कल रात्री को मैनें निकट भविष्य का एक दृश्य देखा जिसमें रूस ने पूर्व सोवियत संघ से पृथक हुए ---
(१) कॉकेशिया के ३ देशों -- अजरबेजान, आर्मेनिया, और जॉर्जिया;
(२) मध्य-एशिया के ५ देशों -- कजाकस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, और ताजिकिस्तान; व
(३) पूर्वी यूरोप के ६ देशों -- यूक्रेन, बेलारूस, मोल्दोवा, लातविया, लिथुआनिया, और एस्तोनिया;
(कुल १४ देशों) पर अपना अधिकार कर लिया है। इसमें रूस को किसी प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ा। बड़े आराम से उसने ऐसा कर लिया। पता नहीं ऐसा होगा या नहीं, पर रूस के मनोविज्ञान में यह सुप्त कामना अवश्य है।
रूस को अजरबेजान से पृथक करने वाली पर्वतमाला के आसपास का क्षेत्र कॉकेशिया कहलाता है। अफगानिस्तान व ईरान के उत्तर में पाँच मध्य-एशियाई देश हैं, जो कभी अखंड भारत के भाग थे।
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चीन के निश्चित रूप से कम से कम सात टुकड़े हो जाएँगे। इस के ऊपर एक लेख भी लिख चुका हूँ।
पूरा रूस एक दिन ईसाईयत को त्याग कर सनातन धर्मावलम्बी हो जाएगा।
कृपा शंकर
२२ जनवरी २०२६