Friday, 28 November 2025

जीवन में पूर्णता, और समर्पण कैसे हो ?

 जीवन में पूर्णता, और समर्पण कैसे हो ?

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(प्रश्न) : निज जीवन में पूर्णता को प्राप्त किए बिना तृप्ति और संतुष्टि नहीं मिलती। लेकिन पूर्णता को हम कैसे प्राप्त हों?
(उत्तर) : हमारी अंतर्रात्मा कहती है कि जिन का कभी जन्म भी नहीं हुआ, और मृत्यु भी नहीं हुई, उनके साथ जुड़ कर ही हम पूर्ण हो सकते हैं।
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(प्रश्न) : लेकिन वे हैं कौन?
(उत्तर) : जिनकी हमें हर समय अनुभूति होती है, वे परमब्रह्म परमशिव परमात्मा ही पूर्ण हो सकते हैं। उन को उपलब्ध होने के लिए ही हमने जन्म लिया है। जब तक उनमें हम समर्पित नहीं होते, तब तक यह अपूर्णता रहेगी॥
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(प्रश्न) : उन्हें हम समर्पित कैसे हों ?
(उत्तर) : एकमात्र मार्ग है -- परमप्रेम, पवित्रता और उन्हें पाने की एक गहन अभीप्सा। अन्य कोई मार्ग नहीं है। जब इस मार्ग पर चलते हैं, तब परमप्रेमवश वे निरंतर हमारा मार्गदर्शन करते हैं। ॐ तत्सत् !!
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"ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पुर्णमुदच्यते।
पूर्णश्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥"

कृपा शंकर
२९/११/२०२४

Thursday, 27 November 2025

शिव के नाम पर पाखंड करने की चाल इंदिरा की थी, बाला तो मुखोटे थे ---

 (Acharya Chandrashekhar Shaastri की वाल से साभार copy/pasted लेख)

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शिव के नाम पर पाखंड करने की चाल इंदिरा की थी, बाला तो मुखोटे थे, जो अब उतर गया है शवसेना
नवाब मलिक ने बिल्कुल सच बोला कि शिवसेना का जन्म हिंदुत्व के लिए नहीं हुआ था और ना ही शिवसेना कभी हिंदुत्ववादी रही ।
दरअसल शिवसेना को इंदिरा गांधी ने बनाया था। इंदिरा गांधी के समय में मुंबई ट्रेड यूनियन, मजदूर नेताओं और हड़ताल कराने वालों का गढ़ बन गया था। शंकर गुहा नियोगी से लेकर जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में बहुत लंबी लंबी हड़ताल चली जिसमें रेलवे से लेकर महाराष्ट्र सरकार के तमाम विभाग जैसे परिवहन से लेकर बिजली विभाग शामिल थे सब के सब हड़ताल के चपेट में थे ।
उसी जमाने में पानी वाली बाई के नाम से मशहूर मृणाल गोरे ने जो पानी को लेकर आंदोलन किया था उसे आजाद भारत का महिलाओं द्वारा किया गया सबसे बड़ा आंदोलन कहते हैं । लाखों की संख्या में महिलाएं घरों से निकलकर सड़क पर प्रदर्शन की थी
तब इंदिरा गांधी को लगा कि हड़ताल से निपटने का सबसे अच्छा उपाय यही है इनके सामने भी एक गुंडागर्दी खड़ी कर दी जाए। इंदिरा गांधी ने यह नोटिस किया कि इस हड़ताल में सब लोग एक भारतीय की हैसियत से शामिल होते हैं यानी कहीं कोई क्षेत्रवाद नहीं होता था उसके बाद इंदिरा गांधी ने यह सोचा क्यों ना महाराष्ट्र में क्षेत्रवाद का बीज बो दिया जाए जिससे कोई ईसाई जॉर्ज फर्नांडिस या फिर कोई छत्तीसगढ़ का शंकर गुहा नियोगी आकर महाराष्ट्र में अपनी पैठ बनाकर हड़ताल ना कर सके और यूनियन बाजी बंद हो जाए
इंदिरा गांधी ने बाल ठाकरे को बढ़ावा दिया और बाल ठाकरे ने इंदिरा गांधी के साथ मिलकर बड़ी चालाकी से मुंबई की एकता को तोड़ने का काम किया बाल ठाकरे ने सबसे पहला आंदोलन दक्षिण भारतीयों खासकर शेट्टी लोगों के खिलाफ किया उन्होंने नारा दिया बजाओ पुंगी भगाओ लूंगी यानी मुंबई में जितने भी दक्षिण भारतीय थे उनको शिवसेना के गुंडे लाठी लेकर मार मार कर भगाते थे फिर उसके बाद बाल ठाकरे ने अपना आंदोलन उत्तर भारतीयों के खिलाफ किया फिर उसके बाद बाल ठाकरे ने अपना आंदोलन गुजरातियों के खिलाफ किया ।
बाल ठाकरे ने एक साथ सभी बाहरी लोगों पर हमला नहीं बोला क्योंकि उन्हें पता था यदि वह एक साथ सब पर हमला बोलेंगे इकट्ठे होकर जवाब देंगे इसीलिए इंदिरा गांधी की सलाह पर बारी-बारी से एक-एक के खिलाफ हमला किया गया यहां तक कि जब इंदिरा गांधी ने भारत में इमरजेंसी लगाई थी उस वक्त बाल ठाकरे और शिवसेना के साथ खड़ी थी और बाल ठाकरे का समर्थन किया
और जैसा हर एक आंदोलन में हुआ है इंदिरा गांधी ने पहले किसी को आगे करके अपना काम निकाला बाद में उसे खत्म कर दिया चाहे वह पंजाब का भिंडरावाले हो या फिर नागालैंड का मूवीवा हो
इंदिरा गांधी के शह पर शिवसैनिकों को तहबाजारी वसूली, ठेले वालों से वसूली, टेंपो वालों से वसूली और अपना यूनियन बनाकर बड़े-बड़े उद्योगपतियों से वसूली का चस्का लग गया था इसलिए उन्होंने अपना काम चालू रखा और बाद में थोड़े समय के लिए इन्होंने हिंदूवादी का चोला जरूर ओढ़ा था।
और पैसे बनाने के लिए शिवसेना ने ही माइकल जैक्सन का कंफर्ट मुंबई में आयोजित करवाया था और उस कंफर्ट का पूरा टिकट शिवसेना ने बेचा था

