ईश्वर के मार्ग पर हम भटकते क्यों हैं ?
Wednesday, 1 April 2026
ईश्वर के मार्ग पर हम भटकते क्यों हैं ?
आज श्रमण परंपरा (जैन मत) के २४ वें व अंतिम तीर्थंकर महावीर की जयंती है ---
आज श्रमण परंपरा (जैन मत) के २४ वें व अंतिम तीर्थंकर महावीर की जयंती है। तीर्थंकर का अर्थ है जो स्वयं तप के माध्यम से आत्मज्ञान प्राप्त करते है और संसार-सागर से पार लगाने वाले तीर्थ की रचना करते हैं। तीर्थंकर वह व्यक्ति है जिसने पूरी तरह से क्रोध, अभिमान, छल, इच्छा, आदि पर विजय प्राप्त की है। इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं का अभिनंदन।
भगवान की अनन्य पराभक्ति हमारा स्वभाव हो, और सभी के हृदयों में जागृत हो ---
भारत से नक्सलवाद का अंत ---
भारत से नक्सलवाद का अंत ---
"ॐ नमो हनुमते पवनपुत्राय वैश्वानरमुखाय पापदृष्टि-चोरदृष्टि हनुमदाज्ञास्फुर ॐ स्वाहा।"
उपरोक्त पंक्ति एकमुखी हनुमत्कवच में आती है, जिसे अनेक श्रद्धालु अपने घर के मुख्य द्वार पर लिख कर रखते हैं। कहते हैं कि इस से घर में कोई चोर नहीं घुस सकता। पर जो घुस चुका है उसका क्या इलाज है? हमारा घर तो पूरा भारत है जहाँ पता नहीं कितने तस्कर, चोर-डाकू, और आतंकवादी नर-पिशाच घुसे हुए हैं जो इस राष्ट्र को नष्ट करना चाहते हैं। ये सब असत्य और अंधकार की शक्तियाँ हैं। हनुमान जी की शक्ति ही हम सब की और इस राष्ट्र की रक्षा करेगी। हनुमान जयंती पर श्रीहनुमान जी को नमन। वे इस राष्ट्र की रक्षा करें।
शिव ही विष्णु हैं, और विष्णु ही शिव हैं ---
"ॐ नमःशिवाय विष्णुरूपाय शिवरूपाय विष्णवे।