लोकेषणा (संसार में यश, प्रसिद्धि और दूसरों से प्रशंसा की चाह) -- एक मरीचिका और भटकाव ही है। इससे अहंकार ही पुष्ट होता है, कोई तृप्ति नहीं मिलती। तृप्ति - सिर्फ भगवान की उपासना में है, अन्यत्र कहीं भी नहीं। सभी विषयों में अनासक्त व्यक्ति ही परम सिद्ध हो सकता है।
योगोदय (Yogodaya)
स्वयं के आध्यात्मिक विचारों की अभिव्यक्ति ही इस ब्लॉग का एकमात्र उद्देश्य है |
Wednesday, 17 June 2026
लोकेषणा -- एक मरीचिका और भटकाव ही है
Tuesday, 16 June 2026
हठयोग पर जो भी उपलब्ध साहित्य है उसमें सबसे मुख्य "घेरण्ड संहिता" है ।
हठयोग पर जो भी उपलब्ध साहित्य है उसमें सबसे मुख्य "घेरण्ड संहिता" है| इस पर प्रामाणिक और सबसे अच्छा ज्ञान "बिहार स्कूल ऑफ योगा" मुंगेर (बिहार) के आचार्य स्वामी निरंजनानन्द ने दिया है| उन्होने घेरण्ड संहिता पर भाष्य और अन्य अनेक प्रामाणिक पुस्तकें लिखी हैं| उनके सन्यासी व अन्य शिष्य हठयोग का प्रामाणिक ज्ञान पूरे विश्व में दे रहे हैं| घेरण्ड मुनि का समय विवादास्पद है| अंग्रेज़ इतिहासकार उन्हें १७वीं शताब्दी का बताते हैं जो अविश्वसनीय है| घेरण्ड संहिता में सात अध्याय हैं जो निम्न विषयों पर प्रकाश डालते हैं .... षट्कर्म, आसन, मुद्रा, प्रत्याहार, प्राणायाम, ध्यान, और समाधि|
ध्यान ---
ध्यान :--- आज्ञा चक्र में एक प्रकाश की कल्पना करें जो समस्त ब्रह्मांड में व्याप्त है| पूरा ब्रह्मांड उसी प्रकाश के घेरे में है| फिर यह भाव करें कि "मैं स्वयं ही वह प्रकाश हूँ, यह देह नहीं"।
Wednesday, 10 June 2026
भगवान का भक्त कभी नष्ट नहीं होता --
जीवन में कभी भी विपरीत परिस्थितियाँ और संकट काल अचानक ही आ सकते हैं, जिन में जीवित रहने हेतु भगवान की कृपा होना आवश्यक है। भगवान भी श्रद्धालुओं की ही रक्षा करते हैं, जो उन को अपना मन, बुद्धि, चित्त, और अहंकार समर्पित कर देते हैं। भगवान का भक्त कभी नष्ट नहीं होता --
Tuesday, 9 June 2026
ब्राह्मण समाज में जागृति और एकता कैसे हो? ---
ब्राह्मण समाज में जागृति और एकता कैसे हो?
भारत का भविष्य "धर्म-सापेक्षता" में है, 'धर्म-निरपेक्षता" में नहीं ---
भारत का भविष्य "धर्म-सापेक्षता" में है, 'धर्म-निरपेक्षता" में नहीं। धर्म-निरपेक्षता का अर्थ है -- अधर्म-सापेक्षता। भारत की अस्मिता "सनातन-धर्म" है। भारत कोई भूमि का टुकड़ा मात्र नहीं, एक जीवंत सूक्ष्म सत्ता है। वास्तव में सनातन धर्म ही भारत है, और भारत ही सनातन धर्म है। सनातन धर्म का उत्थान ही भारत का उत्थान है, और सनातन धर्म का पतन ही भारत का पतन है। धर्म का पालन ही धर्म की रक्षा है।
Saturday, 6 June 2026
शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक
आज ही के दिन ६ जून १६७४ को रायगढ़ में शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था जो भारतीय इतिहास की एक गौरवशाली गाथा है| महान विजयनगर साम्राज्य के बाद पहली बार भारत में स्वराज्य की स्थापना हुई| शिवाजी का राज्याभिषेक काशी के वेद-पुराण-उपनिषदों के ज्ञाता पंडित गंगाधर भट्ट द्वारा किया गया| पंडित गंगाधर भट्ट ने शिवाजी की वंशावली के विस्तृत अध्ययन के बाद यह सिद्ध किया के उनका भोंसले वंश मूलतः मेवाड़ के वीरश्रेष्ठ सिसोदिया राजवंश की ही एक शाखा है| शिवाजी मूल रूप से सिसोदिया राजपूत थे| उन के पूर्वज मेवाड़ से महाराष्ट्र जाकर बस गए थे| (नेपाल का राजवंश भी सिसोदिया राजपूत ही है). गौ-ब्राह्मण प्रतिपालक, क्षत्रिय कुलगौरव, राजाधिराज, योगीराज श्री श्री छत्रपति शिवाजी महाराज की जय !