विश्व के तीन स्थानों पर इस समय युद्ध की पूरी संभावनायें हैं। यह कोई ज्योतिषीय भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि वर्तमान घटनाक्रम के गहन विश्लेषण का सार है ---

 विश्व के तीन स्थानों पर इस समय युद्ध की पूरी संभावनायें हैं। यह कोई ज्योतिषीय भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि वर्तमान घटनाक्रम के गहन विश्लेषण का सार है ---

(१) भारत का -- चीन और पाकिस्तान से युद्ध।
(२) रूस व बेलारूस का -- यूक्रेन व उसके समर्थकों से युद्ध।
(३) ताइवान व उसके समर्थकों का -- चीन से युद्ध।
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भारत बिलकुल मध्य में पड़ता है। भगवान भारत की निश्चित रूप से रक्षा करेंगे। भारत का दुर्भाग्य था कि तत्कालीन भारत सरकार ने भारत की रक्षा नहीं की और तिब्बत का पूरा भाग चीन को सौंप दिया। यही नहीं, पाकिस्तान का निर्माण भी भारत का दुर्भाग्य था। जिस भूमि पर पाकिस्तान बना वहाँ हम अपनी अस्मिता की रक्षा नहीं कर पाये। भारत के लद्दाख और कश्मीर का बहुत बड़ा भूभाग पाकिस्तान और चीन ने हमसे छीन रखा है।
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यूक्रेन व जार्जिया के साथ भी अन्याय हुआ है। ये देश अपनी स्वयं की रक्षा करने में असमर्थ हैं। यूक्रेन अपनी रक्षा के लिए पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर है। रूस ने यूक्रेन से पूरा क्रीमिया प्रायदीप छीन लिया, अजोव सागर पर भी अधिकार कर रखा है, और यूक्रेन के दोनेत्स्क क्षेत्र पर अपने समर्थकों से अधिकार करवा रखा है। यूक्रेन में बहुत अधिक तनाव है। यदि अमेरिका के बीच में कूद पड़ने का भय नहीं होता तो अब तक रूसी सेना पूरे यूक्रेन पर अधिकार कर चुकी होती।
ऐसे ही जार्जिया की स्थिति है। इस देश के उत्तर में रूस है, व दक्षिण में तुर्की, अज़र्बेजान और आर्मेनिया। जार्जिया के अब्खाजिया और दक्षिण ओशेतिया प्रान्तों पर रूसी सेना ने अधिकार कर रखा है। पूर्व रूसी तानाशाह स्टालिन मूल रूप से जार्जिया का ही था।
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दक्षिण चीन सागर के ताइवान द्वीप की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में भारत के लोगों को अच्छी तरह पता है। विश्व में सबसे अधिक तनाव वहीं है। कभी भी वहाँ युद्ध छिड़ सकता है। वहाँ युद्ध छिड़ गया तो भारत भी अछूता नहीं रहेगा।
कुछ दिनों में रूसी राष्ट्रपति की होने वाली भारत की यात्रा, रूस का एक बहुत बड़ा कूटनीतिक अभियान है, जिसमें भारत को भी अपनी सर्वश्रेष्ठ कूटनीतिक प्रतिभा दिखानी होगी।
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कृपा शंकर
२७ नवंबर २०२१

