया गया है| CBI से जाँच की मांग नहीं मानी जा रही है| यदि CBI से जाँच हो तो पूरी सरकार बेनकाब हो जायेगी| पर सीबीआई भी तो सरकार से ही आदेश लेगी|
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कल जिला मुख्यालय पर एक बहुत बड़ा धरना दिया गया जिसमे अनेक पूर्व वरिष्ठ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी, प्रसिद्ध डॉक्टर, प्रबुद्धजन, शिक्षाविद और मातृशक्ति थी| सबने इस घटना की निंदा की| ज्ञापन लेने के लिए कोई अधिकारी उपलब्ध नहीं था| अब उस महान स्वतंत्रता सेनानी के परवार के सदस्यों ने निर्णय लिया है की वे अपने सम्मान लौटा देंगे और आमरण अनशन करेंगे|
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जब एक प्रसिद्ध स्वतन्त्रता सेनानी का परिवार इन खनन माफियाओं से सुरक्षित नहीं है तो एक सामान्य जन का क्या हाल होगा?
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और भी अनेक बातें हैं जो पीड़ित करती हैं| इसमें दोष बुरे लोगों का नहीं है| दोष तो हमारा ही है हम निर्बल और संवेदन हीन बन गए हैं|
दुनिया को खतरा बुरे लोगों की ताकत से नहीं है बल्कि अच्छों की दुर्बलता के कारण है|
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वर्त्तमान में Democracy (लोकतंत्र) समाप्त होकर Plutocracy (धनी व कुटिल लोगों का राज्यतंत्र) रह गयी है| वर्त्तमान लोकतंत्रीय व्यवस्था काले विषधर उगल रही है और हम उन्हें दूध पिला रहे हैं| आज की राजनीति आत्मा पर लात मार रही है और हम वफादारी के साथ अपनी दुम हिला रहे हैं|
हम सत्य को कहने से डर रहे हैं|
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अधिक से अधिक 50 या 60 प्रतिशत मतदान होता है फिर ये मत अनेक प्रत्याशियों में बँट जाते हैं| मात्र 20-25 मत प्राप्त करने वाला व्यक्ति जनप्रतिनिधी बन जाता है|
वोट बेंक की राजनीति, जातिवाद, साम्प्रदायिकता की भावना भड़का कर, पैसे शराब आदि बाँट कर 15 से 20 प्रतिशत वोट प्राप्त कर लेने वाले की जीत पक्की है| सारे माफिया इसी तरीके से सत्ता में आते हैं|
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हमारे मन में लाचारी का भाव की मैं अकेला क्या कर सकता हूँ, मेरी कौन सुनेगा आदि के कारण ही यह democracy बदल कर plutocracy हो गई है| मैं सभी पाठकों से निवेदन करता हूँ की हम सब यह संकल्प करें की अगले चुनावों में शत-प्रतिशत मतदान के लक्ष्य को प्राप्त करें| समाज के जिस पात्र भाई बहिन का नाम मतदाता सूचि में नहीं है वे अपना नाम जुड़ायें| मतदान वाले दिन सूर्य उदय होते ही एक धार्मिक कर्तव्य मानकर मतदान देने पहुँच जाएँ| अन्यथा यही अन्याय और माफिया राज्य सहने के लिए तैयार रहें| सोचें, विचारें और सक्रियता से आगे बढ़ें अन्यथा पांचाली के चीर हरण में जो चुप रहेंगे उन्हें भावी पीढी कभी क्षमा नहीं करेगी|
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शुभ कामनाएँ| जय जननी जय भारत|
२३ अप्रेल २०१३