भगवान नटराज का नृत्य ---
यह अनंत ऊर्जा-खंडों का प्रवाह, और उन से परमाणुओं का सृजन और विसर्जन, -- जिन से उत्पन्न हुई यह समस्त सृष्टि -- भगवान नटराज का नृत्य है|
मूल रूप से किसी भी पदार्थ का कोई अस्तित्व नहीं होता, सब कुछ ऊर्जा है| उस ऊर्जा के पीछे भी एक विचार है, और उस विचार के पीछे एक परम चेतना है| वह परम चेतना और उससे भी परे जो है, वह परमशिव है, जिसके संकल्प से ऊर्जा और प्राणशक्ति का प्राकट्य हुआ| ऊर्जा से भौतिक सृष्टि निर्मित हुई और प्राणशक्ति ने सभी जीवों में प्राणों का संचार किया| और भी अनेक आयामों में अनेक प्रकार की सृष्टियाँ हैं, जिनका बोध हमें नहीं है|
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मनुष्य की अति अल्प और सीमित बुद्धि द्वारा परमात्मा अचिन्त्य और अगम्य है| लेकिन जो परमात्मा में निरंतर विचरण करते हैं, उनके लिए परमात्मा बोधगम्य है|
ॐ तत्सत् !!
२२ फरवरी २०२१
भगवान शिवजी का तांडव नृत्य ब्रह्मांड में हो रहे मूल कणों के उतार-चढाव की क्रियाओं का प्रतीक है। – स्विट्जरलैंड यूरोपीय संशोधन केंद्र का संशोधन
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