Wednesday, 26 November 2025

(१) संविधान-दिवस। (२) पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा मुंबई पर २६-११-२००८ को किये गये भीषण आक्रमण की वर्षगांठ।

 आज २६ नवंबर २०२४ को भारत में -- (१) संविधान-दिवस है, और (२) पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा मुंबई पर २६-११-२००८ को किये गये भीषण आक्रमण की १६वीं वर्षगांठ है। लगता है इस आक्रमण में तत्कालीन भारत सरकार की भी सहमति थी। इन दोनों विषयों पर चर्चा करते हैं।

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(१) देश का संविधान देश के राजनेताओं द्वारा निर्मित देश के मार्गदर्शक कानूनों और नीतियों का संग्रह मात्र होता है, इससे अधिक और कुछ भी नहीं। संविधान का अर्थ है -- समान विधान। लेकिन भारत का संविधान वर्तमान समय तक तो इस मापदंड पर खरा नहीं उतरता। यहाँ सब के लिए समान नागरिक संहिता (कानून) नहीं हैं। जनता का वर्गीकरण -- अल्पसंख्यक, बहुसंख्यक, अगड़ा, पिछड़ा और अति-पिछड़ा आदि के नाम पर कर रखा है, जो एक समान विधान, और देश की अस्मिता (सनातन धर्म) की भावना की भावना के विरुद्ध है। संविधान कोई धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि राजनीतिक मार्गदर्शक मात्र होता है। संविधान सभा के सभी सदस्यों को मैं नमन करता हूँ। अब तक तो उनमें से कोई भी जीवित नहीं है। उन्होंने संविधान को बनाने में बहुत अधिक परिश्रम किया था।
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(२) मुंबई का हुतात्मा सिपाही तुकाराम ओंबले ज़िन्दाबाद !! भारत माता की सेवा में उनका योगदान किसी भी संत-महात्मा से कम नहीं है। भगवान उन्हें सद्गति प्रदान करें। भगवान की परम कृपा हम सब के ऊपर हुई थी, तभी उन्होने कसाब नाम के पाकिस्तानी आतंकी को जीवित पकड़ा, अन्यथा अति-अति अनर्थ हो जाता। विश्व के सभी हिंदुओं को आतंकी घोषित करने की तत्कालीन केंद्र सरकार की योजना थी, जो Deep State की गुलाम थी।
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Deep State विश्व के ऐसे लोगों का एक गोपनीय समूह है, जो सम्पूर्ण विश्व को अपना गुलाम बनाना चाहते हैं। ऐसे लोगों का केंद्र अमेरिका के वाशिंगटन डी.सी., ब्रिटेन के लंदन सिटी, और वेटिकन में से कहीं से संचालित होता है। वे विश्व से सनातन-धर्म और भारत को भी नष्ट कर अपनी स्वयं की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था स्थापित करना चाहते हैं।
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मुंबई में २६ नवंबर २००८ के दिन हुये भीषण आतंकी हमलों में मारे गए सभी सैंकड़ों निर्दोष नागरिकों, और सभी वीर सुरक्षा व पुलिस कर्मियों को (सिर्फ एक करकरे को छोड़कर) श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ, जो मुंबई की सुरक्षा के लिए लड़े और अपने प्राणों की आहुति दी। यहाँ कुछ बातें गौर करने योग्य हैं --
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२६/११/२००८ के दिन हुए आक्रमण की पूर्व सूचना मोसाद और सीआईए ने तत्कालीन भारत सरकार को दे दी थी, लेकिन तत्कालीन भारत सरकार ने कोई कारवाई नहीं की। इस हमले को टाला जा सकता था। उक्त हमले के लिए आरएसएस को दोषी बताने की योजना बना ली गई थी, और इस बारे में किताब भी लिख ली गई थी, तो हमले को तत्कालीन भारत सरकार क्यों रोकती?
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सभी को जय सियाराम। भगवान -- भारत, सनातन धर्म और आप सब की रक्षा करें। आप की कीर्ति और यश अमर रहे, आप पर परमात्मा की परम कृपा हो, व हृदय में परमप्रेम जागृत हो। परमात्मा की शरण लें, सभी की वे ही रक्षा कर सकते हैं।
हरिः ॐ तत्सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
२६ नवंबर २०२४

Monday, 24 November 2025

भारत सदा विजयी रहेगा .....

