फ़ेसबुक/ट्वीटर/व्हाट्सएप्प/ईमेल आदि की दुनियाँ आभासी नहीं, वास्तविक है| फ़ेसबुक पर मुझे अनेक सत्संगी मित्र मिले हैं, कई अच्छे/बुरे अनुभव हुए हैं, और बहुत कुछ जानने को भी मिला है| सबसे बड़ा लाभ तो यह हुआ है कि मुझे अपने विचारों और भावों को व्यक्त करने का अवसर मिला| हृदय में परमात्मा और राष्ट्र के प्रति जो परमप्रेम था, उसे शब्द देकर मैं व्यक्त कर सका, इसका मुझे बड़ा गर्व और प्रसन्नता है|
आरंभ में मैं अंग्रेजी में लिखता था, तब बहुत सारे विदेशी मित्र थे| संतुष्टि मुझे हिन्दी में लिख कर ही मिली| हिन्दी में लिखने के कारण विदेशी मित्र सब हट गए और भारतीय मित्र खूब हो गए| फ़ेसबुक पर सैंकड़ों मित्र बने, सैंकड़ों चले गए और सैकड़ों हैं| सबसे बड़ा आश्चर्य तो यह है कि जो मित्र आरंभ से ही मेरे साथ टिके हुए हैं वे कभी बोर नहीं हुए और अभी भी मेरे लेखों को पढ़ते हैं| मैं एक ही विषय पर लिखता हूँ, वह है भक्ति ..... या तो परमात्मा की या फिर राष्ट्र की|
मेरे निजात्म आप सब को मेरा सप्रेम सादर नमन ! ॐ तत्सत् ॐ ॐ ॐ !
१३ फरवरी २०२०
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