म्लेच्छ कौन है ? ....
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म्लेच्छ शब्द पुल्लिंग है जिसका अर्थ है .... अनार्य, दुराचारी व्यक्ति|
जहाँ प्राणी निर्भय होकर नहीं घूम सकें वह म्लेच्छ देश है|
मनुस्मृति के अनुसार ...... कृष्णसारस्तु चरति मृगो यत्र स्वभावतः| सज्ञेयो यज्ञियो देशो म्लेच्छ देशस्त्वतः परः|| (मनुस्मृति २/२३)
जहाँ कृष्ण मृग यानी काले हिरण जैसे पशु भी निर्भय होकर घूम सकें वह यज्ञीय देश हैं| जहाँ आतंक और हिंसा का वातावरण है वह म्लेच्छ देश हैं|
अब हम अनुमान लगा सकते हैं कि कौन म्लेच्छ है, कौन कौन से क्षेत्र म्लेच्छ क्षेत्र है, और कौन कौन से देश म्लेच्छ देश हैं|
ॐ ॐ ॐ ||
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म्लेच्छ शब्द पुल्लिंग है जिसका अर्थ है .... अनार्य, दुराचारी व्यक्ति|
जहाँ प्राणी निर्भय होकर नहीं घूम सकें वह म्लेच्छ देश है|
मनुस्मृति के अनुसार ...... कृष्णसारस्तु चरति मृगो यत्र स्वभावतः| सज्ञेयो यज्ञियो देशो म्लेच्छ देशस्त्वतः परः|| (मनुस्मृति २/२३)
जहाँ कृष्ण मृग यानी काले हिरण जैसे पशु भी निर्भय होकर घूम सकें वह यज्ञीय देश हैं| जहाँ आतंक और हिंसा का वातावरण है वह म्लेच्छ देश हैं|
अब हम अनुमान लगा सकते हैं कि कौन म्लेच्छ है, कौन कौन से क्षेत्र म्लेच्छ क्षेत्र है, और कौन कौन से देश म्लेच्छ देश हैं|
ॐ ॐ ॐ ||
(संशोधित व पुनर्प्रेषित लेख). म्लेच्छ कौन है ? म्लेच्छ देश कौन से हैं ? ....
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म्लेच्छ शब्द पुल्लिंग है जिसका अर्थ है .... अनार्य, दुराचारी व्यक्ति|
जहाँ प्राणी निर्भय होकर नहीं घूम सकें वह म्लेच्छ देश है|
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मनुस्मृति के अनुसार ...... कृष्णसारस्तु चरति मृगो यत्र स्वभावतः| सज्ञेयो यज्ञियो देशो म्लेच्छ देशस्त्वतः परः|| (मनुस्मृति २/२३)
जहाँ कृष्ण मृग यानी काले हिरण जैसे पशु भी निर्भय होकर घूम सकें वह यज्ञीय देश हैं| जहाँ आतंक और हिंसा का वातावरण है वह म्लेच्छ देश हैं|
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मुझे एक महात्मा ने बताया था कि जहाँ के आसपास कृष्णमृग (काले हिरन) और मोर पक्षी निर्भय घुमते हों, जहाँ शमी वृक्ष (खेजड़ी के पेड़) हों, और कुर्म भूमि (कछुए की पीठ के आकार की) हो, वह स्थान किसी भी यज्ञ और साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ है| उसकी कोई बराबरी नहीं है|
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अब हम अनुमान लगा सकते हैं कि कौन म्लेच्छ है, कौन कौन से क्षेत्र म्लेच्छ क्षेत्र है, और कौन कौन से देश म्लेच्छ देश हैं|
ॐ तत्सत् ! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
१७ मई २०१७