 भारत सदा विजयी रहेगा .....

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मनुष्य जीवन में पूर्णता का सतत प्रयास, अपनी श्रेष्ठतम सम्भावनाओं की अभिव्यक्ति, परम तत्व की खोज, दिव्य अहैतुकी परम प्रेम, भक्ति, करुणा और परमात्मा को समर्पण ... यह भारत की सनातन संस्कृति और धर्म है| भारत सदा विजयी रहेगा|
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पुरातन काल से ही अनेक बार राक्षसी/आसुरी/पैशाचिक आक्रांताओं ने भारत की दैवीय संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास किया है, पर ईश्वर के अवतारों व अनेक मनीषियों ने इस पुण्य भूमि में जन्म लेकर धर्म व संस्कृति के पुनरोद्धार का पुनीत कार्य भी सदा किया है| भारत की प्राचीन शिक्षा-पद्धति, व कृषि-व्यवस्था को नष्ट कर, हमारे धर्म-ग्रन्थों को विकृत कर, झूठा इतिहास पढ़ाकर, देवालयों को ध्वस्त कर, बलात् धर्मांतरण, नर-संहार, दुराचार व राक्षसी आतंक के द्वारा असत्य और अंधकार की शक्तियों ने भारत को नष्ट करने का प्रयास किया, जो अभी भी चल रहा है| पर उन्हें सफलता नहीं मिलेगी| जैसे-जैसे मनुष्य की चेतना उन्नत होगी, मनुष्य की सोच भी ऊर्ध्वमुखी होगी, और उन्हें सुख-शांति व सुरक्षा सनातन-धर्म व भारत की संस्कृति में ही मिलेगी| परोपकार, सब के सुखी व निरोगी होने और समष्टि के कल्याण की कामना सनातन संस्कृति में ही है, अन्यत्र कहीं नहीं|
ॐ तत्सत् |
कृपा शंकर
२५ नवंबर २०२०

Sunday, 23 November 2025

सांस तो स्वयं महासागर ले रहा है, सांसें लेने का मेरा भ्रम मिथ्या है ---

एक बार अनुभूति हुई कि सामने एक महासागर आ गया है, तो बिना किसी झिझक के मैंने उसमें छलांग लगा दी और जितनी अधिक गहराइयों में जा सकता था उतनी गहराइयों में चला गया। फिर सांस लेने की इच्छा हुई तो पाया कि सांस तो स्वयं महासागर ले रहा है, सांसें लेने का मेरा भ्रम मिथ्या है। फिर भी पृथकता का यह मिथ्या बोध क्यों? यही तो जगत की ज्वालाओं का मूल है।

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“शिवो भूत्वा शिवं यजेत्” --- जीवन में हम क्या बनना चाहते हैं, और क्या प्राप्त करना चाहते हैं? यह सब की अपनी अपनी सोच है। इस जीवन के अपने अनुभवों और विचारों के अनुसार इस जीवन में मैं जो कुछ भी प्राप्त करना चाहता हूँ, वह तो शिवभाव में मैं स्वयं हूँ। स्वयं से परे अन्य कुछ है ही नहीं। हे प्रभु, स्वयं को मुझमें व्यक्त करो। २३ नवंबर २०२४

Saturday, 22 November 2025

भगवान से बड़ा छलिया और कोई नहीं है .....

 भगवान से बड़ा छलिया और कोई नहीं है .....

हमने भगवान के साथ बहुत अधिक छल किया होगा तभी तो वे भी हमारे साथ छल ही कर रहे हैं| उनसे बड़ा छलिया और कोई नहीं है| सर्वत्र होकर भी वे समक्ष नहीं हैं, इस से बड़ा छल और क्या हो सकता है?
चलो, तुम्हारी मर्जी ! तुम चाहे जैसा करो, पर तुम्हारे बिना हम अब और नहीं रह सकते| इसी क्षण तुम्हें व्यक्त होना ही होगा| कोई अनुनय-विनय हम नहीं करेंगे क्योंकि तुम्हारे साथ एकरूपता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है| तुम्हारे बिना बड़ी भयंकर पीड़ा हो रही है, यह बहुत बड़ी विपत्ती है| अब तो रक्षा करो| इतनी निष्ठुरता से स्वयं से विमुख क्यों कर रहे हो? तुम्हारे से विमुखता ही हमारे सब दुखों कष्टों का कारण है|
ॐ तत्सत् ! ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ! ॐ गुरु ! ॐ ॐ ॐ !!
२३ नवम्बर २०१९