कल रात्री को मैनें निकट भविष्य का एक दृश्य देखा जिसमें रूस ने पूर्व सोवियत संघ से पृथक हुए ---
योगोदय (Yogodaya)
स्वयं के आध्यात्मिक विचारों की अभिव्यक्ति ही इस ब्लॉग का एकमात्र उद्देश्य है |
Thursday, 22 January 2026
पूर्व सोवियत संघ से पृथक हुए चौदह देशों पर क्या रूस पुनश्च: अपना अधिकार कर लेगा ?
Wednesday, 21 January 2026
मेरे जीवन का हर एक क्षण परमात्मा की अभिव्यक्ति है --- .
मेरे जीवन का हर एक क्षण परमात्मा की अभिव्यक्ति है ---
Tuesday, 20 January 2026
अपनी बुद्धि परमात्मा को बापस कर दें ---
अपनी बुद्धि परमात्मा को बापस कर दें ---
निष्काम कर्मयोग ---
निष्काम कर्मयोग ---
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अपने आप को बिना किसी शर्त के व बिना किसी माँग के भगवान के हाथों में सौंप कर निरंतर उनका चिंतन -- निष्काम कर्म है, यही कर्मयोग है और यही ध्यान है| कोई भी कामना कभी तृप्त नहीं करती, कामनाओं से मुक्ति ही तृप्ति है| परमात्मा में स्थित होकर ही तृप्त हो सकते हैं| भगवान के ध्यान में साधक भी वे हैं, साधना भी वे हैं और साध्य भी वे ही हैं| यहाँ तक कि दृष्य, दृष्टी और दृष्टा भी वे ही हैं|
ॐ तत् सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
२० जनवरी २०२०
भारत एक धर्मनिष्ठ राष्ट्र है, जिसका लक्ष्य सनातन काल से ही धर्म की स्थापना रहा है ---
अब समय आ गया है जब धर्मरक्षा हेतु सनातन हिन्दू धर्मावलम्बी अपने धर्म का पालन करें| हिन्दू धर्म, व देवी-देवताओं के अपमान की सजा मृत्यु-दंड हो| हिन्दू आस्थाओं पर अधर्मियों द्वारा निरंतर मर्मांतक प्रहार किए जा रहे हैं, जो अब असह्य हैं|
माँ ---
माँ ---
Sunday, 18 January 2026
आध्यात्म में कुछ पाने या प्राप्ति की कामना एक मरीचिका है ---
आध्यात्म में कुछ पाने या प्राप्ति की कामना एक मरीचिका है। जो कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है, वह तो हम "स्वयं" हैं। आध्यात्मिक मार्ग पर मार्ग-दर्शन सब को प्राप्त होता है। कोई यदि यह कहे कि उसे मार्ग-दर्शन नहीं मिला है तो वह झूठ बोल रहा है। भगवान की कृपा सब पर समान रूप से है।