अब पूरे विश्व के सभी देशों को मिल कर चीन पर आक्रमण करना चाहिए और द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात रूस के तानाशाह जोसेफ स्टालिन की सहायता से चीन ने जिन आठ स्वतंत्र देशों पर अधिकार कर लिया था, उन को स्वतंत्र करा कर चीन को उसकी मूल सीमा में सीमित कर देना चाहिए। ये आठ देश हैं -- मंचूरिया, डोंगबेइ, इन्नर मंगोलिया, निंगशिया, गंसू, क़्वींघाई, सिंजियांग, और तिब्बत।
योगोदय (Yogodaya)
स्वयं के आध्यात्मिक विचारों की अभिव्यक्ति ही इस ब्लॉग का एकमात्र उद्देश्य है |
Thursday, 25 June 2026
अब पूरे विश्व के सभी देशों को मिल कर चीन पर आक्रमण करना चाहिए ---
२५ जून १९७५ का वह काला दिन ----
२५ जून १९७५ का वह काला दिन ---
Saturday, 20 June 2026
जो साधक निरंतर परमात्मा की चेतना में रहते हैं उनका हरेक कार्य परमात्मा स्वयं करते हैं ---
Wednesday, 17 June 2026
आध्यात्मिक मार्ग पर हम सब की सबसे बड़ी बाधा — "लोकेषणा" है।
लोकेषणा -- एक मरीचिका और भटकाव ही है
लोकेषणा (संसार में यश, प्रसिद्धि और दूसरों से प्रशंसा की चाह) -- एक मरीचिका और भटकाव ही है। इससे अहंकार ही पुष्ट होता है, कोई तृप्ति नहीं मिलती। तृप्ति - सिर्फ भगवान की उपासना में है, अन्यत्र कहीं भी नहीं। सभी विषयों में अनासक्त व्यक्ति ही परम सिद्ध हो सकता है।
Tuesday, 16 June 2026
हठयोग पर जो भी उपलब्ध साहित्य है उसमें सबसे मुख्य "घेरण्ड संहिता" है ।
हठयोग पर जो भी उपलब्ध साहित्य है उसमें सबसे मुख्य "घेरण्ड संहिता" है| इस पर प्रामाणिक और सबसे अच्छा ज्ञान "बिहार स्कूल ऑफ योगा" मुंगेर (बिहार) के आचार्य स्वामी निरंजनानन्द ने दिया है| उन्होने घेरण्ड संहिता पर भाष्य और अन्य अनेक प्रामाणिक पुस्तकें लिखी हैं| उनके सन्यासी व अन्य शिष्य हठयोग का प्रामाणिक ज्ञान पूरे विश्व में दे रहे हैं| घेरण्ड मुनि का समय विवादास्पद है| अंग्रेज़ इतिहासकार उन्हें १७वीं शताब्दी का बताते हैं जो अविश्वसनीय है| घेरण्ड संहिता में सात अध्याय हैं जो निम्न विषयों पर प्रकाश डालते हैं .... षट्कर्म, आसन, मुद्रा, प्रत्याहार, प्राणायाम, ध्यान, और समाधि|
ध्यान ---
ध्यान :--- आज्ञा चक्र में एक प्रकाश की कल्पना करें जो समस्त ब्रह्मांड में व्याप्त है| पूरा ब्रह्मांड उसी प्रकाश के घेरे में है| फिर यह भाव करें कि "मैं स्वयं ही वह प्रकाश हूँ, यह देह नहीं"।