Wednesday, 28 January 2026

परमात्मा हमारी श्रद्धा, विश्वास, निष्ठा और अनुभूति हैं ---

परमात्मा हमारी श्रद्धा, विश्वास, निष्ठा और अनुभूति हैं| जैसे इस से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई सूर्योदय में विश्वास करता है या नहीं, सूर्योदय तो होगा ही| वैसे ही परमात्मा का अस्तित्व किसी के विश्वास/अविश्वास पर निर्भर नहीं हैं|

परमात्मा अपरिभाष्य हैं| परमात्मा को किसी परिभाषा में नहीं बाँध सकते| परमात्मा को परिभाषित करने का प्रयास वैसे ही है जैसे कनक-कसौटी पर हीरे को कसने का प्रयास| परमात्मा हमारा अस्तित्व है, जिसे जाने बिना जीवन में हम अतृप्त रह जाते हैं| उसे जानने का प्रयास ही स्वयं को जानने का प्रयास है|
कृपा शंकर
२८ जनवरी २०२०

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